वंदे गंगा अभियान के समापन पर प्रकृति संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वन

वंदे गंगा अभियान के समापन पर प्रकृति संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वन

वंदे गंगा अभियान का भव्य समापन

सांस्कृतिक संध्या के जरिए जन-जन तक पहुंचा जल संरक्षण का संदेश

लोक कलाकारों और छात्राओं ने पर्यावरण जागरूकता की अलख जगाई

जल, पर्यावरण और पौधारोपण को लेकर समाज को किया जागरूक

संदीप बहल,

चित्तौड़गढ़, dusrikhabar। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चित्तौड़गढ़ में आयोजित “वंदे गंगा” जल संरक्षण जन अभियान का समापन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण और जल बचाने के प्रति सामूहिक जागरूकता का उत्सव बन गया।

भाष चौक में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में लोकगीतों, नृत्य प्रस्तुतियों और प्रेरक संदेशों के माध्यम से जल संरक्षण, पौधारोपण और प्रकृति बचाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि संस्कृति और सामाजिक चेतना मिलकर पर्यावरण संरक्षण की मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं।

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सांस्कृतिक संध्या बनी जल संरक्षण जागरूकता का सशक्त मंच

“वंदे गंगा” जल संरक्षण जन अभियान के समापन अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश देने का कार्य किया। कलाकारों ने गीत-संगीत और लोक प्रस्तुतियों के माध्यम से जल बचाने की आवश्यकता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

लोक कलाकारों और छात्राओं ने बांधा समां

कार्यक्रम में लक्ष्मी नारायण रावल पार्टी एवं स्थानीय गर्ल्स स्कूल महात्मा गांधी स्टेशन की छात्राओं ने रंगारंग प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के संदेश का यह अनूठा संगम लोगों को लंबे समय तक याद रहेगा।

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जल, पर्यावरण और पौधारोपण के संदेश से गूंजा सुभाष चौक

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान जल संरक्षण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी और अधिकाधिक पौधारोपण जैसे विषयों पर जागरूकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इन संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प भी लिया।

प्रशासन, शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय पाठक, अतिरिक्त जिला कलक्टर रामचंद्र खटीक, शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने पर जोर दिया।

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संस्कृति के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का अनूठा प्रयास

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं था, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश पहुंचाना था। सांस्कृतिक संध्या ने साबित किया कि जन-जागरूकता के लिए कला और संस्कृति सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।

जब बच्चे, कलाकार, शिक्षक और आम नागरिक एक मंच पर आकर प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हैं, तो यह केवल एक सरकारी अभियान नहीं रह जाता, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी बन जाता है। चित्तौड़गढ़ की इस सांस्कृतिक संध्या ने यह संदेश दिया कि जल की हर बूंद और प्रकृति का हर संसाधन आने वाली पीढ़ियों की अमानत है, जिसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।

वर्षा जल संग्रहण, पौधारोपण और स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान

इससे पूर्व बुधवार को राज्य सरकार के “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के तहत ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर महास्वच्छता अभियान की शुरुआत की गई। अभियान के अंतर्गत व्यू पॉइंट से विजय स्तंभ तक जागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें जिला प्रशासन, औद्योगिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

वंदे गंगा अभियान के समापन पर प्रकृति संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वन

विजय स्तंभ और कालिका माता मंदिर परिसर में जिला कलेक्टर डॉ. मंजू के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान

रैली के बाद विजय स्तंभ और कालिका माता मंदिर परिसर में जिला कलेक्टर डॉ. मंजू के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान चलाया गया। अधिकारियों, कर्मचारियों और युवाओं ने स्वयं सफाई कर स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का संदेश दिया।

जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने कहा कि जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने नागरिकों से वर्षा जल संग्रहण, पौधारोपण और स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने औद्योगिक संस्थानों से सीएसआर के तहत वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं विकसित करने और अधिक पौधारोपण करने की अपील भी की। अभियान में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और प्रमुख औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

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