
चंदन की खुशबू से महकेगा उदयपुर, 10हजार पौधे लगेंगे, वन मंत्री ने किया दौरा
पिछोला झील किनारे विकसित होगा चंदन वन, वन मंत्री संजय शर्मा ने किया निरीक्षण
उदयपुर में 20 से 22 हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार होगा चंदन वन
10 हजार पौधों के प्रोजेक्ट पर सरकार का फोकस
पर्यावरण से पर्यटन को बढ़ाने की कवायद
उदयपुर,dusrikhabar.com। राजस्थान सरकार के ‘चंदन वन विकसित’ विजन को नई दिशा देते हुए उदयपुर की प्रसिद्ध पिछोला झील के किनारे विशाल चंदन वन विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के वन मंत्री संजय शर्मा ने कालका माता वन क्षेत्र और नर्सरी का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस परियोजना के तहत उदयपुर, सिरोही और बांसवाड़ा में करीब 10 हजार चंदन पौधे लगाए जाएंगे। उदयपुर में यह चंदन वन 20 से 22 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा।
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पिछोला झील किनारे कालका माता क्षेत्र में बनेगा चंदन वन
उदयपुर की ऐतिहासिक पिछोला झील के किनारे स्थित कालका माता नर्सरी को चंदन वन परियोजना के लिए चुना गया है। वन मंत्री संजय शर्मा ने मौके पर पहुंचकर प्रस्तावित क्षेत्र का निरीक्षण किया और अधिकारियों से प्रोजेक्ट की प्रगति की जानकारी ली। राज्य सरकार इस परियोजना को पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आगे बढ़ा रही है।
वन विभाग के अनुसार यहां 20 से 22 हेक्टेयर क्षेत्र में व्यवस्थित तरीके से चंदन वन विकसित किया जाएगा। यह परियोजना उदयपुर की प्राकृतिक सुंदरता को और आकर्षक बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन में भी अहम भूमिका निभाएगी।
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10 हजार चंदन पौधों के रोपण का लक्ष्य
राजस्थान सरकार ने उदयपुर, सिरोही और बांसवाड़ा जिलों में करीब 10 हजार चंदन पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। वन विभाग इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। अधिकारियों का कहना है कि चंदन की बढ़ती मांग और इसकी आर्थिक उपयोगिता को देखते हुए यह योजना भविष्य में राज्य के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
सरकार का उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि चंदन संरक्षण और दीर्घकालिक वन प्रबंधन मॉडल तैयार करना भी है।
चंदन पौधों के साथ लगाए जाएंगे सहायक पौधे
वन अधिकारियों ने बताया कि चंदन एक अर्ध-परजीवी प्रजाति है, जो अकेले विकसित नहीं हो सकती। इसके बेहतर विकास के लिए होस्ट प्लांट यानी सहायक पौधों की आवश्यकता होती है। चंदन की जड़ें इन पौधों से जुड़कर आवश्यक पोषण प्राप्त करती हैं।
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इसी कारण चंदन के साथ मेहंदी, करोंदा, नीम, हेज और अकेशिया जैसे पौधे भी लगाए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पौधों की मदद से चंदन का विकास तेजी से होगा और वन क्षेत्र अधिक संतुलित रहेगा।
पर्यावरण और पर्यटन दोनों को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार पिछोला झील क्षेत्र में चंदन वन विकसित होने से उदयपुर के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से भी नया आकर्षण बन सकता है। चंदन की खुशबू और हरियाली से युक्त यह वन भविष्य में इको-टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बन सकता है। राजस्थान सरकार की यह पहल राज्य में हरित क्षेत्र बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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वन मंत्री ने अधिकारियों को दिए दिशा-निर्देश
वन मंत्री संजय शर्मा ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चंदन वन केवल पर्यावरणीय परियोजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित विरासत तैयार करने का प्रयास है।
उदयपुर दौरे के दौरान वन मंत्री डबोक भी पहुंचे, जहां उन्होंने वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी के पिता के निधन पर संवेदना व्यक्त की। इसके बाद वे बांसवाड़ा के लिए रवाना हो गए।
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