
बंगाल में दो-दो सीएम, ममता का इस्तीफे से इनकार, संविधान में प्रावधान…!
बंगाल में दो दो सीएम…
चुनाव नतीजों के बाद ममता बनर्जी का विरोध, बीजेपी और चुनाव आयोग पर आरोप
हार के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार, कहा—‘जनादेश नहीं, साज़िश’
क्या पैदा होगा संवैधानिक संकट? विशेषज्ञों ने दिया जवाब
अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल के अधिकार चर्चा में
नई सरकार गठन की प्रक्रिया पर क्या पड़ेगा असर्र
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर, dusrikhabar.com। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। ममता बनर्जी ने हार स्वीकार करने से इनकार करते हुए बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देती हैं, तो क्या इससे संवैधानिक संकट पैदा होगा या नई सरकार के गठन में कोई बाधा आएगी?
हार के बाद ममता बनर्जी का बड़ा बयान
चुनावी नतीजों के एक दिन बाद कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि यह हार जनादेश की नहीं बल्कि साज़िश का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर जीत हासिल की है। उन्होंने साफ कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी क्योंकि उन्हें अनुचित तरीके से हराया गया है।
इस्तीफे से इनकार, लेकिन क्या संभव है?
ममता बनर्जी के इस रुख के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य में एक समय में दो मुख्यमंत्री नहीं हो सकते। ऐसे में जब नई सरकार का गठन होगा और नया मुख्यमंत्री शपथ लेगा, तो मौजूदा मुख्यमंत्री को पद छोड़ना ही होगा।
क्या होगा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री राज्यपाल की इच्छा तक अपने पद पर बना रहता है। यदि कोई मुख्यमंत्री बहुमत खो देता है या चुनाव हार जाता है, तो राज्यपाल ‘प्लेजर विड्रॉ’ कर सकता है, यानी उसे पद से हटाने का अधिकार रखता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं, तब भी राज्यपाल नई सरकार बनाने के लिए बहुमत प्राप्त दल के नेता को आमंत्रित कर सकते हैं और आवश्यक होने पर मौजूदा मुख्यमंत्री को पद से हटाया भी जा सकता है।
नई सरकार के गठन पर क्या असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति से किसी बड़े संवैधानिक संकट की संभावना नहीं है। यह अधिकतर राजनीतिक बयानबाजी और नैतिक दबाव बनाने की रणनीति मानी जा रही है। जैसे ही बहुमत प्राप्त दल अपना नेता चुन लेगा, सरकार गठन की प्रक्रिया सामान्य रूप से आगे बढ़ जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय तुलना और राजनीतिक संदेश
कुछ विश्लेषक ममता बनर्जी के इस रुख की तुलना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कर रहे हैं, जिन्होंने 2020 के चुनाव परिणामों को स्वीकार करने में देरी की थी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की संवैधानिक व्यवस्था स्पष्ट है और यहां ऐसी स्थिति लंबे समय तक नहीं रह सकती।
कानून से ऊपर नहीं राजनीति
बहरहाल पूरे घटनाक्रम से साफ है कि भारतीय लोकतंत्र में संवैधानिक प्रावधान मजबूत हैं और किसी भी राजनीतिक विवाद के बावजूद सरकार गठन की प्रक्रिया बाधित नहीं होती। यदि कोई मुख्यमंत्री बहुमत खो देता है, तो उसे पद छोड़ना ही होता है—चाहे वह स्वेच्छा से हो या संवैधानिक प्रक्रिया के तहत।
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