क्या भाजपा में शामिल AAP के सांसदों पर लागू होगा दल-बदल कानून…? राघव

क्या भाजपा में शामिल AAP के सांसदों पर लागू होगा दल-बदल कानून…? राघव

7 सांसदों के दावे से सियासी भूचाल, लेकिन सिर्फ 3 आए सामने

4 सांसदों की चुप्पी से बढ़ा सस्पेंस, क्या टूटेगा ‘दो-तिहाई’ गणित?

AAP ने उठाए सवाल, दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी

BJP ने किया स्वागत, ‘विकसित भारत 2047’ से जोड़ा राजनीतिक संदेश

विशेषज्ञों की राय: 10वीं अनुसूची का क्लॉज 4 बचा सकता है सदस्यता

विजय श्रीवास्तव,

दिल्ली/जयपुर, dusrikhabar.com। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या AAP वापसी कर सकती है या खेल खत्म हो चुका है? 7 सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के दावे के बीच 3 सांसदों की चुप्पी ने पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना दिया है। इस राजनीतिक संकट का असली फैसला अब दल-बदल कानून और दो-तिहाई बहुमत के गणित पर टिका है।

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क्या है पूरा मामला?

AAP नेता राघव चड्ढा ने दावा किया कि पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा देकर बीजेपी जॉइन कर ली है। हालांकि, सार्वजनिक रूप से केवल तीन चेहरे ही नजर आए—राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक। दूसरी ओर, जिन चार सांसदों—हरभजन सिंह, विक्रम साहनी, राजिंदर गुप्ता और स्वाति मालीवाल के नाम लिए गए, उनमें से सिर्फ स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़ने की पुष्टि की है।

AAP संकट और राज्यसभा दलबदल

यह पूरा घटनाक्रम AAP संकट को गहरा करता है और राज्यसभा दलबदल के नए आयाम खोलता है। अगर 7 सांसदों का दावा सही साबित होता है, तो यह दो-तिहाई बहुमत के जरिए कानूनी रूप से सुरक्षित हो सकता है।

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AAP का पलटवार

AAP ने इस पूरे घटनाक्रम को “नियमों के खिलाफ” बताया है। पार्टी के राज्यसभा व्हिप एनडी गुप्ता और सांसद संजय सिंह ने साफ किया है कि वे तीन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे। उनका कहना है कि यह मामला सीधे तौर पर दल-बदल कानून (10वीं अनुसूची) के उल्लंघन का है।

क्या कहता है दल-बदल कानून?

भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत यदि कोई सांसद अपनी पार्टी छोड़ता है, तो उसकी सदस्यता जा सकती है, लेकिन क्लॉज 4 एक बड़ा अपवाद देता है। अगर किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ पार्टी बदलते हैं, तो इसे “विलय” माना जाएगा और वे अयोग्यता से बच सकते हैं।

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वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल के अनुसार “दो-तिहाई सदस्य सहमत हों तो इसे वैध विलय माना जाएगा, भले ही मूल पार्टी का औपचारिक विलय न हुआ हो।” यही दल-बदल कानून और दो-तिहाई नियम तय करेंगे कि सांसद अपनी सदस्यता बचा पाएंगे या नहीं।

BJP का राजनीतिक संदेश

बीजेपी ने इन नेताओं का स्वागत करते हुए इसे नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” विजन से जोड़ा। यह संकेत देता है कि मामला सिर्फ संख्या का नहीं, बल्कि राजनीतिक नैरेटिव का भी है।

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अब AAP के लिए क्या बचा है?

  • अगर 7 सांसदों का दावा साबित हो जाता है, तो AAP के पास कानूनी विकल्प सीमित होंगे
  • अगर 4 सांसद अलग रुख अपनाते हैं, तो दो-तिहाई गणित टूट सकता है
  • ऐसे में AAP कानूनी लड़ाई में बढ़त ले सकती है

यानी, पूरी बाजी अब उन 3 ‘खामोश’ सांसदों पर टिकी है।

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बहरहाल AAP के सामने यह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक संकट भी है। AAP संकट, दल-बदल कानून और राज्यसभा दलबदल के इस त्रिकोण में आने वाले दिनों में बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

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