
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर में वास्तुकला के भविष्य की तलाश, COA ने शुरू की राष्ट्रीय जूरी
देशभर के 220 आर्किटेक्चर विद्यार्थियों की प्रतिभा का राष्ट्रीय मंच पर मूल्यांकन
COA National Awards for Excellence 2026 की राष्ट्रीय जूरी मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर में शुरू
8 और 9 अक्टूबर को आयोजित हो रहा दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन
9 अक्टूबर को पुरस्कार समारोह में होगा विजेताओं का सम्मान
देशभर के 220 आर्किटेक्चर विद्यार्थी अपने चयनित अकादमिक कार्यों के साथ शामिल
AEAT, DAH और PGTA तीन प्रमुख श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्यों का मूल्यांकन
राष्ट्रीय जूरी में प्रमुख आर्किटेक्ट्स, शिक्षाविद और विशेषज्ञ हो रहे शामिल
एमयूजे परिसर में विद्यार्थियों के कार्यों की विशेष प्रदर्शनी का भी हो रहा आयोजन
विजय श्रीवास्तव
जयपुर, dusrikhabar.com। किसी इमारत की खूबसूरती केवल उसकी दीवारों और आकार में नहीं होती, बल्कि उसके पीछे छिपे विचार, समाज की जरूरतों और भविष्य की कल्पना में भी होती है। इसी सोच के साथ काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (COA) के नेशनल अवॉर्ड्स फॉर एक्सीलेंस 2026 की राष्ट्रीय जूरी गुरुवार को मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (MUJ) में शुरू हुई।
इससे पहले जयपुर के होटल ललित में एक प्रेसवार्ता में पत्रकारों से काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (COA) के नेशनल अवॉर्ड्स फॉर एक्सीलेंस 2026 के बारे में जानकारी देते जूरी के सदस्यों और मणिपाल यूनिवर्सिटी के इस आयोजन से जुड़े जूरी के सदस्यों ने बताया कि इस आयोजन में देशभर के सभी राज्यों से करीब 1000 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। इन्हीं में से 9 अक्टूबर को मूल्यांकन के बाद विजेता चुने जाएंगे।

होटल ललित में प्रेसवार्ता के दौरान ग्रुप फोटो में मणिपाल यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जूरी के सदस्य।
दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन में देशभर से आए 220 आर्किटेक्चर विद्यार्थी अपने चुने हुए अकादमिक कार्यों के साथ शामिल हुए हैं। इन विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन देश के प्रतिष्ठित आर्किटेक्ट्स, शिक्षाविदों और वास्तुकला विशेषज्ञों की राष्ट्रीय जूरी कर रही है। आयोजन का समापन 9 अक्टूबर को पुरस्कार समारोह के साथ होगा।
कॉलेज से राष्ट्रीय मंच तक पहुंची विद्यार्थियों की मेहनत
राष्ट्रीय जूरी में पहुंचना विद्यार्थियों के लिए अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए उनके कार्यों को पहले संस्थान स्तर, फिर जोनल स्तर पर परखा गया और इसके बाद उत्कृष्ट प्रोजेक्ट्स को राष्ट्रीय जूरी के लिए चुना गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल विजेताओं का चयन करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर देना भी है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके साथी किस तरह नए वास्तु विचारों, तकनीकों और सामाजिक सरोकारों पर काम कर रहे हैं।

काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के अध्यक्ष प्रो. किरण एस. महाजनी एवं उपाध्यक्ष, आर्किटेक्ट नवीन कानिथी।
प्रो. किरण एस. महाजनी ने कहा—प्रतिभा को पहचान देने का राष्ट्रीय मंच
काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर की अध्यक्ष प्रो. (आर्क.) किरण एस. महाजनी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह वार्षिक आयोजन देश में उभर रही वास्तुकला प्रतिभाओं को पहचान देने और वास्तुकला शिक्षा में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि युवा आर्किटेक्ट्स को राष्ट्रीय स्तर पर अपना अकादमिक कार्य प्रस्तुत करने और देश के प्रमुख आर्किटेक्ट्स एवं शिक्षाविदों के साथ संवाद करने का अवसर मिलना उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय जूरी द्वारा आर्किटेक्चरल थीसिस और आर्किटेक्चरल हेरिटेज डॉक्यूमेंटेशन प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन किया जा रहा है।
