
सांसद-कलेक्टर का मतभेद पहुंचा लोकसभा, सांसद ने लगाए कलेक्टर पर गंभीर आरोप…
लोकसभा में उठा प्रतापगढ़ DMF विवाद
उदयपुर सांसद ने कलेक्टर पर लगाए अहंकार के आरोप
DMF के 54 कामों में से सिर्फ 3 मंजूर
सांसद डॉ मन्नालाल रावत बोले- PM का सपना अधूरा रह जाएगा
विजय श्रीवास्तव,
दिल्ली/जयपुर,dusrikhabar.com। लोकसभा में प्रतापगढ़ जिले के DMF (District Mineral Foundation) कार्यों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने कलेक्टर अंजलि राजौरिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 54 स्वीकृत कार्यों में से सिर्फ 3 को ही मंजूरी दी गई, जिससे विकास कार्य ठप पड़ रहे हैं और प्रधानमंत्री के विकसित भारत के सपने को झटका लग सकता है।

संसद में गूंजा DMF विवाद
लोकसभा में शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने DMF (District Mineral Foundation) से जुड़े मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतापगढ़ कलेक्टर ने अहंकार और दंभ के चलते 54 स्वीकृत कार्यों में से केवल 3 को ही मंजूरी दी।
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सांसद रावत ने कहा कि गवर्निंग काउंसिल द्वारा स्वीकृत 54 कार्यों को राजस्थान सरकार ने वित्तीय मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद काम धरातल पर नहीं उतर पाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन कार्यों में स्कूल भवनों की मरम्मत, पेयजल व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं, जो अब तक अधूरी पड़ी हैं।
PM मोदी के विजन पर असर
सांसद ने संसद में कहा कि अगर इस तरह की स्थिति बनी रही तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘विकसित भारत 2047’ का सपना पूरा नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म की नीति पर काम कर रही है, लेकिन जिला स्तर पर इस तरह की बाधाएं विकास को प्रभावित कर रही हैं।
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DMF का गठन और उद्देश्य
रावत ने बताया कि खनिज और धातु विकास विनियमन अधिनियम (KMDR Act 2015) में संशोधन के बाद DMF का गठन किया गया था। इसका उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और राहत पहुंचाना है। जिला स्तर पर इसकी गवर्निंग काउंसिल कलेक्टर की अध्यक्षता में कार्य करती है और खनिज क्षेत्र कल्याण योजना को लागू करती है।
जांच और बदलाव की मांग
सांसद रावत ने लोकसभा में मांग की कि इस पूरे मामले की जांच करवाई जाए, DMF का अध्यक्ष सांसद को बनाया जाए और स्वीकृत सभी 54 कार्यों को तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे खनिज प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों को राहत मिलेगी और जरूरी विकास कार्य समय पर पूरे हो सकेंगे।
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पहले भी कर चुके हैं शिकायत
सांसद ने यह भी बताया कि वे इससे पहले इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री के सामने भी प्रतापगढ़ कलेक्टर की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
जानकार सूत्रों की मानें तो सांसद और प्रतापगढ़ कलेक्टर में पहले भी कई बातों को लेकर आपसी मतभेद हो चुका है। लेकिन इस बार मामला सांसद ने लोकसभा तक पहुंचा दिया। आपको बता दें कि प्रतापगढ़ ऐसा रिमोट जिला है जहां कोई भी IAS जल्दी से आना नहीं चाहता। ऐसे में सरकार ने डॉ अंजलि राजोरिया को यहां कलेक्टर बनाकर भेजा और वे यहां जिले के विकास के लिए कार्यरत हैं।

डॉ अंजलि राजोरिया, कलेक्टर प्रतापगढ़
कौन हैं डॉ अंजलि राजोरिया
2015 बैच की राजस्थान कैडर की IAS डॉ अंजलि राजोरिया इससे पहले गंगापुर सिटी कलेक्टर, सीईओ डूंगरपुर और एडीसी (TAD) उदयपुर के पद पर रह चुकी हैं। मिशन दृष्टि से वो लाइमलाइट में आईं।
दरअसल राजोरिया एक एमबीबीएस डिग्री प्राप्त डॉक्टर हैं उन्होंने स्कूली बच्चों के लिए ‘मिशन दृष्टि’ चलाया था, जिसमें आदिवासी बहुल क्षेत्र के कक्षा 1 से 12वीं तक के बच्चों की आंखों की एक महीने में रिकॉर्ड 147676 बच्चों की जांच हुई और आंखों के रोगों से प्रभावित सैंकड़ों बच्चों के चश्मे बनवाए गए। उनके इस प्रयत्न की प्रदेशभर में काफी प्रशंसा हुई थी।
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