
गीतांजली मेडिकल कॉलेज में अनोखा मामला, दुर्लभ “Bm” ब्लड ग्रुप की पहचान
गीतांजली मेडिकल कॉलेज उदयपुर में रूटीन जांच में सामने आया बी रक्त समूह का दुर्लभ उपप्रकार “Bm”
उन्नत सेरोलॉजिकल परीक्षण से हुई पुष्टि, विशेषज्ञ टीम की सतर्कता से मिली सफलता
विशेषज्ञ बोले – दुर्लभ रक्त समूह की सही पहचान मरीजों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी
सुश्री सोनिया,
उदयपुर, dusrikhabar.com। गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, उदयपुर के ब्लड सेंटर में एक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपलब्धि सामने आई है। यहां नियमित रक्तदान जांच के दौरान बी रक्त समूह के अत्यंत दुर्लभ उपप्रकार “Bm” ब्लड ग्रुप की सफल पहचान की गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह दुर्लभ रक्त प्रकार सामान्य जांच में कई बार पहचान से छूट सकता है, इसलिए इसकी सटीक पहचान मरीजों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। संस्थान में अपनाए जा रहे उच्च स्तरीय परीक्षण मानकों और विशेषज्ञता को दर्शाती है।
जानकारी के अनुसार एक महिला रक्तदाता की रूटीन ब्लड ग्रुप जांच के दौरान परिणाम सामान्य से अलग पाए गए। प्रारंभिक परीक्षण में रक्त समूह स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं हो पाया। इसके बाद रक्ताधान औषधि विभाग की विशेषज्ञ टीम ने रक्त और सलाइवा (लार) के नमूनों की विस्तृत जांच की। उन्नत सेरोलॉजिकल परीक्षण के बाद यह पुष्टि हुई कि यह बी रक्त समूह का दुर्लभ उपप्रकार “Bm” है।
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क्यों खास है “Bm” ब्लड ग्रुप
रक्ताधान औषधि विभाग के प्रभारी डॉ. अजय कुमार ने बताया कि ऐसे मामलों में लाल रक्त कणों (Red Blood Cells) की सतह पर B एंटीजन की मात्रा बेहद कम होती है। इसी कारण प्रारंभिक जांच में यह कई बार “O” ब्लड ग्रुप जैसा दिखाई दे सकता है।
उन्होंने बताया कि यदि बिना विस्तृत परीक्षण के किसी अन्य समूह का रक्त चढ़ा दिया जाए तो मरीज में गंभीर रिएक्शन होने की संभावना रहती है। इसलिए ऐसे मामलों में अत्यंत सावधानी बरतना जरूरी होता है।
रक्त चढ़ाने से पहले जरूरी विशेष परीक्षण
डॉ. अजय कुमार ने आगे बताया कि “Bm” ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को रक्त चढ़ाने से पहले विशेष क्रॉस-मैच कम्पैटिबिलिटी परीक्षण करना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि दिया जाने वाला रक्त मरीज के शरीर के साथ पूरी तरह सुरक्षित और अनुकूल है।
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उन्नत तकनीक से ही संभव होती है पहचान
विशेषज्ञों के अनुसार Weak B जैसे दुर्लभ रक्त प्रकारों की पहचान के लिए उन्नत प्रयोगशाला तकनीक, विशेष सेरोलॉजिकल परीक्षण और अनुभवी टीम की आवश्यकता होती है। सामान्य ब्लड ग्रुप जांच में ऐसे दुर्लभ उपप्रकार कई बार पहचान में नहीं आ पाते। इसलिए आधुनिक जांच तकनीकों का उपयोग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
सुरक्षित रक्ताधान सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता
यह उपलब्धि गीतांजली ब्लड सेंटर में अपनाए जा रहे उच्च गुणवत्ता मानकों, सतर्क जांच प्रक्रिया और सुरक्षित रक्ताधान सेवाओं के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस अवसर पर डॉ. अजय कुमार ने कहा कि दुर्लभ रक्त समूहों की समय पर और सटीक पहचान मरीजों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि संस्थान का प्रयास है कि प्रत्येक रक्तदाता और मरीज को सुरक्षित, विश्वसनीय और सटीक रक्ताधान सेवा उपलब्ध कराई जाए।
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