
हिंदुस्तान जिंक के देबारी स्मेल्टर में भारत की पहली 250 मीट्रिक टन इलेक्ट्रिक क्रेन शुरू, हर साल 250 टन से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन होगा कम
देबारी जिंक स्मेल्टर में भारत की पहली 250 मीट्रिक टन इलेक्ट्रिक हाइब्रिड क्रेन शुरू
हर साल 93,600 लीटर डीजल की बचत और 250.8 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी होगी
40 इलेक्ट्रिक बल्कर, 2 इलेक्ट्रिक बसें और 4 इलेक्ट्रिक लोडर पहले से संचालित
2050 या उससे पहले नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य
लगातार तीसरी बार दुनिया की सबसे सस्टेनेबल मेटल एवं माइनिंग कंपनी बनने का सम्मान
माही राठौड़,
उदयपुर, dusrikhabar.com। भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक और दुनिया की प्रमुख सिल्वर उत्पादक कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने राजस्थान के उदयपुर स्थित देबारी जिंक स्मेल्टर में देश की पहली 250 मीट्रिक टन क्षमता वाली इलेक्ट्रिक हाइब्रिड क्रेन शुरू कर दी है।
डीजल और बिजली दोनों पर चलने वाली यह अत्याधुनिक क्रेन कंपनी के कम-कार्बन ऑपरेशन और नेट-जीरो 2050 लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। कंपनी का दावा है कि इससे हर साल 250.8 टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
भारत की पहली 250 मीट्रिक टन इलेक्ट्रिक क्रेन, ग्रीन इंडस्ट्री की ओर बड़ा कदम
विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने देबारी स्थित जिंक स्मेल्टर में भारत की पहली 250 मीट्रिक टन क्षमता वाली इलेक्ट्रिक हाइब्रिड क्रेन की शुरुआत की है। यह क्रेन डीजल और बिजली दोनों से संचालित होती है, जिससे औद्योगिक कार्यों में ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी।
यह पहल कंपनी के ग्रीन रोडमैप का हिस्सा है, जिसके तहत स्वच्छ तकनीकों को तेजी से अपनाया जा रहा है। हिंदुस्तान जिंक पिछले तीन वर्षों में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए कई नई तकनीकों को लागू कर चुकी है।
कंपनी ने भारत की पहली अंडरग्राउंड बैटरी इलेक्ट्रिक मशीनें, इलेक्ट्रिक एवं एलएनजी लॉजिस्टिक्स फ्लीट, 40 इलेक्ट्रिक बल्कर, 2 इलेक्ट्रिक बसें और रामपुरा आगुचा खदान में 4 इलेक्ट्रिक लोडर पहले ही शुरू कर दिए हैं।
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देबारी जिंक स्मेल्टर में 250 मीट्रिक टन इलेक्ट्रिक हाइब्रिड क्रेन।
हर साल 93,600 लीटर डीजल की बचत, 250.8 टन कार्बन उत्सर्जन में होगी कमी
नई इलेक्ट्रिक क्रेन पहले इस्तेमाल हो रही डीजल क्रेन की जगह लेगी, जो सालाना लगभग 93,600 लीटर डीजल की खपत करती थी। कंपनी के अनुसार इस बदलाव से हर वर्ष लगभग 250.8 टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ औद्योगिक संचालन को बढ़ावा मिलेगा।
हिंदुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अरुण मिश्रा ने कहा, “सस्टेनेबिलिटी हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत की पहली 250 मीट्रिक टन इलेक्ट्रिक क्रेन की शुरुआत हमारे ग्रीन ट्रांजिशन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। हम स्वच्छ तकनीकों को अपनाकर उद्योग को अधिक पर्यावरण-अनुकूल और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
वहीं, सैनी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक गर्ग ने कहा कि हिंदुस्तान जिंक ने हमेशा सस्टेनेबल माइनिंग में नेतृत्व किया है और यह क्रेन ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ उत्सर्जन कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
नेट-जीरो 2050 का लक्ष्य, लगातार तीसरी बार बनी दुनिया की सबसे सस्टेनेबल मेटल कंपनी
हिंदुस्तान जिंक का लक्ष्य वर्ष 2050 या उससे पहले नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करना है। इसके लिए कंपनी लगातार रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग बढ़ा रही है, जो वर्तमान में लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
कंपनी ने वर्ष 2020 के स्तर की तुलना में स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन में 50 प्रतिशत कमी और स्कोप-3 उत्सर्जन में 25 प्रतिशत कमी का लक्ष्य निर्धारित किया है।
2022-23 में हिंदुस्तान जिंक भारत की पहली कंपनी बनी थी जिसने सिंदेसर खुर्द खदान में अंडरग्राउंड बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन शुरू किए थे। वर्तमान में कंपनी के पास 250 से अधिक LNG ट्रक हैं, जो खदानों से स्मेल्टर तक सामग्री का परिवहन करते हैं। इसके अलावा कंपनी ने एशिया का पहला लो-कार्बन जिंक ब्रांड ‘इकोजेन‘ (EcoZen) भी लॉन्च किया है।
एसएंडपी ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट 2025 में हिंदुस्तान जिंक को लगातार तीसरी बार दुनिया की सबसे सस्टेनेबल मेटल एवं माइनिंग कंपनी का दर्जा मिला है।
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