जोधपुर में सिजेरियन के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी: चिकित्सा मंत्री के गैर जिम्मेदाराना बयान, बोले धक्के खाकर आते हैं यहां मरीज

जोधपुर में सिजेरियन के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी: चिकित्सा मंत्री के गैर जिम्मेदाराना बयान, बोले धक्के खाकर आते हैं यहां मरीज

जोधपुर स्थित पावटा डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में सिजेरियन के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी

पावटा अस्पताल का OT बंद, जांच के लिए गठित हुई विशेषज्ञ समिति

इस्तेमाल हुई दवाओं पर कार्रवाई, सोडियम लैक्टेट इंजेक्शन पर लगी रोक

कोटा-बीकानेर के बाद जोधपुर में तीसरा मामला, बढ़ी स्वास्थ्य विभाग की चिंता

चिकित्सा मंत्री के बयान पर विवाद, सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर उठे सवाल

मंत्री के गैर जिम्मेदाराना बयान से विवाद, सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल?

माही राठौड़,

जोधपुर,dusrikhabar.com। राजस्थान में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा स्थित डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत खराब हो गई। वहीं चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बयान से राजनीति और गहरा गई है। विपक्ष के नेताओं ने चिकित्सा मंत्री और वर्तमान सरकार को आड़े हाथों लेते हुए असंवेदनशील करार दिया।  

आपको बता दे कि इस पूरे प्रकरण में महिलाओं को ब्लीडिंग, ब्लड प्रेशर लो होने और किडनी संक्रमण जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। इनमें से दो महिलाओं की हालत गंभीर होने पर उन्हें मथुरा दास माथुर अस्पताल से एम्स जोधपुर रेफर किया गया, जहां उनका ICU में इलाज चल रहा है और वे डायलिसिस पर हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर बंद कर दिया गया है, जांच कमेटी गठित की गई है और सिजेरियन के दौरान इस्तेमाल हुई दवाओं पर रोक लगा दी गई है। इस बीच चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बयान ने भी नई बहस छेड़ दी है।

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पावटा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी

जोधपुर के पावटा स्थित डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में 20 जून को 8 महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी की गई थी। ऑपरेशन के बाद सभी महिलाओं में अलग-अलग तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने लगीं। महिलाओं को ब्लीडिंग, ब्लड प्रेशर कम होने और संक्रमण की शिकायत हुई। इनमें से दो महिलाओं की स्थिति अधिक गंभीर हो गई। दोनों को पहले मथुरा दास माथुर अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उन्हें एम्स जोधपुर रेफर कर दिया गया।

एम्स में दोनों महिलाओं का ICU में उपचार चल रहा है। जानकारी के अनुसार दोनों गंभीर मरीजों की किडनी प्रभावित हुई है और उनका डायलिसिस किया जा रहा है।

ऑपरेशन थिएटर बंद, सैंपल जांच के लिए भेजे गए

घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पावटा अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) को बंद कर दिया है। अस्पताल प्रशासन की ओर से ऑपरेशन थिएटर से विभिन्न सैंपल लिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने तक यहां किसी भी प्रकार का ऑपरेशन नहीं किया जाएगा।

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के पीएमओ डॉ. कुलबीर चोपड़ा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जांच समिति गठित कर दी है। इस समिति में वरिष्ठ चिकित्सकों, ड्रग इंस्पेक्टरों और अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। जांच टीम ऑपरेशन थिएटर, उपकरणों, दवाओं और पूरी चिकित्सा प्रक्रिया की विस्तृत जांच कर रही है।

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6 प्रसूताओं की हालत में सुधार, दो का इलाज जारी

डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज की ओर से देर रात सभी आठ प्रसूताओं की स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी जानकारी जारी की गई। अधिकारियों  के अनुसार पावटा अस्पताल में भर्ती छह महिलाओं की स्थिति अब सामान्य और स्थिर है। उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। वहीं दो गंभीर महिलाओं का इलाज एम्स जोधपुर में जारी है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। पीएमओ डॉ. कुलबीर चोपड़ा ने बताया कि छह प्रसूताओं की तबीयत पूरी तरह ठीक है और उन्हें लेकर फिलहाल कोई गंभीर चिंता नहीं है।

