नारायणा हॉस्पिटल जयपुर-कोशिका फाउंडेशन: ‘नन्ही मुस्कान की सुनहरी पहल’

नारायणा हॉस्पिटल जयपुर-कोशिका फाउंडेशन: ‘नन्ही मुस्कान की सुनहरी पहल’

नारायणा हॉस्पिटल जयपुर और कोशिका फाउंडेशन का मिशन

हार्ट में छेद की बीमारी से पीड़ित जरूरतमंद बच्चों को मिल रहा जीवनदान

गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों के लिए मुफ्त उपचार और सर्जरी की पहल

हर साल 2 लाख बच्चे जन्मजात हार्ट में छेद की बीमारी के साथ ले रहे जन्म

डॉक्टर्स और समाज सेवकों ने की मीडिया से की जागरूकता बढ़ाने की अपील

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर,dusrikhabar.com। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गंभीर हृदय रोगों के उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से Narayana Hospital Jaipur और Koshika Foundation के संयुक्त सहयोग से “नन्ही मुस्कान की सुनहरी पहल” अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पहल की प्रगति और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी गई। “Save Little Hearts, Save Little Life” की भावना के साथ शुरू हुई यह पहल पिछले 7–8 वर्षों से निरंतर जारी है और अब इसे और दोगुने प्रयासों के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।

इस अभियान के माध्यम से अब तक सैकड़ों बच्चों की हृदय सर्जरी और उपचार संभव हो पाया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों तक जीवनरक्षक उपचार पहुंचाना है जिनके परिवार आर्थिक कठिनाइयों के कारण इलाज नहीं करवा पाते।

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डॉ बलविंदर वालिया, फेसिलिटी डायरेक्टर, नारायणा हॉस्पिटल जयपुर

डॉ बलविंदर वालिया, फेसिलिटी डायरेक्टर, नारायणा हॉस्पिटल जयपुर

नॉर्थ इंडिया के चंद सेंटर्स में जयपुर नारायणा हॉस्पिटल शामिल

प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए Balwinder Singh Walia, फैसिलिटी डायरेक्टर, Narayana Hospital Jaipur ने बताया कि नॉर्थ इंडिया में चंद सेंटर्स ही ऐसे हैं जहां बच्चों की हार्ट में छेद की सर्जरी के पर्याप्त संसाधन सुपर सीनियर डॉक्टर्स की टीम मौजूद है। उनमें से एक सेंटर नारायणा हॉस्पिटल भी है। जो हमारे लिए गर्व की बात है।

डॉ बलविंदर वालिया ने कहा कि हम मुम्बई में स्थित नारायणा अस्पताल की यूनिट में भी जल्द ही इस तरह के ऑपरेशन की प्रोसेस शुरु करने जा रहे हैं। डॉ वालिया ने बताया कि आमजन में इस रोग के बारे में अभी अवेयरनेस कम है इसलिए लोगों के कहने पर बच्चों का हार्ट का ऑपरेशन लोग नहीं करवा रहे हैं।

यह ऑपरेशन चिंरजीवी योजना (Chiranjeevi Yojana) के तहत निशुल्क किया जा रहा है। वहीं कोशिका फाउंडेशन के जरिए भी निर्धन और गरीब परिवारों के बच्चों का ऑपरेशन निशुल्क करवाए जा रहे हैं। 

हर साल 2 लाख बच्चे जन्म लेते हैं जन्मजात हृदय रोग के साथ

Sunil Tandon, मैनेजिंग ट्रस्टी, कोशिका फाउंडेशन

Sunil Tandon, मैनेजिंग ट्रस्टी, कोशिका फाउंडेशन

Sunil Tandon, मैनेजिंग ट्रस्टी, कोशिका फाउंडेशन (Koshika Foundation) ने बताया कि देशभर में हर साल 2 लाख बच्चे ऐसे जन्म ले रहे हैं जिनके हार्ट में छेद है या वो इस तरह की बीमारी से पीड़ित हैं।

