कृषि मंडियों में यूजर टैक्स;  विरोध से स्वीकार्यता तक, वापस मिलेगा बड़ा फायदा

कृषि मंडियों में यूजर टैक्स;  विरोध से स्वीकार्यता तक, वापस मिलेगा बड़ा फायदा

यूजर टैक्स का शुरुआत में हुआ कड़ा विरोध, अब मिल रही स्वीकृति

अगस्त 2025 से मार्च 2026 तक सरकार को 12 करोड़ की आय

प्रोसेस्ड उत्पाद बेचने वाले दुकानदार भी अब टैक्स दायरे में

सालाना 50-60 करोड़ तक पहुंच सकती है राजस्व आय

मंडियों में विकास कार्यों और सुविधाओं को मिलेगा नया बल

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर,  dusrikhabar.com। राजस्थान की कृषि उपज मंडियों में लागू किए गए यूजर टैक्स को लेकर शुरुआत में जहां भारी विरोध देखने को मिला, वहीं अब यह व्यवस्था धीरे-धीरे स्वीकार की जा रही है। सरकार का दावा है कि इस टैक्स से मिलने वाली आय से मंडी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा और दुकानदारों व किसानों दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।

राजस्थान में यूजर टैक्स को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है। शुरुआती दौर में मंडियों के दुकानदारों ने इस टैक्स का जमकर विरोध किया, लेकिन समय के साथ जब इसके फायदे स्पष्ट होने लगे तो विरोध धीरे-धीरे खत्म होता गया।

क्या है पूरा मामला

राजस्थान की मंडियों में पहले से ही किसानों द्वारा बेची गई फसल पर व्यापारियों को मंडी शुल्क देना होता है। लेकिन कई दुकानदार ऐसे हैं जो मंडी परिसर में दुकान लेकर गैर अधिसूचित कृषि उपज जैसे तेल, घी, दूध और अन्य खाद्य उत्पाद बेच रहे हैं और किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं दे रहे।

सरकार ने इस असमानता को खत्म करने के लिए यूजर टैक्स लागू किया, ताकि सभी व्यापारी समान नियमों के तहत आएं। कृषि विभाग का स्पष्ट मानना है कि यदि कोई व्यापारी मंडी परिसर का उपयोग कर रहा है, तो उसे टैक्स देना अनिवार्य होगा।

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अगस्त 2025 में राज्य सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए मंडियों में गैर अधिसूचित कृषि उपजों एवं खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों पर 0.5 फीसदी यूजर टैक्स लागू किया। यानी 100 रुपये के उत्पाद पर केवल 50 पैसे का टैक्स। शुरुआत में दुकानदारों ने इसे अतिरिक्त बोझ बताते हुए विरोध किया और मामला अदालत तक पहुंच गया। फिलहाल उन्हें कोई राहत नहीं मिली है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

राजस्व में बढ़ोतरी और संभावनाएं

यूजर टैक्स लागू होने के बाद अगस्त 2025 से मार्च 2026 के बीच सरकार को करीब 12 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। विभाग का अनुमान है कि आने वाले समय में यह आय बढ़कर सालाना 50 से 60 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यह बढ़ी हुई आय मंडियों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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क्या कहते हैं अधिकारी

कृषि विपणन विभाग के निदेशक राजेश चौहान

राजेश चौहान, निदेश्क, कृषि विपणन विभाग

कृषि विपणन विभाग के निदेशक राजेश चौहान के अनुसार यूजर टैक्स से होने वाली आय का सीधा लाभ मंडियों के विकास में लगाया जाएगा। 

उनका कहना है कि एक व्यापारी टैक्स दे और दूसरा नहीं—यह नियमों के खिलाफ है, मंडी परिसर का उपयोग करने वाले हर व्यापारी को कर देना ही होगा और इससे पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित होगी।

टैक्स देना व्यापारियों के लिए ही फायदे का सौदा है क्योंकि उसी टैक्स से उनकी मंडी में आधुनिक सुविधाएं सरकार आसानी से उपलब्ध करवा पाएगी। 

