
EUS तकनीक से कैंसर, टीबी और अन्य जटिल रोगों का सटीक निदान संभव…
गीतांजलि मेडिकल कॉलेज की बड़ी उपलब्धि
उदयपुर में ही अब मरीजों को विश्वस्तरीय गैस्ट्रोएंटरोलॉजी उपचार मिलेगा
गीतांजलि में एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS) की 150 सफल प्रक्रियाएं
संदीप बहल,
उदयपुर,dusrikhbar.com।गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल ने गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS) की 150 सफल प्रक्रियाएं पूरी कर आधुनिक चिकित्सा सेवाओं में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस उपलब्धि के अवसर पर अस्पताल प्रबंधन ने चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी टीम का सम्मान किया तथा भविष्य में और भी अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक सुविधाएं शुरू करने की घोषणा की।
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150 सफल EUS प्रक्रियाओं के साथ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने बनाया नया रिकॉर्ड
गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS) की 150 सफल प्रक्रियाएं पूरी कर मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया है।
इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में अस्पताल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एवं CEO अंकित अग्रवाल ने विभाग की चिकित्सकीय, नर्सिंग और तकनीकी टीम को सम्मानित करते हुए कहा कि यह सफलता विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी टीम के समर्पण, टीमवर्क और उत्कृष्ट सेवाओं का परिणाम है।
उन्होंने विश्वास जताया कि विभाग भविष्य में भी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराता रहेगा।
जल्द शुरू होंगी Cholangioscopy-guided EHL और Enteroscopy जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं
अस्पताल के CEO ऋषि कपूर ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थान लगातार आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाने के लिए कार्य कर रहा है।
उन्होंने घोषणा की कि आने वाले दिनों में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में Cholangioscopy-guided Electrohydraulic Lithotripsy (EHL) और Enteroscopy जैसी उन्नत एंडोस्कोपिक सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी।
इन सुविधाओं के शुरू होने के बाद जटिल गैस्ट्रो रोगों के इलाज के लिए मरीजों को महानगरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उदयपुर में ही विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध होगा।
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बिना ऑपरेशन के जटिल बीमारियों का इलाज, EUS से मिल रहा मरीजों को बड़ा लाभ
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS) एक अत्याधुनिक जांच तकनीक है, जिससे पाचन तंत्र, अग्न्याशय (Pancreas), पित्त नलिकाओं (Bile Ducts) और आसपास के अंगों की बेहद सटीक जांच की जा सकती है। यह तकनीक कई गंभीर और जटिल बीमारियों के शुरुआती एवं सटीक निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
संस्थान के एडवांस्ड एंडोस्कोपिस्ट डॉ. कार्तिकेय माथुर ने बताया कि EUS की मदद से कैंसर और तपेदिक (टीबी) जैसी बीमारियों का भी सटीक पता लगाया जा रहा है, जिन्हें सामान्य जांचों से पहचानना मुश्किल होता है।
उन्होंने बताया कि सिस्टोगैस्ट्रोस्टॉमी और सिस्टोडुओडेनोस्टॉमी जैसी जटिल प्रक्रियाएं, जिनके लिए पहले ओपन सर्जरी करनी पड़ती थी, अब बिना बाहरी चीरे के एंडोस्कोपी के जरिए सफलतापूर्वक की जा रही हैं।
विभाग भविष्य में EUS-guided Biliary Drainage जैसी और भी उन्नत उपचारात्मक तकनीकों को शुरू करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
क्या है एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS) तकनीक?
एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (Endoscopic Ultrasound-EUS) एक अत्याधुनिक चिकित्सीय जांच और उपचार तकनीक है, जिसमें एंडोस्कोप (कैमरे वाली पतली लचीली ट्यूब) और अल्ट्रासाउंड को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक के जरिए डॉक्टर मुंह या मलद्वार के रास्ते एंडोस्कोप को शरीर के भीतर पहुंचाकर पाचन तंत्र, अग्न्याशय (पैंक्रियाज), पित्त नलिकाओं, पेट, भोजन नली और आसपास के अंगों की बेहद स्पष्ट और सूक्ष्म तस्वीरें प्राप्त करते हैं।
EUS की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना बड़े ऑपरेशन के कई गंभीर बीमारियों की शुरुआती और सटीक पहचान करने में मदद करता है। इसके माध्यम से कैंसर, पैंक्रियाटिक रोग, पित्त नलिकाओं की समस्याएं, टीबी और शरीर के अंदर मौजूद गांठों की जांच की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर इसी प्रक्रिया के दौरान बायोप्सी भी ली जा सकती है।
यह तकनीक मरीजों के लिए इसलिए फायदेमंद है क्योंकि इसमें बाहरी चीरा नहीं लगता, दर्द कम होता है, रिकवरी जल्दी होती है और कई मामलों में ओपन सर्जरी की आवश्यकता भी नहीं पड़ती। इससे मरीजों को सुरक्षित, सटीक और कम समय में बेहतर उपचार उपलब्ध हो पाता है।
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