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आज भी घरों में ये मानसिकता बनी हुई है कि जैसे जैसे उम्र बढ़ेगी बच्चों के दिल का छेद अपने आप भर जाएगा। लेकिन यह भ्रांति है और पूरी तरह गलत है। इसका उपचार केवल ऑपरेशन ही है। टंडन ने बताया कि हम इस रोग से संबंधित जांचें के लिए भी पीड़ित बच्चों के परिजनों की मदद करेंगे। 

टंडन ने प्रेस से बात करते हुए बताया कि 2 लाख बच्चों में से एक लाख बच्चों को ऑपरेशन की जरूरत है लेकिन अभी तक भी केवल 25हजार बच्चों के ही ऑपरेशन हो पा रहे हैं बाकी 75हजार बच्चों को बैकलॉग हर साल बढ़ रहा है।

मीडिया से मेरा अनुरोध है कि लोगों में अवेयरनेस फैलाकर उन बच्चों की जिंदगी बचाने में हमारा सहयोग करें। राजस्थान में अन्य राज्यों के मरीजों के लिए RBSK योजना के तहत बच्चों के निशुल्क हार्ट ऑपरेशन किए जा रहे हैं।  

अब तक 330 बच्चों को मिला नया जीवन

सुनील टंडन ने बताया कि कोशिका फाउंडेशन अब तक देशभर में 330 बच्चों की सफल हार्ट सर्जरी निशुल्क करवा चुकी है। वहीं केवल राजस्थान में भी उनके संस्थान के माध्यम से 220 बच्चों के हार्ट के छेद का सफल ऑपरेशन करवाकर उन्हें जीवन दान देने में सफल रही है। इस पहल के तहत कई बच्चों को नया जीवन मिला है। इनमें से पांच केसों से इसे और बारीकी से समझा जा सकता है और इस बीमारी से बचाव और इसके उपचार के लिए प्रेरित किया जा सकता है। 

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सफल उपचार के प्रेरणादायक उदाहरण

इस पहल के अंतर्गत कई ऐसे बच्चों की कहानियां सामने आई हैं जो आज स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

नारायणा हॉस्पिटल जयपुर-कोशिका फाउंडेशन: ‘नन्ही मुस्कान की सुनहरी पहल’बिहार के बिस्मिल्लाह (1 वर्ष) को केवल एक महीने की उम्र में गंभीर जन्मजात हृदय रोग Tetralogy of Fallot का पता चला। कम वजन के कारण कुछ समय इंतजार के बाद जब उसका वजन बढ़ा तो डॉक्टरों ने सर्जरी की, जो सफल रही।

करौली के सूरज (17 वर्ष) की वर्ष 2016 में सर्जरी हुई थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण नियमित फॉलो-अप नहीं हो सका और समस्या दोबारा उभर आई। वर्ष 2023 में दोबारा इलाज के बाद वह अब स्वस्थ जीवन जी रहा है।

बीकानेर की इशिका (17 वर्ष) को तेज सांस फूलने की समस्या के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने ओपन हार्ट सर्जरी की और कुछ दिनों में वह पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गई।

उत्तर प्रदेश के सौरव (14 वर्ष) के दिल के वाल्व कमजोर थे, जिससे उसका शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा था। डॉक्टरों ने वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की और अब उसका स्वास्थ्य तेजी से सुधर गया है।

टोंक की स्वाति (11 वर्ष) गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में नृत्य के दौरान अचानक बेहोश हो गई। जांच में दिल में छेद की समस्या सामने आई। डॉक्टरों ने PDA डिवाइस क्लोजर प्रक्रिया से उपचार किया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।

ऑपरेशन के बाद देखभाल भी उतनी ही जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट सर्जरी की सफलता के साथ-साथ ऑपरेशन के बाद की देखभाल भी बेहद महत्वपूर्ण होती है

Pradeep Kumar Goyal, क्लिनिकल डायरेक्टर एवं एचओडी एनेस्थीसिया एंड क्रिटिकल केयर ने कहा कि बच्चों की हृदय सर्जरी संवेदनशील प्रक्रिया होती है और सही समय पर उपचार तथा उचित फॉलो-अप से बच्चों का जीवन पूरी तरह बदल सकता है।