राजस्थान की मंडियों की संरचना

राजस्थान में एपीएमसी एक्ट के तहत मंडियों का संचालन होता है। प्रदेश में कुल 174 कृषि मंडियां हैं इनमें लगभग 344 सब-यार्ड हैं।

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मंडियों की कैटेगरी व्यवस्था

राज्य की मंडियों को आय के आधार पर 5 श्रेणियों में बांटा गया है:

  • सुपर A क्लास: 5 करोड़ रुपये तक आय
  • A क्लास: 3-5 करोड़ रुपये
  • B क्लास: 2-3 करोड़ रुपये
  • C और D क्लास: 50 लाख से 2 करोड़ रुपये

यह वर्गीकरण मंडियों के विकास और बजट आवंटन में मदद करता है।

व्यापारियों और किसानों को क्या होगा फायदा

मंडी में दिया गया टैक्स केवल एक शुल्क नहीं, बल्कि किसानों और व्यापारियों के लिए बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक व्यापारिक माहौल तैयार करने का आधार है। इस टैक्स से मंडी का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होता है, जिससे खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पारदर्शी, सुविधाजनक और समयबद्ध बनती है। साफ-सफाई, सुरक्षा, डिजिटल जानकारी और बुनियादी सुविधाओं के कारण किसान और व्यापारी दोनों को सीधा लाभ मिलता है और उनका भरोसा भी बढ़ता है। यूजर टैक्स से मिलने वाली आय से मंडियों में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

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मंडी टैक्स से मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं:

  • बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और मण्डी यार्ड
  • सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत
  • दुकानदारों के लिए बेहतर व्यापारिक माहौल
  • किसानों के लिए सुविधाजनक बिक्री व्यवस्था
  • चारदीवारी के साथ सौन्दर्ययुक्त मुख्य प्रवेश द्वार
  • प्रत्येक गेट पर चेकपोस्ट की व्यवस्था
  • शुद्ध पेयजल सुविधा (वॉटर कूलर और वॉटर प्योरिफायर सहित)
  • पर्याप्त और सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था
  • चौकीदारी और नियमित सफाई व्यवस्था
  • भाव सूचना पट्ट एवं बड़ी मंडियों में इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड
  • बेहतर जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था
  • स्वच्छ और सुलभ शौचालय
  • आवश्यकता अनुसार कैंटीन सुविधा
  • कवर्ड ऑक्शन प्लेटफॉर्म (बारिश/धूप से सुरक्षा के साथ नीलामी)
  • लेबर शेड (मजदूरों के लिए विश्राम स्थल)
  • कियोस्क (जरूरत के अनुसार सेवाएं)
  • कम्प्यूटरीकृत धर्मकांटा (सटीक तौल व्यवस्था)
  • बैंकिंग सुविधा
  • पार्क एवं पौधारोपण (हरित और स्वच्छ वातावरण)
  • विभागीय योजनाओं की जानकारी के लिए डिस्प्ले बोर्ड
  • स्टाफ क्वार्टर / सचिव आवास
  • कोरियर सुविधा
  • मृदा परीक्षण प्रयोगशाला
  • तिलहन प्रधान मंडियों में ऑयल टेस्टिंग लैब
  • किसान भवन / विश्राम गृह
  • पशुओं के लिए पानी पीने की व्यवस्था (वॉटर ट्रफ)

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क्या कहते हैं नियम 

“17-ख. उपयोक्ता प्रभार संग्रहित करने की शक्ति :- मण्डी समिति, अनुज्ञापत्रधारियों से, इस अधिनियम के अधीन, गठित मण्डी यार्ड और उप मण्डी यार्ड में उनके द्वारा लाई गई या क्रीत या विक्रीत, गैर अधिसूचित कृषि उपज और खाद्य उत्पादों पर ऐसी दर से, जो राज्य सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाये, विहित रीति से उपयोक्ता प्रभार संग्रहित करेगी।”

हालांकि यह टैक्स अंततः उपभोक्ताओं की जेब से जाता है, लेकिन इसके बदले मिलने वाली सुविधाएं पूरे सिस्टम को मजबूत बनाती हैं।

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