
हिंदुस्तान जिंक की पहल से 20 लाख से अधिक बालिकाएं-महिलाएं शिक्षा से खेल तक गढ़ रहीं अपनी पहचान
हिंदुस्तान जिंक ने महिलाओं को लेकर किया दावा
20 लाख से अधिक बालिकाओं और महिलाओं के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव
शिक्षा संबल कार्यक्रम से 47हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित,इनमें 50% बालिकाएं
सानिया उरांव IIT गुवाहाटी में इंजीनियरिंग में प्रवेश,ग्रामीण छात्राओं के लिए प्रेरणा
सोनम घोष ने फुटबॉल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया
इंद्रा देवी बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने में निभा रही सक्रिय भूमिका
जिंक कौशल पहल के तहत 5000 से अधिक महिलाएं को दिया प्रशिक्षण
संदीप बहल
उदयपुर, dusrikhabar.com। किसी लड़की को बेहतर शिक्षा मिल जाए, किसी को खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिले और किसी महिला को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का आत्मविश्वास मिल जाए, तो उसकी जिंदगी की दिशा बदल सकती है।
हिंदुस्तान जिंक की सामाजिक पहलें इसी बदलाव की कहानी सामने ला रही हैं। कंपनी के अनुसार, उसकी विभिन्न पहलों से अब तक 20 लाख से अधिक बालिकाओं और महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। शिक्षा, खेल, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से लड़कियों को अपने सपनों को पूरा करने के अवसर मिल रहे हैं।
शिक्षा से खुल रहे हैं आगे बढ़ने के नए रास्ते
ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता लड़कियों के भविष्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती है। इसी दिशा में हिंदुस्तान जिंक (Hindustan Zinc) का शिक्षा संबल कार्यक्रम सरकारी विद्यालयों के 47,000 से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई और सीखने की क्षमता को मजबूत कर रहा है। इनमें करीब 50 प्रतिशत बालिकाएं हैं।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) आधारित शिक्षा तथा बेहतर शैक्षणिक संसाधनों से ग्रामीण छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे उनके सामने तकनीकी शिक्षा और नए करियर विकल्पों की संभावनाएं भी खुल रही हैं।
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सानिया उरांव ने सरकारी स्कूल से IIT गुवाहाटी तक तय किया सफर
उत्तराखंड के हल्दी गांव की सानिया उरांव की कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलने पर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ा जा सकता है। सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने वाली सानिया ने हिंदुस्तान जिंक के ‘ऊंची उड़ान’ कार्यक्रम के जरिए इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी की। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को कोचिंग, मार्गदर्शन और मेंटरशिप दी जाती है।
कार्यक्रम से अब तक करीब 350 विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। सानिया ने IIT गुवाहाटी में इंजीनियरिंग में प्रवेश प्राप्त किया। कंपनी के सहयोग और छात्रवृत्ति की मदद से वह अपनी उच्च शिक्षा जारी रख रही हैं।

फुटबॉलर, सोनम घोष
फुटबॉल के मैदान में सोनम घोष ने बनाई पहचान
पश्चिम बंगाल के आरामबाग की सोनम घोष ने खेल के जरिए अपने सपनों को नई दिशा दी। हिंदुस्तान जिंक की जिंक फुटबॉल अकादमी के पहले आवासीय बालिका कार्यक्रम से जुड़कर उन्होंने अपनी प्रतिभा को निखारा।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक वर्ष के भीतर उन्होंने उल्लेखनीय प्रगति की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर हासिल किया।
राजस्थान के जावर स्थित जिंक फुटबॉल अकादमी में बालिकाओं को खेल प्रशिक्षण के साथ शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और समग्र विकास के अवसर भी दिए जाते हैं।
इसका उद्देश्य लड़कियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ जीवन के दूसरे पहलुओं में भी सक्षम बनाना है।
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बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैला रहीं इंद्रा देवी
महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल शिक्षा और रोजगार तक पहुंच बनाना नहीं, बल्कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना और निर्णय लेने में सक्षम बनाना भी है। हिंदुस्तान जिंक की सामुदायिक पहल सखी के अंतर्गत उठोरी जागृति कलामंच बाल विवाह, लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ा रहा है।
राजस्थान के मूलजी का खेड़ा गांव की इंद्रा देवी इस बदलाव की मिसाल हैं। वह सखी उड़ान समिति की सचिव के रूप में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने में जुटी हैं। उनका सफर बताता है कि स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी सामाजिक कुरीतियों को चुनौती देने और समुदाय में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
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कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहीं महिलाएं
शिक्षा के बाद रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का अवसर मिलना भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से हिंदुस्तान जिंक की जिंक कौशल पहल युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण दे रही है।
कंपनी के मुताबिक, अब तक 12,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। इस प्रशिक्षण के जरिए युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और आगे बढ़ने के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
4,100 से अधिक गांवों तक पहुंचीं सामाजिक पहलें
हिंदुस्तान जिंक के अनुसार, उसकी सामाजिक पहलों का प्रभाव 4,100 से अधिक गांवों में रहने वाले 26 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंच चुका है। इन प्रयासों में महिलाओं और बालिकाओं की भागीदारी विशेष महत्व रखती है।
कंपनी का उद्देश्य है कि किसी लड़की की प्रतिभा उसके गांव, आर्थिक स्थिति या सामाजिक परिस्थितियों के कारण पीछे न रह जाए। सानिया का इंजीनियरिंग की पढ़ाई तक पहुंचना, सोनम का अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर प्रतिनिधित्व करना और इंद्रा देवी का सामाजिक बदलाव के लिए आगे आना इसी व्यापक प्रयास के अलग-अलग उदाहरण हैं।
इन कहानियों का संदेश साफ है—जब लड़कियों को अवसर, मार्गदर्शन और अपने फैसले लेने का भरोसा मिलता है, तो बदलाव केवल उनके जीवन तक सीमित नहीं रहता। उसका असर परिवार, समुदाय और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है।
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