3 साल के मासूम की जटिल सर्जरी, गीतांजलि हॉस्पिटल उदयपुर में मिला नया जीवन…!

3 साल के मासूम की जटिल सर्जरी, गीतांजलि हॉस्पिटल उदयपुर में मिला नया जीवन…!

मासूम बच्चे में जटिल CBD स्टोन का सफल इलाज

ERCP तकनीक से बिना बड़ी सर्जरी निकाला गया गॉलब्लैडर स्टोन

मिनिमली इनवेसिव तकनीकों से होती है तेज रिकवरी और कम दर्द 

संदीप बहल,

उदयपुर,dusrikhabar.com। उदयपुर के गीतांजलि हॉस्पिटल ने आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने महज 3 वर्षीय बच्चे में जटिल CBD स्टोन का सफल इलाज उपचार किया।  आधुनिक ERCP तकनीक और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की मदद से बिना बड़ी सर्जरी किए बच्चे को मात्र 5 दिन में स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया। यह सफलता आधुनिक मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की बढ़ती उपयोगिता और विशेषज्ञ टीमवर्क का बेहतरीन उदाहरण मानी जा रही है।

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पेट दर्द, पीलिया और बुखार के बाद अस्पताल पहुंचा बच्चा

जानकारी के अनुसार बच्चा लगातार पेट दर्द, पीलिया और बुखार की समस्या से परेशान था। परिजन उसे उपचार के लिए गीतांजलि हॉस्पिटल की पीडियाट्रिक्स OPD में लेकर पहुंचे, जहां प्रारंभिक जांच डॉ. सुभाष द्वारा की गई।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केस को गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. कार्तिकेय माथुर को रेफर किया गया। MRI जांच में बच्चे की CBD यानी कॉमन बाइल डक्ट में स्टोन पाया गया, जिसके बाद तुरंत इलाज की योजना बनाई गई।

3 साल के बच्चे में ERCP करना था बड़ी चुनौती

विशेषज्ञ डॉक्टर डॉ. कार्तिकेय माथुर ने बताया कि बच्चे में ERCP प्रक्रिया करना बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि यह तकनीक सामान्यतः वयस्क मरीजों में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों से की जाती है।

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उन्होंने बताया कि इतने छोटे बच्चे में सफलतापूर्वक ERCP कर CBD स्टोन निकालना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं था। समय पर की गई इस प्रक्रिया से पित्त नली में आई रुकावट दूर हो गई, जिससे आगे की सर्जरी अधिक सुरक्षित और आसान बन सकी।

विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक ERCP तकनीक अब जटिल बाइल डक्ट समस्याओं के इलाज में बेहद प्रभावी साबित हो रही है।

लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सफल गॉलब्लैडर सर्जरी

ERCP के बाद बच्चे को गॉलब्लैडर सर्जरी के लिए पीडियाट्रिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अजीत कुमार (GMCH) को रेफर किया गया। डॉ. अजीत कुमार ने आधुनिक लैप्रोस्कोपिक सर्जरी तकनीक का उपयोग करते हुए गॉलब्लैडर को सफलतापूर्वक हटाया। उन्होंने बताया कि 3 वर्षीय बच्चे में लैप्रोस्कोपिक गॉलब्लैडर सर्जरी करना सामान्य प्रक्रिया नहीं मानी जाती, लेकिन विशेषज्ञ टीम और अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से यह सुरक्षित रूप से संभव हो पाया।

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बड़ी सर्जरी से बचा बच्चा, तेजी से हुई रिकवरी

विशेषज्ञों ने बताया कि ERCP और लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी के संयुक्त उपयोग के कारण बच्चे को CBD Exploration जैसी बड़ी और जटिल सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी। इस आधुनिक उपचार पद्धति के कारण मरीज को कम दर्द हुआ, रिकवरी तेजी से हुई और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी काफी कम रही। मात्र 5 दिन में बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होकर डिस्चार्ज कर दिया गया।

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आधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीकों से बदल रही चिकित्सा व्यवस्था

चिकित्सकों के अनुसार आधुनिक मिनिमली इनवेसिव सर्जरी तकनीकों ने जटिल बाइल डक्ट और गॉलब्लैडर रोगों के इलाज को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना दिया है। अब मरीजों को बड़ी सर्जरी, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने और अधिक दर्द जैसी परेशानियों का सामना कम करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसी तकनीकें स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक उन्नत बनाएंगी।

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