जल बचाने से लेकर आपदा प्रबंधन तक: नागौर में वंदे गंगाजल के तहत किसानों-आमजन की सुरक्षा में बड़ा अभियान

जल बचाने से लेकर आपदा प्रबंधन तक: नागौर में वंदे गंगाजल के तहत किसानों-आमजन की सुरक्षा में बड़ा अभियान

जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के लिए किसानों को किया प्रेरित

कम पानी में अधिक उत्पादन की तकनीकों पर विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

मानसून से पहले जिला प्रशासन अलर्ट, सभी विभागों को सौंपे गए दायित्व

नालों की सफाई से लेकर बांधों के निरीक्षण तक व्यापक तैयारियां शुरू

‘सचेत’ और ‘दामिनी’ ऐप डाउनलोड करने की अपील, आमजन की सुरक्षा पर फोकस

विजय श्रीवास्तव,

नागौर, dusrikhabar.com। नागौर जिला प्रशासन ने जल संरक्षण, टिकाऊ कृषि और मानसून पूर्व आपदा प्रबंधन को लेकर व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। एक ओर वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान 2026 के तहत किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन और जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर आगामी मानसून को देखते हुए जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं। जिला कलक्टर देवेन्द्र कुमार ने दोनों कार्यक्रमों में स्पष्ट संदेश दिया कि जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से सफल होने वाले अभियान हैं।

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जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान, किसानों से संवाद

आत्मा सभागार में आयोजित किसान गोष्ठी में जिला कलक्टर देवेन्द्र कुमार ने किसानों से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में पानी की हर बूंद की कीमत बढ़ गई है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

कलेक्टर ने किसानों को पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक तकनीकों का समन्वय कर खेती में नवाचार अपनाने का सुझाव दिया, ताकि कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

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कम पानी में अधिक उत्पादन की तकनीकें बनीं चर्चा का केंद्र

किसान गोष्ठी में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन लेने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव:

  • ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का उपयोग
  • वर्षा जल संरक्षण तकनीकें
  • जैविक खेती को बढ़ावा
  • उर्वरकों का संतुलित उपयोग
  • पॉली हाउस में नियंत्रित खेती
  • कृषि लागत कम कर आय बढ़ाने के उपाय

विशेषज्ञों ने बताया कि जल संकट के दौर में टिकाऊ खेती ही भविष्य का रास्ता है।

मानसून से पहले प्रशासन अलर्ट, हर विभाग को जिम्मेदारी

आगामी मानसून और संभावित प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में कलेक्टर देवेन्द्र कुमार ने सभी विभागों को समयबद्ध तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए।

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उन्होंने कहा कि आपदा आने के बाद राहत कार्य शुरू करने के बजाय पहले से तैयारी करना अधिक प्रभावी है। इसी उद्देश्य से जिला और ब्लॉक स्तर पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर त्वरित सूचना आदान-प्रदान की व्यवस्था की जा रही है।

नालों की सफाई, बांधों का निरीक्षण और स्कूल भवनों की मरम्मत पर जोर

मानसून के दौरान जलभराव और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

प्रमुख तैयारियां:

  • नालों और नालियों की समयबद्ध सफाई
  • संभावित जलभराव क्षेत्रों की पहचान
  • कंट्रोल रूम की स्थापना
  • बांधों और जलाशयों का निरीक्षण
  • खतरनाक स्थलों पर चेतावनी बोर्ड
  • स्कूल भवनों की मरम्मत
  • सरकारी भवनों की छतों की सफाई
  • जल निकासी पंपों की उपलब्धता सुनिश्चित करना

प्रशासन का उद्देश्य है कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि या असुविधा से बचा जा सके।

किसानों से लेकर आमजन तक, सहभागिता से सफल होंगे अभियान

दोनों बैठकों का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि विकास और सुरक्षा के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। जल संरक्षण अभियान में किसानों की भूमिका महत्वपूर्ण है, जबकि आपदा प्रबंधन में आम नागरिकों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है।

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कलेक्टर ने लोगों से ‘सचेत’ और ‘दामिनी’ ऐप डाउनलोड करने की अपील करते हुए कहा कि मौसम संबंधी चेतावनियां समय पर मिलने से जान-माल की हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।

पानी बचाना और जीवन बचाना, दोनों एक समान जिम्मेदारी

नागौर प्रशासन की दोनों पहलें केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि लोगों के जीवन से सीधे जुड़ी हुई हैं। एक ओर जल संरक्षण किसानों की आजीविका और भविष्य की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर आपदा प्रबंधन आमजन के जीवन और सुरक्षा का विषय है। ऐसे प्रयास यह संदेश देते हैं कि प्रशासन तभी सफल माना जाएगा जब उसकी योजनाओं का लाभ गांवों, खेतों और आम लोगों तक पहुंचे।

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