महिला आरक्षण बिल; “देश और महिलाएं कभी नहीं करेंगी माफ”-दिया कुमारी

महिला आरक्षण बिल; “देश और महिलाएं कभी नहीं करेंगी माफ”-दिया कुमारी

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी का विपक्ष पर सीधा वार

संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर गरमाई सियासत

कांग्रेस और सहयोगी दलों पर गंभीर आरोप

क्या है महिला आरक्षण बिल, कैसे लागू होता है?

क्यों कहा जा रहा है कि बिल “फेल” हुआ या अटका?

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर,dusrikhabar.com। जयपुर में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राजस्थान की डिप्टी CM दिया कुमारी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संसद में इस ऐतिहासिक विधेयक के विरोध ने उनकी सोच को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं इस रवैये को कभी माफ नहीं करेंगी।

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विपक्ष पर डिप्टी CM का हमला

जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन विपक्ष ने इसे राजनीतिक नजरिए से देखा। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण विधेयक का विरोध कर महिलाओं के अधिकारों के प्रति अपनी नकारात्मक मानसिकता का परिचय दिया है।

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राजनीतिक आरोप और जवाब

दिया कुमारी ने कहा कि संसद में जिस तरह इस बिल पर बहस के दौरान व्यवधान और विरोध देखने को मिला, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। उनके मुताबिक, यह विधेयक महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाने और उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का एक बड़ा कदम था, लेकिन विपक्ष ने इसे समर्थन देने के बजाय राजनीति का मुद्दा बना दिया।

डिप्टी CM ने यह भी कहा कि देश की महिलाएं इस व्यवहार को न तो भूलेंगी और न ही माफ करेंगी। उनके अनुसार, इतिहास भी इस पूरे घटनाक्रम को याद रखेगा कि जब महिलाओं के अधिकारों की बात आई तो कौन उनके साथ खड़ा था और कौन विरोध में।

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संसद में क्या हुआ?

संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर जोरदार बहस हुई।

  • पक्ष ने इसे महिलाओं के अधिकारों का बड़ा कदम बताया
  • विपक्ष ने इसके लागू होने की प्रक्रिया और समय पर सवाल उठाए

क्या है महिला आरक्षण बिल?

इस पूरे विवाद के बीच महिला आरक्षण बिल की वास्तविक स्थिति को लेकर भी चर्चा तेज है। यह विधेयक, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाना जाता है, वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है।

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बिल “फेल” कैसे हुआ या अटका क्यों?

हालांकि, इस कानून के लागू होने को लेकर एक महत्वपूर्ण शर्त जुड़ी हुई है। इसे तत्काल प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसका क्रियान्वयन अगली जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पर निर्भर करता है। यही वजह है कि यह कानून पास होने के बावजूद अभी तक जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाया है।

इसी देरी को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है और आरोप लगा रहा है कि सरकार इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। वहीं सरकार और उसके प्रतिनिधि इसे संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रहे हैं।

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बहरहाल महिला आरक्षण बिल को लेकर जारी यह सियासी बयानबाजी आने वाले समय में और तेज हो सकती है। जहां एक ओर इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके लागू होने में हो रही देरी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप इसे लगातार चर्चा में बनाए हुए हैं।

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