तीन श्रेणियों में परखी जा रही युवा प्रतिभा
वर्ष 2026 के COA Awards for Excellence में विद्यार्थियों के कार्यों को तीन प्रमुख श्रेणियों में शामिल किया गया है—
- Awards for Excellence in Architectural Thesis (AEAT) — स्नातक स्तर की उत्कृष्ट आर्किटेक्चरल थीसिस।
- Students’ Awards for Excellence in Documentation of Architectural Heritage (DAH) — भारत की वास्तुकला विरासत के दस्तावेजीकरण और उसकी व्याख्या से जुड़े उत्कृष्ट कार्य।
- Awards for Excellence in Post Graduate Thesis in Architecture (PGTA) — वास्तुकला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्नातकोत्तर शोध और अकादमिक कार्य।
इन श्रेणियों के माध्यम से डिजाइन, शोध, रचनात्मक सोच और भारतीय वास्तुकला विरासत के संरक्षण से जुड़े विद्यार्थियों के कार्यों को राष्ट्रीय पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है।
जूरी सिर्फ प्रोजेक्ट नहीं, सोच और दृष्टिकोण भी देख रही
आयोजन की संयोजक एवं COA-TRC की निदेशक प्रो. (आर्क.) जयश्री देशपांडे ने बताया कि पुरस्कारों के लिए एक व्यवस्थित और कठोर चयन प्रक्रिया अपनाई गई है।
उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं की पहचान कॉलेज स्तर से शुरू होकर जोनल और फिर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती है। राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थी अपने कार्यों को विशेषज्ञों के सामने रखते हैं, जिससे उन्हें अपने अकादमिक काम की तुलना देशभर से सामने आ रहे उत्कृष्ट प्रोजेक्ट्स से करने का अवसर मिलता है। स्टूडेंट्स को
यह प्रक्रिया विद्यार्थियों के लिए एक तरह की सीख भी है—जहां प्रतिस्पर्धा के साथ विचारों का आदान-प्रदान और पेशेवर संवाद भी होता है।

मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर बना युवा आर्किटेक्ट्स के विचारों का मंच
आयोजन की सह-संयोजक एवं स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन, एमयूजे की निदेशक प्रो. (डॉ.) पूजा ललित कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और फैकल्टी ने आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम किया है।
उन्होंने कहा कि मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर का आधुनिक बुनियादी ढांचा और अकादमिक वातावरण देशभर के विद्यार्थियों और विशेषज्ञों के लिए उपयुक्त मंच उपलब्ध करा रहा है।
यह आयोजन विद्यार्थियों को केवल अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर नहीं दे रहा, बल्कि उन्हें नए विचारों और वास्तुकला के बदलते स्वरूप को करीब से समझने का अवसर भी दे रहा है।
प्रोजेक्ट्स की प्रदर्शनी में दिखी देशभर की नई वास्तु सोच
राष्ट्रीय जूरी के साथ एमयूजे परिसर में विद्यार्थियों के चयनित कार्यों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई है। प्रदर्शनी में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों के डिजाइन, शोध और दस्तावेजीकरण कार्य प्रदर्शित किए गए हैं। विद्यार्थी, शिक्षक, आर्किटेक्ट्स और अन्य आगंतुक इन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से नई वास्तुकला सोच, डिजाइन दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली को समझ सकते हैं। इस लिहाज से यह आयोजन केवल पुरस्कारों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय अकादमिक संवाद का रूप भी ले रहा है।
9 अक्टूबर को सामने आएंगे उत्कृष्टता के विजेता
दो दिवसीय आयोजन का समापन 9 अक्टूबर को पुरस्कार समारोह के साथ होगा। इस दौरान राष्ट्रीय जूरी द्वारा चयनित विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। समारोह में विद्यार्थी, फैकल्टी सदस्य, जूरी सदस्य, काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के प्रतिनिधि और वास्तुकला जगत से जुड़े गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे।

राष्ट्रीय जूरी के साथ एमयूजे परिसर में विद्यार्थियों के चयनित कार्यों की विशेष प्रदर्शनी
