
‘Behind the Mask’ में दिखा डॉक्टरों का मानवीय चेहरा, सुकून के पलों से लौटी नई ऊर्जा और बढ़ी आपसी बॉन्डिंग
मरीजों की सेवा में दिन-रात जुटे डॉक्टरों को मिले सुकून के कुछ अनमोल पल
‘Behind the Mask’ ने याद दिलाया— डॉक्टर भी इंसान हैं
वरिष्ठ चिकित्सकों से लेकर रेजिडेंट्स तक एक मंच पर आए
गीत, संगीत और नाटक के जरिए उभरा चिकित्सा सेवा का मानवीय चेहरा
500 से अधिक प्रतिभागियों की मौजूदगी में सकारात्मक माहौल
माही राठौड़,
उदयपुर, dusriKhabar.com। सफेद कोट पहनने वाले डॉक्टर अक्सर मरीजों के दर्द को अपना कर्तव्य समझकर मुस्कुराते हुए इलाज करते हैं, लेकिन उनके अपने तनाव, मानसिक थकान और भावनात्मक दबाव अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। लंबे ड्यूटी आवर्स, लगातार आपातकालीन सेवाएं और जीवन बचाने की जिम्मेदारी के बीच उन्हें भी कुछ ऐसे पलों की जरूरत होती है, जहां वे सिर्फ ‘डॉक्टर’ नहीं, बल्कि एक इंसान बनकर मुस्कुरा सकें। इसी सोच के साथ गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, उदयपुर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम “Behind the Mask: Who Heals the Healers?” ने डॉक्टरों को कुछ सुकून के पल दिए, जिससे उनके भीतर नई ऊर्जा का संचार हुआ और आपसी जुड़ाव पहले से अधिक मजबूत हुआ।

सफेद कोट के पीछे छिपे इंसान को मिला सम्मान, डॉक्टरों के लिए डॉक्टरों ने सजाया मंच
गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के नर्मदा देवी ऑडिटोरियम में आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्देश्य डॉक्टरों को उनकी व्यस्त दिनचर्या से कुछ पल निकालकर मानसिक और भावनात्मक राहत देना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर वाइस चांसलर राकेश व्यास, डीन डॉ. संगीता गुप्ता, रजिस्ट्रार डॉ. अरविंद यादव, अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. मंजिंदर कौर तथा मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. हरप्रीत सिंह सहित संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे।
जब मंच पर साथ आए वरिष्ठ डॉक्टर, युवा फैकल्टी और रेजिडेंट्स, तब दिखी परिवार जैसी एकजुटता
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि इसमें वरिष्ठ फैकल्टी, जूनियर फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टर एक ही मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते नजर आए। यह सिर्फ मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने का अवसर था जो दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे रहते हैं।
गीत, संगीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से डॉक्टरों ने अपने पेशे के मानवीय पक्ष को जीवंत किया। प्रस्तुतियों में यह संदेश उभरकर सामने आया कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, धैर्य, समर्पण और मानवता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

‘Who Heals the Healers?’ ने दिया बड़ा संदेश— डॉक्टरों का मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी
इस वर्ष की थीम “Behind the Mask: Who Heals the Healers?” ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि जो डॉक्टर प्रतिदिन हजारों मरीजों की शारीरिक और मानसिक पीड़ा दूर करते हैं, उनकी थकान, तनाव और भावनात्मक स्वास्थ्य का ख्याल कौन रखता है?
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि डॉक्टरों को भी समय-समय पर मानसिक विश्राम, भावनात्मक सहयोग और सकारात्मक माहौल मिलना चाहिए, ताकि वे नई ऊर्जा के साथ समाज की सेवा जारी रख सकें। प्रमुख बात: एक स्वस्थ और खुशहाल डॉक्टर ही मरीजों को बेहतर इलाज, संवेदनशील देखभाल और भरोसा दे सकता है।
500 से अधिक लोगों की सहभागिता, मुस्कान और सकारात्मक ऊर्जा के साथ हुआ यादगार आयोजन
इस आयोजन में 500 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिनमें लगभग 300 मेडिकल विद्यार्थी और 200 से अधिक वरिष्ठ, जूनियर एवं कंसल्टेंट डॉक्टर शामिल रहे।
पूरे कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं, अनुभव साझा किए और कुछ ऐसे पल जिए, जो उनकी व्यस्त दिनचर्या में शायद ही कभी मिल पाते हैं। कार्यक्रम ने डॉक्टरों के बीच आपसी सम्मान, सहयोग, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा को नई मजबूती प्रदान की।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि कुछ घंटों की यह सांस्कृतिक संध्या डॉक्टरों के लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानसिक सुकून, नई प्रेरणा और मानवीय संवेदनाओं को संजोने का अवसर बन गई।
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