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जयपुर में नकली घी के कारोबार का बड़ा खुलासा, बाजार में बिक रहा था सरस, महान, कृष्णा और लोटस का नकली घी, 3 गिरफ्तार

जयपुर में नकली घी के कारोबार का बड़ा खुलासा, बाजार में बिक रहा था सरस, महान, कृष्णा और लोटस का नकली घी, 3 गिरफ्तार

सरस, लोट्स, महान और कृष्णा के नाम पर तैयार हो रही थी फर्जी पैकिंग

जयपुर में झोटवाड़ा स्थित गोदाम से 61,600 कार्टन-पाउच और पैकिंग मशीनें बरामद

बारकोड स्कैनर, प्रिंटिंग-पैकिंग मशीनें और सप्लाई वाहन भी जब्त

सरस डेयरी अधिकारियों ने मौके पर बरामद सामग्री की जांच की

फर्जी हॉलमार्क और पैकिंग मिलने के बाद कॉपीराइट व ट्रेडमार्क एक्ट में कार्रवाई

आरोपी कथित तौर पर कोडवर्ड में ऑर्डर लेते और अलग-अलग वाहनों से सप्लाई करते

नवीन सक्सेना

जयपुर, dusrikhabar.com। खाने-पीने की चीजों में मिलावट के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच जयपुर पुलिस ने नकली घी के कारोबार से जुड़े एक नेटवर्क का खुलासा किया है। CST और झोटवाड़ा थाना पुलिस ने झोटवाड़ा के फैक्ट्री एरिया स्थित एक गोदाम पर कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यहां नामी डेयरी ब्रांडों के नाम और पहचान वाली फर्जी पैकिंग तैयार की जा रही थी, जिसका इस्तेमाल नकली घी की पैकिंग में किया जाना था।

पुलिस ने गोदाम से 61,600 खाली मोनो कार्टन, पाउच पैक, बारकोड स्कैनर, प्रिंटिंग व पैकिंग मशीनें और सप्लाई में इस्तेमाल वाहन बरामद किए हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी तैयार पैकिंग को जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में नकली घी का कारोबार करने वालों तक पहुंचाते थे।

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एक महीने की निगरानी के बाद गोदाम पर कार्रवाई

डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण के अनुसार, झोटवाड़ा थाना पुलिस और CST टीम करीब एक महीने से आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। तकनीकी इनपुट और लगातार निगरानी के बाद पुलिस को गोदाम में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने फैक्ट्री एरिया स्थित गोदाम पर दबिश दी। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में ब्रांडेड घी की फर्जी पैकिंग से जुड़ी सामग्री मिली। पुलिस ने मामले में अनिल अग्रवाल (35), मोहनलाल शर्मा (42) और याकूब (40) को गिरफ्तार किया है।

सरस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पैकिंग की जांच की

गोदाम से बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री मिलने के बाद पुलिस ने सरस डेयरी के अधिकारियों को मौके पर बुलाया। अधिकारियों ने बरामद रैपर, मोनो कार्टन और हॉलमार्क की जांच की। पुलिस के अनुसार, जांच में इन पर इस्तेमाल की गई पैकिंग और हॉलमार्क को फर्जी पाया गया। इसके बाद सरस डेयरी के राजाराम कार्यालय की ओर से पुलिस को रिपोर्ट दी गई।

रिपोर्ट के आधार पर झोटवाड़ा थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने कॉपीराइट एक्ट और ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की है। मामले की जांच ACP झोटवाड़ा शिव कुमार भारद्वाज कर रहे हैं।

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मशीनों से तैयार होती थी ब्रांडेड कंपनियों जैसी पैकिंग

पुलिस जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी अनिल अग्रवाल टोंक निवासी अमन जैन से रैपर और खाली मोनो कार्टन खरीदता था। इसके बाद झोटवाड़ा स्थित गोदाम में मशीनों के जरिए इन पर अलग-अलग ब्रांडों के नाम, तारीख और हॉलमार्क जैसी पहचान अंकित की जाती थी।

पुलिस के मुताबिक, इस प्रक्रिया के जरिए सरस, लोट्स, महान और कृष्णा घी के नाम वाली फर्जी पैकिंग तैयार की जाती थी। तैयार पैकिंग को बाद में जयपुर और आसपास के इलाकों में छोटे व्यापारियों तथा नकली घी के कारोबार से जुड़े लोगों तक पहुंचाया जाता था।

नकली घी बनाने के बजाय पैकिंग तैयार कर रहा था नेटवर्क

जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी खुद सीधे नकली घी तैयार करने के बजाय उसकी पैकिंग के लिए ब्रांडेड कंपनियों जैसी फर्जी सामग्री उपलब्ध करा रहे थे। पुलिस के अनुसार, तैयार पैकिंग की सप्लाई प्रमोद अग्रवाल, श्यामसुंदर राठौड़ और अन्य नकली घी कारोबारियों को की जाती थी। इससे यह आशंका सामने आई कि यह नेटवर्क नकली घी के कारोबार में इस्तेमाल होने वाली पैकिंग की सप्लाई की कड़ी के रूप में काम कर रहा था।

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पुलिस से बचने के लिए कोडवर्ड और बदलते वाहन

पुलिस जांच में आरोपियों के काम करने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, पैकिंग सामग्री की मांग सीधे सामान्य भाषा में लेने के बजाय कोडवर्ड में ऑर्डर लिए जाते थे। सप्लाई के दौरान आरोपी अलग-अलग रास्तों और वाहनों का इस्तेमाल करते थे, ताकि उनकी गतिविधियों पर आसानी से नजर न रखी जा सके। मांग के अनुसार फर्जी पैकिंग तैयार कर उसे संबंधित लोगों तक पहुंचाया जाता था।

पैकिंग की आड़ में उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता था नकली घी

इस मामले का मानवीय पहलू यह है कि ब्रांडेड पैकिंग देखकर आम उपभोक्ता किसी खाद्य उत्पाद को असली मान सकता है। ऐसे में फर्जी रैपर और कार्टन तैयार करने वाला नेटवर्क केवल ब्रांड की पहचान को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि खाद्य उत्पाद की वास्तविकता को लेकर भी उपभोक्ताओं के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी पैकिंग की सप्लाई कहां-कहां तक होती थी, नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं और इससे जुड़े अन्य ठिकाने कौन से हैं।

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