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अनुभवी डॉक्टरों की टीम दे रही सेवाएं

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्य विशेषों और पैनलिस्ट्स में नारायणा हॉस्पिटल जयपुर के डॉ. सौरभ जयसवाल, डायरेक्टर – कार्डियक सर्जरी, डॉ प्रशांत माहवार, सीनियर कंसलटेंट पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, डॉ. सुनील शर्मा, सीनियर कंसलटेंट – कार्डियक सर्जरी, डॉ. सुनील कुमार गुप्ता, एसोसिएट कंसलटेंट पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, डॉ. रवि खंडेलवाल, सीनियर कंसलटेंट एर्नेस्थिसियोलॉजी, डॉ. बृजेश सोनी, सीनियर कंसलटेंट -एनेस्थिसियोलॉजी और सोमेश सहगल, ट्रस्टी कोशिका फाउंडेशन, बेला सहगल पत्नी सोमेड सहगल, अनु सचदेव पत्नी स्वर्गीय कर्नल अनिल सचदेव भी उपस्थित रहे।

क्या है यह हार्ट डिजिज? इससे बचाव के उपाय

जन्मजात हार्ट में छेद वह स्थिति है जब किसी बच्चे के जन्म के समय उसके दिल की दीवार में छोटा या बड़ा छेद होता है। चिकित्सकीय भाषा में इसे Congenital Heart Defect कहा जाता है। दिल में छेद मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है—एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) और वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD)। इन स्थितियों में दिल के दो हिस्सों के बीच की दीवार में छेद होने के कारण शुद्ध और अशुद्ध रक्त आपस में मिल सकता है, जिससे दिल को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

हार्ट में छेद

बीमारी के लक्षण

जन्मजात हार्ट में छेद के लक्षण छेद के आकार और स्थिति पर निर्भर करते हैं। छोटे छेद में कई बार लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन बड़े छेद में ये संकेत दिख सकते हैं—

  • सांस लेने में तकलीफ

  • जल्दी थकान होना

  • बच्चे का वजन और विकास धीमा होना

  • बार-बार छाती में संक्रमण होना

  • होंठ या नाखूनों का नीला पड़ना

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बीमारी के प्रमुख कारण

इस बीमारी का मुख्य कारण गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के दिल का पूरी तरह विकसित न होना माना जाता है। इसके पीछे कुछ जोखिम कारक हो सकते हैं—

  • गर्भावस्था में मां का संक्रमण

  • अनियंत्रित मधुमेह

  • कुछ दवाओं का दुष्प्रभाव

  • आनुवंशिक कारण

  • गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान या शराब का सेवन

क्या इसका इलाज संभव है?

आज चिकित्सा विज्ञान में इस बीमारी का सफल इलाज संभव है। कई मामलों में छोटा छेद बच्चे के बढ़ने के साथ-साथ अपने आप बंद हो जाता है। जबकि बड़े छेद का इलाज दवाओं, कैथेटर प्रक्रिया या हार्ट सर्जरी के माध्यम से किया जाता है। समय पर जांच और उपचार से बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं।

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बचाव के उपाय

हालांकि जन्मजात हार्ट में छेद को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन कुछ सावधानियों से जोखिम कम किया जा सकता है:-

  • गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच करवाना

  • संतुलित और पौष्टिक आहार लेना

  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवाइयों का सेवन न करना

  • धूम्रपान और शराब से दूरी रखना

  • मधुमेह या अन्य बीमारियों को नियंत्रित रखना

  • समय-समय पर भ्रूण की अल्ट्रासाउंड जांच करवाना

बहरहाल यह कहा जा सकता है कि जन्मजात हार्ट में छेद की बीमारी गंभीर जरूर है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा के कारण इसका समय पर पता लगाकर प्रभावी इलाज किया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान सावधानी, नियमित जांच और जागरूकता से इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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