
RSS प्रमुख मोहन भागवत का युवाओं पर बड़ा भरोसा: बोले- जेन-जी सबसे ईमानदार पीढ़ी, हमसे भी अधिक…
संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले- जेन-जी हमारी पीढ़ी से भी अधिक ईमानदार,
सवाल पूछना और विरोध करना लोकतंत्र की ताकत, विरोध उन्हें एंटीनेशनल कहना गलत
जेन-जी और जेन-अल्फा को सबसे ईमानदार और देशभक्त पीढ़ी बताया
भागवत ने संवाद की कमी को आंदोलनों की बड़ी वजह बताया
शिक्षा को व्यवसाय नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी बताया
सोशल मीडिया पर केवल प्रतिबंध नहीं, जागरूकता और जिम्मेदारी पर दिया जोर
महिलाओं के लिए समान अवसर और नेतृत्व की वकालत
युवाओं से सीखा ‘फिंगर क्लैप’, पीढ़ियों के बीच संवाद का दिया सकारात्मक संदेश
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर/ मुम्बई,dusrikhabar.com। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने देश की युवा पीढ़ी जेन-जी (Gen Z) और जेन-अल्फा (Gen Alpha) पर भरोसा जताते हुए कहा कि आज के युवा पहले की पीढ़ियों से अधिक ईमानदार, जागरूक और देशभक्त हैं। उन्होंने कहा कि यदि युवा किसी मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं, तो उसे देशविरोध नहीं बल्कि सिस्टम में सुधार की इच्छा के रूप में देखा जाना चाहिए। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, सोशल मीडिया, लोकतांत्रिक विरोध, महिलाओं की भागीदारी और भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
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युवा सवाल पूछ रहे हैं, इसका मतलब वे जागरूक हैं: भागवत
मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ पर 11 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 2,000 विद्यार्थियों से संवाद करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि उनकी पीढ़ी में बड़े जो कहते थे, उसे बिना सवाल किए मान लिया जाता था, लेकिन आज की पीढ़ी ऐसा नहीं करती। संघ प्रमुख ने कहा कि आज के युवा हर बात पर तर्क चाहते हैं, जवाब चाहते हैं और चाहते हैं कि उनकी बात भी सुनी जाए। यह बदलाव समाज के लिए सकारात्मक है।
“विरोध करना लोकतंत्र का अधिकार है, युवाओं को एंटी-नेशनल कहना गलत”
हाल के छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध भी संवाद का एक माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई युवा बेहतर शिक्षा व्यवस्था या किसी अन्य मुद्दे पर आंदोलन करता है, तो उसे देशविरोधी (एंटी-नेशनल) नहीं कहा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “अगर जेन-जी आवाज उठा रही है, तो उसकी कोई पीड़ा होगी। हमें उनकी बात सुननी चाहिए। वे हमारे अपने बच्चे हैं, उनसे संवाद होना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते संवाद हो जाए, तो कई आंदोलन टाले जा सकते हैं।
NEET आंदोलन का संदर्भ: “बातचीत होती तो आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ती”
भागवत ने कहा कि कई बार आंदोलन इसलिए होते हैं क्योंकि सरकार और युवाओं के बीच संवाद की कमी रह जाती है। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित पक्ष समय रहते विद्यार्थियों की बात सुन लें, तो विवाद और आंदोलन की नौबत कम आ सकती है। हालांकि उन्होंने किसी विशेष मामले पर टिप्पणी करने के बजाय इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
“शिक्षा व्यापार नहीं, समाज की जिम्मेदारी है”
शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा सभी के लिए सुलभ हो, केवल सरकार ही नहीं, समाज की भी इसमें जिम्मेदारी है, शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण जरूरी है, शिक्षा का आर्थिक बोझ कम किया जाना चाहिए और पहले व्यवस्था मजबूत हो, फिर पाठ्यक्रम पर चर्चा हो। भागवत ने कहा कि अच्छी शिक्षा ही देश का भविष्य तय करती है।
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सोशल मीडिया पर रोक नहीं, सही सोच जरूरी
सोशल मीडिया के प्रभाव पर भागवत ने कहा कि केवल प्रतिबंध लगाना समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट बनाने वालों की बड़ी जिम्मेदारी है। यदि लाखों लोग किसी को फॉलो करते हैं, तो उन्हें भी यह समझना चाहिए कि गलत या भ्रामक जानकारी समाज को नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से उसकी पुष्टि जरूर करें।
महिलाओं की बराबरी और संवाद से समाधान पर भी दिया जोर
कार्यक्रम में पूछे गए सवालों के जवाब में भागवत ने कहा कि महिलाओं को समाज में समान अवसर और नेतृत्व की भूमिका मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मतभेद का स्थायी समाधान संवाद से ही निकल सकता है। चाहे वह समाज के भीतर हो या देशों के बीच।
जेन-जी से सीखा ‘फिंगर क्लैप‘
कार्यक्रम के अंत में एक हल्का-फुल्का दृश्य भी देखने को मिला। मोहन भागवत ने युवाओं की शैली में ‘फिंगर क्लैप‘ (उंगलियों से ताली बजाना) किया और मुस्कुराते हुए कहा कि “यह आज मैंने जेन-जी से सीखा है।” यह शैली आज सोशल मीडिया के जरिए दुनिया भर के युवाओं में लोकप्रिय हो चुकी है और इसे शांत तरीके से सराहना व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है।
पीढ़ियों के बीच संवाद ही सबसे बड़ा समाधान
मोहन भागवत के संबोधन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि नई पीढ़ी को केवल निर्देश देने के बजाय उसकी बात सुनना भी उतना ही जरूरी है। आज के युवा सवाल पूछते हैं, अपनी राय रखते हैं और बदलाव चाहते हैं। ऐसे में उन्हें संदेह की नजर से देखने के बजाय विश्वास, संवाद और सहयोग के साथ आगे बढ़ना समय की जरूरत है। यदि परिवार, समाज, शिक्षा व्यवस्था और सरकार युवाओं के साथ खुलकर संवाद करें, तो कई विवाद और असंतोष पैदा होने से पहले ही समाप्त हो सकते हैं।
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