
राजस्थान में डिजिटल डेटा की सुरक्षा पर सरकार का फोकस, वरिष्ठ IAS अफसरों के लिए कार्यशाला…
HCM रीपा में वरिष्ठ IAS अफसरों के लिए DPDP एक्ट-2023 पर कार्यशाला आयोजित
मुख्य सचिव ने डिजिटल गवर्नेंस में साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता को बताया महत्वपूर्ण
सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग ने किया कार्यशाला का आयोजन
भारत सरकार के MeitY का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग रहा नॉलेज पार्टनर
कार्यशाला में प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से व्यावहारिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श हुआ।
विजय श्रीवास्तव
जयपुर,dusrikhabar.com। सरकारी सेवाओं का तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विस्तार हो रहा है। ऐसे में नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, गोपनीयता और उसके जिम्मेदार इस्तेमाल की चुनौती भी बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए जयपुर के हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान लोक प्रशासन संस्थान (एचसीएम रीपा) में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के लिए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम-2023 (DPDP Act) पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने स्पष्ट किया कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता केवल ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराने से नहीं, बल्कि नागरिकों के डेटा को सुरक्षित रखने और सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आमजन का भरोसा कायम करने से भी जुड़ी है।
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डिजिटल सेवाओं के साथ नागरिकों के डेटा की सुरक्षा भी जरूरी
कार्यशाला का आयोजन सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DOIT&C) की ओर से किया गया। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) ने इसमें नॉलेज पार्टनर के रूप में सहभागिता की।
कार्यशाला में प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के संबोधन से हुई। इस दौरान एचसीएम रीपा की महानिदेशक श्रेया गुहा और सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के सचिव डॉ. रवि कुमार सुरपुर भी मौजूद रहे।
मुख्य सचिव ने कहा कि 21वीं सदी में सुशासन के लिए सरकारी सेवाओं का डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होना आवश्यक है। लेकिन इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि इन सेवाओं के माध्यम से एकत्रित होने वाला नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित और गोपनीय रहे।
उन्होंने कहा कि सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आमजन का विश्वास तभी मजबूत होगा, जब लोगों को यह भरोसा हो कि उनकी निजी जानकारी का इस्तेमाल जिम्मेदारी और निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप किया जा रहा है।
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साइबर हमलों से सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रखने पर जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि सरकारी विभागों के डिजिटल प्लेटफॉर्म, सेवाओं और डेटा सेंटर को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए केवल तकनीकी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों के स्तर पर भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता और सतर्कता जरूरी है।
उन्होंने नागरिकों के व्यापक व्यक्तिगत डेटा के उपयोग को लेकर कहा कि मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुरूप सरकारी डिजिटल माध्यमों से प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों, विशेषकर लक्षित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए ही किया जाना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने डेटा गोपनीयता और साइबर स्वच्छता (Cyber Hygiene) से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान आकर्षित किया। इनमें आवश्यकता के अनुसार डेटा का सीमित अवधि तक संरक्षण, अनुपयोगी डेटा को निर्धारित प्रक्रिया के तहत हटाना, नियमित रूप से पासवर्ड बदलना और डेटा सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन शामिल है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता का उल्लंघन होता है तो उसके लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
DPDP एक्ट के कानूनी प्रावधानों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर चर्चा
कार्यशाला का संचालन कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (CMA) नीतीश कालरा ने किया। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम-2023 के उद्देश्यों, प्रावधानों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में इसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
अधिकारियों को बताया गया कि सरकारी सेवाओं में नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल करते समय पारदर्शिता, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के सिद्धांतों का ध्यान रखना आवश्यक है।
चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि डिजिटल डेटा का उचित प्रबंधन प्रशासनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के साथ नागरिकों के हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
DPDP एक्ट के प्रावधान सरकारी विभागों के लिए डेटा के संग्रह, उपयोग और संरक्षण से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझने का आधार प्रदान करते हैं। इसलिए अधिकारियों को इन कानूनी व्यवस्थाओं की जानकारी होना और उन्हें विभागीय कार्यप्रणाली में लागू करने की तैयारी करना जरूरी है।
सवाल-जवाब के जरिए अधिकारियों ने समझीं व्यावहारिक चुनौतियां
कार्यशाला के अंतिम चरण में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों, विभागीय स्तर पर उनकी अनुपालना और व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े सवाल उठाए। इस दौरान डिजिटल सेवाओं के संचालन में आने वाली चुनौतियों और नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले उपायों पर चर्चा हुई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों को बदलते डिजिटल परिवेश में डेटा संरक्षण की कानूनी और तकनीकी जिम्मेदारियों से परिचित कराना रहा, ताकि डिजिटल सुशासन के साथ नागरिकों की निजता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
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