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90 साल की उम्र में मिली नई जिंदगी: स्ट्रेचर पर आईं बुजुर्ग महिला, जटिल दूरबीन सर्जरी के बाद चलकर लौटीं घर

90 साल की उम्र में मिली नई जिंदगी: स्ट्रेचर पर आईं बुजुर्ग महिला, जटिल दूरबीन सर्जरी के बाद चलकर लौटीं घर

90 वर्षीय महिला की जटिल दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) सर्जरी सफल

पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स के कारण किडनी गंभीर रूप से थी प्रभावित

डॉ. इंदिरा सरीन और उनकी टीम ने जोखिमपूर्ण सर्जरी सफलतापूर्वक की

महिलाओं को पेल्विक फ्लोर संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह

नारायणा हॉस्पिटल में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों के समन्वय से मिला नया जीवन

नवीन सक्सेना,

जयपुर, दूसरी खबर। उम्र के अंतिम पड़ाव पर भी उम्मीद की एक किरण जिंदगी बदल सकती है। नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर में 90 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला ने यही अनुभव किया। लंबे समय से पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स (बच्चेदानी और अन्य पेल्विक अंगों के बाहर आने) की गंभीर समस्या से जूझ रही महिला की हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि उनकी किडनी भी प्रभावित हो गई थी।

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स्ट्रेचर पर अस्पताल पहुंचीं इस बुजुर्ग महिला की जटिल दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) सर्जरी सफल रही और कुछ ही दिनों बाद वह अपने पैरों पर चलकर स्वस्थ अवस्था में घर लौट गईं। यह केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि समय पर सही इलाज और आधुनिक चिकित्सा की ताकत की प्रेरणादायक मिसाल है।

संकोच और लापरवाही ने बढ़ाई बीमारी, किडनी तक पहुंचा असर

90 वर्षीय महिला कई वर्षों से पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स की समस्या से पीड़ित थीं। उम्र और सामाजिक संकोच के कारण उन्होंने समय रहते उपचार नहीं कराया। धीरे-धीरे स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि बच्चेदानी, ब्लैडर और अन्य पेल्विक अंग अपनी सामान्य स्थिति से बाहर आ गए, जिससे मूत्र मार्ग अवरुद्ध होने लगा और इसका सीधा असर किडनी पर पड़ा।

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महिला का सीरम क्रिएटिनिन 4.5 mg/dL तक पहुंच गया था। उन्हें Acute-on-Chronic Kidney Disease और यूरोसेप्सिस जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा। पहले एक अन्य अस्पताल में डायलिसिस और डबल जे (DJ) स्टेंट लगाया गया, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। संक्रमण लगातार बढ़ता गया और अंततः उन्हें आईसीयू से स्ट्रेचर पर नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर लाया गया।

सही वजह पहचानकर डॉक्टरों ने किया चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन

डॅा इंदिरा सरीन नारायणा हॉस्पिटल की कंसल्टेंट यूरोगायनोकोलॉजिस्ट डॉ. इंदिरा सरीन ने विस्तृत जांच के दौरान बीमारी की मूल वजह का पता लगाया।

जांच में सामने आया कि गंभीर प्रोलैप्स के कारण यूरेटर पर दबाव पड़ रहा था, जिससे ऑब्स्ट्रक्टिव यूरोपैथी विकसित हो गई थी। मरीज की उम्र, खराब किडनी फंक्शन, गंभीर संक्रमण और थायरॉयड जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण यह ऑपरेशन बेहद जोखिमपूर्ण था।

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इसके बावजूद डॉ. इंदिरा सरीन और उनकी टीम ने लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन) सर्जरी के माध्यम से जाली (Mesh) लगाकर निकले हुए अंगों को उनकी सामान्य स्थिति में सफलतापूर्वक स्थापित किया।

सर्जरी के अगले दिन ही दिखा चमत्कारी सुधार

सर्जरी के बाद मरीज की हालत तेजी से सुधरने लगी।

  • क्रिएटिनिन 4.5 से घटकर अगले ही दिन 2 mg/dL हो गया।
  • डीजे स्टेंट निकाल दिया गया।
  • यूरोसेप्सिस पर नियंत्रण हो गया।
  • किडनी की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

कुछ दिनों के उपचार के बाद महिला स्वस्थ होकर अपने पैरों पर चलकर घर लौटीं और अब सामान्य जीवन जी रही हैं।

महिलाओं के लिए बड़ा संदेश: इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें

डॉ. इंदिरा सरीन ने कहा कि कई महिलाएं बच्चेदानी के खिसकने (प्रोलैप्स), बार-बार पेशाब आने, पेशाब रुकने, पेशाब पर नियंत्रण न रहने या पेल्विक फ्लोर की अन्य समस्याओं को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देती हैं।

उन्होंने कहा कि समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या किडनी को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है और कई मामलों में डायलिसिस तक की नौबत आ सकती है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि ऐसे किसी भी लक्षण को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत यूरोगायनोकोलॉजिस्ट से परामर्श लें।

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विशेषज्ञों का समन्वित इलाज बना सफलता की कुंजी

नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के डायरेक्टर बलविंदर सिंह वालिया ने कहा कि जटिल मामलों में बीमारी की सही पहचान और विभिन्न विशेषज्ञों के समन्वित उपचार से ही बेहतर परिणाम संभव होते हैं। वहीं क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. प्रदीप कुमार गोयल ने कहा कि हर किडनी की समस्या केवल किडनी की बीमारी नहीं होती। कई बार इसके पीछे कोई दूसरी गंभीर बीमारी होती है, इसलिए सही समय पर विशेषज्ञ से जांच कराना बेहद आवश्यक है।

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