COA की भूमिका सिर्फ पुरस्कारों तक सीमित नहीं
काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर का गठन आर्किटेक्ट्स एक्ट, 1972 के तहत भारत सरकार द्वारा किया गया है। परिषद देश में वास्तुकला शिक्षा और पेशेवर वास्तुकला अभ्यास को विनियमित करने की जिम्मेदारी निभाती है। इसके तहत आर्किटेक्ट्स का रजिस्टर बनाए रखने, मान्यता प्राप्त योग्यताओं, वास्तुकला शिक्षा के मानकों और पेशेवर अभ्यास से जुड़े मानकों की निगरानी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल हैं।
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर की बढ़ती अकादमिक भूमिका
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर में COA की राष्ट्रीय जूरी की मेजबानी विश्वविद्यालय के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे वास्तुकला शिक्षा, अकादमिक शोध, पेशेवर विशेषज्ञों और उद्योग के बीच संवाद के राष्ट्रीय मंच के रूप में एमयूजे की भूमिका मजबूत होती दिखाई देती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस आयोजन में देशभर के युवा विद्यार्थी अपने सपनों, मेहनत और नए विचारों के साथ एक ही मंच पर आए हैं। आज के यही विद्यार्थी आने वाले समय में देश के शहरों, घरों और सार्वजनिक स्थानों की तस्वीर गढ़ेंगे।
COA National Awards for Excellence 2026 के बारे में वो सब कुछ जो आपको जानना चाहिए…
पत्रकारों के सवालों के जवाब में पूरी जानकारी:-
सवाल: राष्ट्रीय स्तर की जूरी तक विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट कैसे पहुंचते हैं?
जवाब: चयन की प्रक्रिया कई स्तरों से होकर गुजरती है
COA प्रतिनिधियों ने बताया कि विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट सीधे राष्ट्रीय स्तर पर नहीं पहुंचते। पहले कॉलेज स्तर, उसके बाद जोनल स्तर पर उनका मूल्यांकन होता है। देश को अलग-अलग जोन में बांटकर वहां से उत्कृष्ट प्रोजेक्ट चुने जाते हैं। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञ जूरी इन चुने हुए कार्यों का मूल्यांकन करती है। इस प्रक्रिया के कारण राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले प्रोजेक्ट पहले ही कई स्तरों की कसौटी से गुजर चुके होते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित प्रोजेक्ट्स में देश के अलग-अलग हिस्सों का प्रतिनिधित्व देखने को मिलता है।
सवाल: इस बार राष्ट्रीय स्तर पर कितने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए जाएंगे?
जवाब: चुने गए प्रोजेक्ट्स में से सर्वश्रेष्ठ को राष्ट्रीय मंच मिलेगा;
सवाल के जवाब में जानकारी देते हुए कहा गया कि अलग-अलग चरणों के बाद करीब 30 प्रोजेक्ट्स राष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित किए गए हैं। इनकी विशेषज्ञों द्वारा आगे स्क्रीनिंग की जाएगी और इनमें से 10 सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट्स को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन राष्ट्रीय जूरी में शामिल विशेषज्ञ आर्किटेक्ट्स और शिक्षाविद करेंगे।

आयोजन की संयोजक एवं COA-TRC की निदेशक प्रो. (आर्क.) जयश्री देशपांडे
सवाल: विद्यार्थियों को पुरस्कार के रूप में क्या मिलेगा?
जवाब: सम्मान के साथ कैश प्राइज भी
COA की ओर से बताया गया कि अंडरग्रेजुएट कैटेगरी में विजेताओं के लिए 1 लाख रुपए का कैश प्राइज रखा गया है। इसके अलावा रनर-अप विद्यार्थियों को भी पुरस्कार राशि दी जाएगी। पोस्ट ग्रेजुएट कैटेगरी में तीन विजेताओं को 1-1 लाख रुपए तथा रनर-अप को 25-25 हजार रुपए दिए जाने की जानकारी दी गई। डॉक्यूमेंटेशन श्रेणी में भी चयनित विद्यार्थियों को पुरस्कार राशि और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
हालांकि COA प्रतिनिधियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पुरस्कार राशि से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण विद्यार्थियों के काम को मिलने वाली राष्ट्रीय पहचान है।
सवाल: क्या पुरस्कार की राशि ही इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण है?
