
सांवलिया सेठ के दरबार में आस्था का नया इतिहास: एक साल में 337 करोड़ का चढ़ावा, भक्तों की श्रद्धा ने बनाया रिकॉर्ड
सांवलिया सेठ के दरबार में आस्था का रिकॉर्ड, एक साल में 337 करोड़ का चढ़ावा
मन्नत पूरी होने पर लाखों का दान, ‘सेठजी’ को व्यापार का भागीदार मानते हैं भक्त
भक्ति के साथ विकास भी: 16 गांवों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर करोड़ों का निवेश
संदीप बहल,
चित्तौड़गढ़, dusrikhabar.com। मेवाड़ की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले श्री सांवलियाजी मंदिर में श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मंदिर में करीब 337 करोड़ रुपए का चढ़ावा प्राप्त हुआ, जो पिछले 34 वर्षों में सबसे अधिक है। यह आंकड़ा केवल दान की राशि नहीं, बल्कि लाखों भक्तों के विश्वास, आस्था और सांवलिया सेठ के प्रति समर्पण की जीवंत कहानी भी बयां करता है।
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भक्तों की श्रद्धा ने रचा नया इतिहास, 337 करोड़ तक पहुंचा चढ़ावा
मंडफिया स्थित श्री सांवलियाजी मंदिर में इस वर्ष श्रद्धालुओं ने रिकॉर्ड स्तर पर दान अर्पित किया। मंदिर प्रशासन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में मंदिर को लगभग 337 करोड़ रुपए का चढ़ावा मिला। खास बात यह है कि पिछले चार दशकों में ऐसा कोई वर्ष नहीं रहा जब मंदिर के चढ़ावे में गिरावट दर्ज की गई हो। लगातार बढ़ती श्रद्धा और भक्तों की संख्या मंदिर को देश के प्रमुख धार्मिक दान केंद्रों में शामिल कर रही है।
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‘सेठजी’ के रूप में पूजे जाते हैं सांवलिया सेठ, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं लाखों
सांवलिया सेठ के प्रति भक्तों की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई व्यापारी उन्हें अपने कारोबार का भागीदार मानते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार ठाकुरजी यहां “सेठजी” के रूप में विराजमान हैं।
कई श्रद्धालु अपनी मन्नत की राशि स्टाम्प पेपर पर लिखकर लाते हैं और मनोकामना पूरी होने पर लाखों रुपए कंपनी के लेटरहेड के साथ मंदिर में अर्पित करते हैं। यह अनूठी परंपरा मंदिर की विशेष पहचान बन चुकी है और भक्तों के विश्वास की गहराई को दर्शाती है।
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मंदिर ट्रस्ट बना विकास का भी आधार, 16 गांवों को मिल रहा लाभ
श्री सांवलियाजी मंदिर ट्रस्ट केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मंदिर ट्रस्ट आसपास के 16 गांवों में हाईमास्ट लाइट, सामुदायिक भवन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास कर रहा है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में आधुनिक टॉयलेट कॉम्प्लेक्स, स्नानघर, बेहतर पार्किंग व्यवस्था और 180 कमरों की विशाल धर्मशाला का निर्माण भी किया जा रहा है, जो जल्द ही पूर्ण होने की संभावना है।
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मंदिर के खजाने की गिनती भी है खास
हर माह चतुर्दशी के अवसर पर मंदिर के दान पात्र खोले जाते हैं। राजभोग आरती के बाद शुरू होने वाली इस प्रक्रिया में करीब 200 कर्मचारी और बैंककर्मी शामिल होते हैं। नोटों और सिक्कों को अलग करने के बाद पांच मशीनों की सहायता से गिनती की जाती है, जबकि गहनों का मूल्यांकन वजन के आधार पर किया जाता है। पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में 5 से 10 दिन का समय लगता है।
1991-92 में जहां पहली बार भंडार खुलने पर केवल 65 लाख रुपए का चढ़ावा मिला था, वहीं आज यह आंकड़ा बढ़कर 337 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। दीपावली के दौरान अकेले 51 करोड़ रुपए से अधिक और एक माह में 41.67 करोड़ रुपए का दान प्राप्त होना मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता और श्रद्धालुओं के विश्वास को दर्शाता है।
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