सिजेरियन में इस्तेमाल हुए इंजेक्शन पर लगाई रोक

घटना के बाद ड्रग विभाग ने एहतियात के तौर पर अल्बर्ट डेविड लिमिटेड कंपनी के सोडियम लैक्टेट इंजेक्शन के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग को आशंका है कि सर्जरी के दौरान इस्तेमाल हुई दवाओं या इंजेक्शन की गुणवत्ता भी महिलाओं की बिगड़ी तबीयत का एक कारण हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए संबंधित दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने तक इनका उपयोग नहीं किया जाएगा। मामले की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ एम्स जोधपुर की विशेषज्ञ टीम को भी शामिल किया गया है।

कोटा और बीकानेर के बाद तीसरा बड़ा मामला

जोधपुर की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब राजस्थान पहले से ही सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत और किडनी फेल होने के मामलों को लेकर चिंतित है। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद पांच प्रसूताओं की किडनी फेल होने से मौत हो चुकी है। इसी तरह बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन के बाद छह महिलाओं की किडनी प्रभावित हुई थी। इनमें से दो महिलाओं की मौत हो गई थी। अब जोधपुर में सामने आए नए मामले ने स्वास्थ्य विभाग और सरकार की चिंता और बढ़ा दी है।

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चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का बयान बना चर्चा का विषय

मामले को लेकर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बीकानेर और कोटा के मामलों को जोधपुर की घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में ज्यादातर गंभीर और रेफर किए गए मरीज आते हैं। कई बार मरीज ऐसी स्थिति में पहुंचते हैं जब उनकी हालत पहले से ही काफी खराब होती है।

मंत्री ने कहा, “हमारे यहां मरीज कहीं न कहीं से धक्का खाकर आते हैं। जब निजी अस्पताल हाथ खड़े कर देते हैं या लाखों रुपए खर्च होने की बात कहते हैं, तब मरीज सरकारी अस्पतालों में पहुंचते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पावटा अस्पताल में भर्ती छह प्रसूताएं पूरी तरह स्वस्थ हैं और केवल दो मरीजों का उपचार उच्च स्तरीय केंद्र में चल रहा है।

“50 प्रतिशत महिलाएं सिजेरियन चाहती हैं, वे दर्द नहीं चाहती” बयान पर उठे सवाल

चिकित्सा मंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि वर्तमान समय में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी चाहती हैं क्योंकि वे प्रसव पीड़ा नहीं सहना चाहतीं। मंत्री के इस बयान पर विभिन्न सामाजिक और चिकित्सा वर्गों में बहस छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि जब सरकारी अस्पतालों में लगातार सिजेरियन के बाद गंभीर जटिलताओं के मामले सामने आ रहे हैं, तब ऐसे बयान समस्या के मूल कारणों से ध्यान भटका सकते हैं। कई लोगों का मानना है कि मंत्री का यह बयान कहीं न कहीं सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।

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कांग्रेस ने उठाए चिकित्सा मंत्री की संवेदनहीनता वाले बयान पर सवाल?

चिकित्सा मंत्री के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे प्रतापसिंह खाचरियावास ने भी जमकर निशाना साधा। गहलोत ने आरोप लगाया कि एक ओर जहां सरकार सरकारी आयोजनों और वीआईपी दौरों में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर लापरवाही के कारण माताओं की जिंदगी खतरे में है।

वहीं खाचरियावास ने कहा कि सरकार मरीजों को पानी का इंजेक्शन लगा रही यानी मरीजो को जहर दे रही है ये बात खुद डॉक्टरों ने स्वीकार की है। खाचरियावास ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए चिकित्सा मंत्री को “मौत के सौदागर” तक कह दिया। उन्होंने कहा कि सरकार चिकित्सा व्यवस्था में हो रही मौतों और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए बेतुके बयान दे रही है।

पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी चिकित्सा मंत्री और सरकार को आड़े हाथों लिया। पायलट ने कहा कि मंत्री का यह बयान असंवेदनशील है और अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए वे इस तरह के बहाने बना रहे हैं।

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जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर

फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी। जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के पीछे ऑपरेशन थिएटर की कोई तकनीकी खामी, संक्रमण, दवाओं की गुणवत्ता या सर्जिकल प्रक्रिया में कोई त्रुटि जिम्मेदार थी या नहीं। राजस्थान में कोटा, बीकानेर और अब जोधपुर में सामने आए मामलों ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और सिजेरियन डिलीवरी की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट अब न केवल प्रभावित परिवारों बल्कि पूरे प्रदेश की निगाहों का केंद्र बनी हुई है।

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