जवाब: नहीं, असली पुरस्कार है काम की राष्ट्रीय पहचान
COA प्रतिनिधि ने कहा कि पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि किसी विद्यार्थी ने जिस मेहनत, शोध और रचनात्मक सोच के साथ अपना प्रोजेक्ट तैयार किया है, उसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिले। पुरस्कार मिलने के बाद इन विद्यार्थियों के कार्यों को व्यापक वास्तुकला समुदाय के सामने आने का अवसर मिलता है। यानी COA Awards विद्यार्थियों के लिए सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उनके भविष्य के पेशेवर सफर की पहचान भी हैं।
सवाल: COA इन उत्कृष्ट प्रोजेक्ट्स का रिकॉर्ड आगे कैसे सुरक्षित रखता है?
जवाब: हर वर्ष सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट्स की किताबें प्रकाशित की जाती हैं
COA प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्ष 2006 में इन पुरस्कारों की शुरुआत के बाद से हर वर्ष चयनित सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट्स को पुस्तकों के रूप में प्रकाशित किया जाता रहा है। इन पुस्तकों में देश के विद्यार्थियों द्वारा किए गए बेहतरीन वास्तुशिल्पीय कार्यों को स्थान मिलता है। इससे आने वाली पीढ़ियों के विद्यार्थी भी इन प्रोजेक्ट्स को देखकर सीख सकते हैं। इन प्रकाशनों को देशभर के आर्किटेक्चर कॉलेजों तक पहुंचाया जाता है और इन्हें आम लोगों के लिए भी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सवाल: वास्तुकला विरासत के दस्तावेजीकरण की जरूरत क्यों महसूस हुई?
जवाब: क्योंकि विकास के बीच कई विरासत स्थल बदल रहे हैं या खत्म हो रहे हैं
COA की ओर से बताया गया कि कई बार विद्यार्थी किसी ऐतिहासिक इमारत या विरासत स्थल का बेहद बारीकी से दस्तावेजीकरण करते हैं। लेकिन कुछ वर्षों बाद जब वे उसी जगह पर वापस जाते हैं तो वहां का स्वरूप बदल चुका होता है या कभी-कभी वह संरचना ही मौजूद नहीं रहती। विकास के नाम पर बदलते शहरों के बीच हमारी कई पुरानी वास्तु विरासत धीरे-धीरे गायब हो रही है। ऐसे में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए नक्शे, चित्र, विवरण और शोध सामग्री भविष्य के लिए महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बन जाते हैं।
सवाल: Documentation Award का उद्देश्य क्या है?
जवाब: भारतीय वास्तुकला और संस्कृति के लिए एक स्थायी रिकॉर्ड तैयार करना
COA प्रतिनिधियों के अनुसार Documentation Award एक तरह से भारतीय वास्तुकला विरासत का महत्वपूर्ण रिपॉजिटरी तैयार कर रहा है। इसमें देश के ऐतिहासिक भवनों, स्थापत्य और विरासत स्थलों से जुड़ी विस्तृत जानकारी सुरक्षित की जाती है। COA का मानना है कि यह सामग्री सिर्फ आर्किटेक्चर के विद्यार्थियों और विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आम जनता तक भी पहुंचनी चाहिए।
सवाल: आम जनता के लिए यह सामग्री किस तरह उपलब्ध होगी?
जवाब: डिजिटल संस्करण निशुल्क उपलब्ध कराने की तैयारी
COA अपनी वेबसाइट को विस्तार देने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि इन पुस्तकों और दस्तावेजों को डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराया जा सके। बताया गया कि डिजिटल सामग्री निशुल्क उपलब्ध होगी, ताकि विद्यार्थी, शोधकर्ता और आम लोग इसे आसानी से देख और डाउनलोड कर सकें। इसका उद्देश्य यह है कि जयपुर का आमेर, अल्बर्ट हॉल, जंतर-मंतर, जयगढ़ जैसे महत्वपूर्ण विरासत स्थलों की जानकारी और उनके दस्तावेज आम लोगों की पहुंच से दूर न रहें।
सवाल: क्या COA ने इस साल Documentation Project के लिए अलग पहल शुरू की है?
