
अमेरिका-इजराइल के हमलों से पेट्रोल-डीजल 12रुपए तक हो सकता महंगा…
अमेरिका-ईरान टकराव का वैश्विक असर
पेट्रोल-डीजल 10-12 रुपये महंगे, सोना ₹1.90 लाख तक पहुंचने की आशंका
होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक
सोना-चांदी में रिकॉर्ड उछाल, शेयर बाजार में 1.5% तक गिरावट संभव
भारत ने बढ़ाई तेल खरीद, स्ट्रेटेजिक रिजर्व पर भी नजर
जगत सिंह/विजय श्रीवास्तव
नई दिल्ली/ जयपुर,dusrikhabar.com। अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है और अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें, सोना-चांदी और शेयर बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
पेट्रोल-डीजल 10-12 रुपये तक महंगे होने की आशंका
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करता है तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई घट सकती है। ऐसे में ब्रेंट क्रूड, जो फिलहाल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, बढ़कर 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
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भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें करीब 50% सप्लाई होर्मुज मार्ग से होती है। ऐसे हालात में दिल्ली में पेट्रोल ₹95 से बढ़कर करीब ₹105 प्रति लीटर और डीजल ₹88 से बढ़कर ₹96 तक जा सकता है।
भारत में ईंधन के दाम सरकारी तेल कंपनियां तय करती हैं। ये पिछले 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय औसत कीमत और डॉलर-रुपया विनिमय दर के आधार पर बेस प्राइस तय करती हैं। हालांकि अंतिम कीमत में केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स का बड़ा हिस्सा शामिल होता है।
यानी कंपनियां दाम बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन अंतिम फैसला सरकार के रुख पर निर्भर करता है। युद्ध जैसे हालात में सरकार टैक्स घटाकर या कंपनियों को दाम न बढ़ाने की सलाह देकर राहत देने की कोशिश कर सकती है।
सोना ₹1.90 लाख और चांदी ₹3.50 लाख तक?
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के अनुसार तनाव बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। ऐसे में सोना 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से उछलकर 1.90 लाख रुपये तक जा सकता है। चांदी, जो अभी 2.67 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास है, बढ़कर 3.50 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। युद्ध और अनिश्चितता के समय कीमती धातुएं निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प मानी जाती हैं।
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शेयर बाजार में गिरावट के संकेत
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में 1 से 1.5% तक की गिरावट संभव है। इसका मतलब है कि सेंसेक्स में लगभग 1300 अंक और निफ्टी में करीब 300 अंकों की गिरावट देखी जा सकती है। तनाव के समय निवेशक जोखिम भरे एसेट से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों में निवेश करते हैं, जिससे बाजार पर दबाव बनता है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसके दोनों छोर लगभग 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी का है। यहां से गुजरने के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन निर्धारित है।
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दुनिया के कुल पेट्रोलियम सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और ईरान जैसे देश अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं।
हर दिन करीब 1.78 करोड़ से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन यहां से ट्रांसपोर्ट होता है। ईरान स्वयं भी रोजाना करीब 17 लाख बैरल तेल इसी मार्ग से निर्यात करता है। भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10% से ज्यादा हिस्सा भी इसी रास्ते से जाता है, जिसमें बासमती चावल, चाय, मसाले और इंजीनियरिंग उत्पाद शामिल हैं।
होर्मुज बंद करने का दांव ईरान पर भी भारी
ईरानी सेना जवाबी कार्रवाई के कई विकल्पों पर विचार कर रही है, जिनमें अमेरिकी ठिकानों या इजराइल पर हमले शामिल हैं। लेकिन सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना माना जाता है।
हालांकि ऐसा करने से ईरान को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि उसका खुद का तेल निर्यात रुक जाएगा। चीन, जो ईरान का सबसे बड़ा खरीदार है, सप्लाई बाधित होने पर नाराज हो सकता है।
सऊदी का विकल्प: ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन
होर्मुज के विकल्प के रूप में सऊदी अरब के पास 746 मील लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन है, जो रेड सी टर्मिनल तक जाती है। इसके जरिए प्रतिदिन करीब 50 लाख बैरल तेल भेजा जा सकता है। भारत और अन्य एशियाई देश वैकल्पिक सप्लाई रूट और सुरक्षित भंडारों पर नजर बनाए हुए हैं।
भारत की तैयारी: बढ़ा आयात, SPR पर नजर
संभावित संकट को देखते हुए भारत खाड़ी देशों के बाहर के सप्लायर्स से तेल आयात बढ़ा रहा है। जरूरत पड़ने पर भारत अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से भी तेल निकाल सकता है। सरकार का प्रयास है कि आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश में ईंधन संकट न पैदा हो और कीमतों को यथासंभव नियंत्रित रखा जा सके।
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