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गलता तीर्थ में वैदिक परंपरा का निर्वहन, ब्राह्मणों ने विधि-विधान से किया श्रावणी उपाकर्म

गलता तीर्थ में वैदिक परंपरा का निर्वहन, ब्राह्मणों ने विधि-विधान से किया श्रावणी उपाकर्म

ऋषियों के प्रति कृतज्ञता और नए संकल्प का पर्व बना श्रावणी उपाकर्म

गलता तीर्थ में सावन पूर्णिमा पर श्रावणी उपाकर्म संपन्न

पंडित दिवाकर शास्त्री के सान्निध्य में वैदिक ब्राह्मणों ने किया अनुष्ठान

दशविधि स्नान, ऋषि तर्पण और नूतन यज्ञोपवीत धारण किया 

श्रावणी उपाकर्म है नए संकल्प, आत्मशुद्धि और ऋषियों के प्रति कृतज्ञता का पर्व 

महावीर,

जयपुर, dsurikhabar.com। सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर गलता तीर्थ में वैदिक परंपराओं और आध्यात्मिक संस्कारों का सुंदर संगम देखने को मिला। गालव ऋषि की तपोस्थली माने जाने वाले इस पवित्र स्थल पर ज्ञानमूर्ति पंडित दिवाकर शास्त्री के सान्निध्य में वैदिक ब्राह्मणों ने विधिवत श्रावणी उपाकर्म संपन्न किया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रायश्चित कर्म, संकल्प, स्नान, ऋषि तर्पण और नूतन यज्ञोपवीत धारण सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए गए।

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प्रायश्चित से लेकर यज्ञोपवीत धारण तक हुए संस्कार

श्रावणी उपाकर्म के दौरान वैदिक परंपरा के अनुसार प्रायश्चित कर्म और हेमाद्रि संकल्प किया गया। इसके बाद दशविधि स्नान, ऋषि तर्पण तथा नए यज्ञोपवीत को धारण करने की प्रक्रिया पूरी की गई।

इन अनुष्ठानों का उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति को आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने से भी जुड़ा माना जाता है।

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नया यज्ञोपवीत तीन ऋणों की याद दिलाता है

पंडित दिवाकर शास्त्री ने श्रावणी उपाकर्म के महत्व को समझाते हुए कहा कि श्रावण पूर्णिमा का यह पर्व जीवन में नए संकल्प लेने और ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। यह पर्व वेदारंभ और आत्मिक अनुशासन की भावना से भी जुड़ा हुआ है।

उन्होंने बताया कि इस दिन धारण किया जाने वाला नूतन यज्ञोपवीत व्यक्ति को देव ऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण की निरंतर याद दिलाता है। भारतीय वैदिक परंपरा में इन तीनों ऋणों को जीवन के महत्वपूर्ण दायित्वों के रूप में देखा गया है।

देव ऋण प्रकृति और ईश्वरीय व्यवस्था के प्रति कृतज्ञता, पितृ ऋण पूर्वजों और परिवार के प्रति जिम्मेदारी तथा ऋषि ऋण ज्ञान और संस्कृति की परंपरा को आगे बढ़ाने की भावना का प्रतीक माना जाता है।

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गलता तीर्थ में दिखी वैदिक संस्कृति की झलक

श्रावणी उपाकर्म के दौरान गलता तीर्थ का वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। आयोजन ने नई पीढ़ी तक भारतीय संस्कारों और वैदिक परंपराओं को पहुंचाने के महत्व को भी रेखांकित किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय कथावाचक सतीश शास्त्री, राकेश शास्त्री, ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप शर्मा, पौराणिक वेदपाठी भूपेंद्र शुक्ला, मुकेश तिवारी, विकास, कमलेश, विष्णु और सुनील भारद्वाज सहित अन्य श्रद्धालु एवं वैदिक परंपरा से जुड़े लोग मौजूद रहे।

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