जवाब: हां, देशभर के कॉलेजों से 100 से ज्यादा आवेदन मिले
COA ने इस वर्ष Documentation Project नाम से एक विशेष पहल शुरू की है। इसके तहत देशभर के आर्किटेक्चर कॉलेजों को अपने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए दस्तावेजीकरण कार्य जमा करने के लिए आमंत्रित किया गया। COA को इस पहल के तहत देशभर से 100 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से चयनित कार्यों को पुस्तकों के रूप में प्रकाशित करने की योजना है। COA के अनुसार करीब 20 पुस्तकें अगले दो-तीन महीनों में तैयार होने की संभावना है।
सवाल: इन पुस्तकों को सिर्फ कॉलेजों तक सीमित रखा जाएगा?
जवाब: नहीं, इन्हें आम जनता तक पहुंचाना लक्ष्य है
COA का स्पष्ट मानना है कि भारतीय वास्तुकला विरासत से जुड़ी यह सामग्री केवल आर्किटेक्चर कॉलेजों या पेशेवर आर्किटेक्ट्स के लिए नहीं होनी चाहिए। आम नागरिक भी अपने शहर और देश की विरासत को समझ सकें, यही इस पहल का बड़ा उद्देश्य है। COA अपनी वेबसाइट के माध्यम से डिजिटल पहुंच बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
सवाल: मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर को राष्ट्रीय जूरी की मेजबानी का अवसर कैसे मिला?
डॉ. पूजा ललित कुमार: हमारे लिए यह बड़ी उपलब्धि है
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन की निदेशक प्रो. (डॉ.) पूजा ललित कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए इतने बड़े राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की मेजबानी करना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षों से इस तरह के आयोजन की मेजबानी के लिए प्रयास कर रहा था और अब यह अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि देशभर से विद्यार्थी और फैकल्टी सदस्य एमयूजे परिसर में पहुंचे हैं और उनके कार्यों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। डॉ. पूजा ने कहा कि यह आयोजन अब विश्वविद्यालय के लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आर्किटेक्चर का एक उत्सव बन गया है।

मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन की निदेशक प्रो. (डॉ.) पूजा ललित कुमार
सवाल: क्या प्रदर्शनी आम जनता के लिए भी उपलब्ध कराने की योजना है?
जवाब: हां, प्रदर्शनी को जयपुर के अन्य स्थानों तक ले जाने का प्रयास होगा
डॉ. पूजा ललित कुमार ने बताया कि मणिपाल यूनिवर्सिटी की ओर से यह इच्छा व्यक्त की गई है कि परिसर में लगी प्रदर्शनी को कुछ समय बाद जयपुर के अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर भी प्रदर्शित किया जाए। इसका उद्देश्य यह है कि प्रदर्शनी केवल मणिपाल यूनिवर्सिटी आने वाले लोगों तक सीमित न रहे। उन्होंने जवाहर कला केंद्र या राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर जैसे स्थानों पर इसे प्रदर्शित करने की संभावना की बात कही। इससे स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी देशभर के युवा आर्किटेक्ट्स के काम को देखने का अवसर मिलेगा।
सवाल: मणिपाल यूनिवर्सिटी को इस आयोजन के लिए क्यों चुना गया?

डॉ मधुरा यादव
जवाब: डॉ. मधुरा यादव: हमारा कैंपस खुद एक ‘लिविंग लैबोरेटरी’ है
स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन, मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर की फाउंडिंग डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) मधुरा यादव ने बताया कि उनका स्कूल करीब 14 वर्ष पुराना है और वर्ष 2012 में इसकी शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि पिछले करीब तीन वर्षों से विश्वविद्यालय COA से इस राष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी का अवसर देने का आग्रह कर रहा था। उनके अनुसार मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर का परिसर स्वयं वास्तुकला और सस्टेनेबिलिटी को समझने की एक ‘लिविंग लैबोरेटरी’ की तरह है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी यहां वास्तुकला और टिकाऊ विकास के सिद्धांतों को सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि परिसर में व्यवहारिक रूप से भी देख सकते हैं।
सवाल: राष्ट्रीय जूरी में देशभर से कितने विद्यार्थी और विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं?
