
राजस्थान में आज बजेगा पंचायत चुनाव का बिगुल: 4 चरणों में मतदान की तैयारी, आज से ही आचार संहिता हो सकती लागू…
3 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे राज्य निर्वाचन आयोग करेगा चुनाव कार्यक्रम का ऐलान
1.69 लाख से ज्यादा जनप्रतिनिधियों के चुनाव से गांवों में शुरू होगा लोकतंत्र का नया दौर
4चरणों में मतदान की संभावना, घोषणा के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता लागू
41 जिला परिषद और 457 पंचायत समितियों के लिए चुनाव
14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच चुने जाएंगे, महिलाओं के लिए 50% आरक्षण
करीब 7,200 महिला सरपंच और 65 हजार महिला वार्ड में चुने जाने हैं पंच
20 जिलों में महिला जिला प्रमुख और 221 पंचायत समितियों में महिला प्रधान होंगी
विजय श्रीवास्तव/नवीन सक्सेना
जयपुर, dusrikhabar.com। राजस्थान के गांवों में लंबे इंतजार के बाद अब चुनावी हलचल तेज होने जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग 3 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे पंचायतीराज चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा करेगा। आयोग की घोषणा के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। चुनाव चार चरणों में कराए जाने की संभावना है। चुनाव कार्यक्रम सामने आते ही गांवों में सरपंच से लेकर जिला परिषद सदस्य तक चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की गतिविधियां तेज हो जाएंगी।
सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव ईवीएम से कराए जाने हैं। पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण लागू रहेगा।
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आचार संहिता के साथ प्रशासनिक गतिविधियों पर भी असर
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही ग्रामीण राजस्थान में आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी। इसके करीब दो महीने तक लागू रहने की संभावना है।
इस अवधि में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों सहित कई प्रशासनिक फैसलों पर पाबंदी रहेगी। विकास कार्यों और सरकारी घोषणाओं पर भी चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का असर रहेगा।
1.69 लाख से ज्यादा जनप्रतिनिधियों के चुनाव पर टिकी नजर
इस बार पंचायतीराज चुनावों का दायरा काफी बड़ा है। प्रदेश में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियां और 14,403 ग्राम पंचायतों के लिए चुनाव होने हैं।
चुनाव प्रक्रिया में करीब 1.69 लाख जनप्रतिनिधियों के चुने जाने की तस्वीर सामने आ रही है।
- 1,403 जिला परिषद सदस्य
- 8,245 पंचायत समिति सदस्य
- 14,403 सरपंच
- करीब 1.30 लाख वार्ड पंच
- इनके जरिए 41 जिला प्रमुख और 457 प्रधान चुने जाएंगे।
यानी यह चुनाव केवल गांव की सरकार चुनने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि राजस्थान के ग्रामीण प्रशासन और स्थानीय नेतृत्व की अगली तस्वीर भी तय करेगा।
महिलाओं की भागीदारी रहेगी चुनाव की बड़ी तस्वीर
पंचायतीराज चुनावों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण के चलते ग्रामीण सत्ता के विभिन्न स्तरों पर बड़ी संख्या में महिलाएं प्रतिनिधित्व करेंगी। उपलब्ध आरक्षण व्यवस्था के अनुसार 41 जिला प्रमुखों में 20 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। बीकानेर संभाग के सभी जिलों में जिला प्रमुख का पद महिला के लिए आरक्षित है।
इसी तरह 457 पंचायत समितियों में 221 प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जयपुर और जोधपुर में 11-11 पंचायत समितियों में महिला प्रधान होंगी। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूंबर और प्रतापगढ़ में प्रधान पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
करीब 7,200 महिलाएं बनेंगी सरपंच
ग्राम पंचायत स्तर पर भी महिलाओं की भागीदारी बड़ी होगी। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में करीब 7,200 महिला सरपंच चुनी जाएंगी। वहीं 1,30,584 वार्ड पंच पदों में करीब 65 हजार पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
सरपंच पदों के आरक्षण में:
- 3,058 पद एसटी वर्ग के लिए
- 2,493 पद एससी वर्ग के लिए
- 1,961 पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
वार्ड पंचों के करीब 1.30 लाख पदों में 21,962 एससी, 19,117 एसटी और करीब 15 हजार ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में सरपंच के सभी 1,253 पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
गांव की चौपाल से जिला परिषद तक दिखेगा चुनावी असर
पंचायतीराज चुनाव ग्रामीण राजस्थान के लिए सिर्फ प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं है। सरपंच से लेकर जिला परिषद सदस्य तक चुने जाने वाले प्रतिनिधि सीधे गांवों के विकास, स्थानीय जरूरतों और प्रशासनिक भागीदारी से जुड़े होते हैं।
इसी वजह से चुनाव के दौरान गांव-गांव में स्थानीय मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ जैसे मुद्दे ग्रामीण मतदाताओं के सामने रहेंगे।
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प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव में बनेगा अलग राजनीतिक समीकरण
जिला परिषद सदस्य मिलकर जिला प्रमुख और पंचायत समिति सदस्य मिलकर प्रधान का चुनाव करते हैं। इसलिए सीधे चुनाव के बाद भी स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां जारी रहती हैं।
पंचायतीराज चुनावों में दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होने की वजह से प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव के समय राजनीतिक जोड़-तोड़ और समीकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में प्रत्यक्ष चुनाव के परिणाम के बाद अप्रत्यक्ष चुनावों का दौर भी ग्रामीण राजनीति को प्रभावित करेगा।
बीजेपी-कांग्रेस के लिए गांवों में जनाधार की परीक्षा
पंचायत चुनावों के नतीजे प्रदेश की ग्रामीण राजनीति की तस्वीर समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। किस दल के कितने जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य जीतते हैं, इससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक ताकत का आकलन किया जाएगा।
सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अपने संगठन और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने की चुनौती रहेगी, जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के लिए भी गांवों में अपने प्रभाव को बनाए रखने और बढ़ाने की परीक्षा होगी।
हालांकि प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव में बाद के राजनीतिक समीकरण अलग तस्वीर पेश कर सकते हैं, इसलिए पंचायत चुनाव के वास्तविक जनसमर्थन को समझने में वार्ड और सदस्य पदों के सीधे चुनाव के परिणाम अहम रहेंगे।
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