जवाब: देश के अलग-अलग जोन से प्रतिभागियों की भागीदारी
COA की ओर से बताया गया कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत होने वाले प्रोजेक्ट्स में देश के विभिन्न हिस्सों और सभी प्रमुख जोन का प्रतिनिधित्व है। पोस्ट ग्रेजुएट थीसिस और Documentation Awards में भी देशभर के संस्थानों से चयनित प्रतिभागी शामिल हैं।
कुछ टीम प्रोजेक्ट्स में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण प्रत्येक प्रविष्टि के साथ विद्यार्थियों की संख्या सीमित रखी गई है। प्रतिभागी अपने फैकल्टी सदस्यों के साथ जयपुर पहुंचे हैं।
सवाल: क्या अभी किसी विशेष प्रोजेक्ट को संभावित विजेता के रूप में बताया जा सकता है?
जवाब: अभी नहीं, जूरी के मूल्यांकन के बाद ही फैसला होगा
COA प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जूरी की प्रक्रिया के दौरान किसी विशेष प्रोजेक्ट को पहले से विजेता बताना उचित नहीं होगा। विशेषज्ञ जूरी ही सभी चयनित कार्यों को देखकर उनका मूल्यांकन करेगी और इसके बाद विजेताओं का फैसला होगा। इसलिए राष्ट्रीय परिणाम आने से पहले किसी एक प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देना उचित नहीं है।
सवाल: क्या इस आयोजन से विद्यार्थियों को सीखने का भी अवसर मिलता है?
जवाब: जूरी प्रक्रिया खुद विद्यार्थियों के लिए एक ‘लर्निंग एक्सपीरियंस’ है
COA प्रतिनिधियों ने कहा कि जब विद्यार्थी दूसरे विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट्स को देखते हैं, उन्हें विशेषज्ञों की चर्चा सुनने को मिलती है और अलग-अलग डिजाइन समाधानों पर विचार होता है, तो यह अपने आप में सीखने की प्रक्रिया बन जाती है। किसी प्रोजेक्ट की प्रस्तुति, उसकी संरचना, डिजाइन की सोच और उसके पीछे के शोध पर चर्चा विद्यार्थियों को किताबों से अलग व्यावहारिक अनुभव देती है। यानी राष्ट्रीय जूरी केवल विजेता चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा अकादमिक लर्निंग प्लेटफॉर्म भी है।
सवाल: हर साल कितनी प्रविष्टियां आती हैं?
जवाब: तीनों अवॉर्ड श्रेणियों में करीब 1,000 प्रविष्टियां
COA के अनुसार तीनों प्रमुख पुरस्कार श्रेणियों में हर वर्ष करीब 1,000 प्रविष्टियां प्राप्त होती हैं। कॉलेज स्तर से ही प्रविष्टियों की संख्या को नियंत्रित किया जाता है, ताकि हर स्तर पर प्रोजेक्ट्स का व्यवस्थित और गंभीर मूल्यांकन किया जा सके। इसके बाद कॉलेज → जोनल → राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया में लगातार स्क्रीनिंग होती है और अंततः सर्वश्रेष्ठ कार्य राष्ट्रीय जूरी तक पहुंचते हैं।
इस पूरे सवाल-जवाब से क्या तस्वीर सामने आती है?
COA National Awards 2026 की राष्ट्रीय जूरी से जुड़ी बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि यह आयोजन केवल ‘कौन जीतेगा’ तक सीमित नहीं है।
इसके पीछे तीन बड़े उद्देश्य
पहला—युवा आर्किटेक्ट्स की प्रतिभा को राष्ट्रीय पहचान देना।
दूसरा—विद्यार्थियों के उत्कृष्ट शोध और डिजाइन कार्यों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना।
तीसरा—भारत की वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत का ऐसा दस्तावेज तैयार करना, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी देख और समझ सकें।
…और शायद इसी वजह से मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर में आयोजित यह राष्ट्रीय जूरी एक प्रतियोगिता से ज्यादा वास्तुकला शिक्षा, विरासत संरक्षण और युवा प्रतिभा का राष्ट्रीय संवाद बनती नजर आ रही है।
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