गीतांजलि हॉस्पिटल उदयपुर में जटिल सर्जरी: पैंक्रियास की मुख्य नली से निकालीं 10 से अधिक पथरियां, चौथे दिन छुट्टी

गीतांजलि हॉस्पिटल उदयपुर में जटिल सर्जरी: पैंक्रियास की मुख्य नली से निकालीं 10 से अधिक पथरियां, चौथे दिन छुट्टी

पैंक्रियास की मुख्य नली में फंसी थीं 10 से अधिक पथरियां

लगातार पेट दर्द और वजन घटने से परेशान था मरीज

Puestow Procedure से दूर की गई नली की रुकावट

सर्जरी के चौथे दिन अस्पताल से मिली छुट्टी

विशेषज्ञों की सलाह: पेट दर्द और पाचन संबंधी समस्याओं को न करें नजरअंदाज

सोनिया

उदयपुर, dusrikhabar.com। उदयपुर के गीतांजलि हॉस्पिटल में क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस से जूझ रहे मरीज की जटिल सर्जरी कर पैंक्रियास की मुख्य नली में फंसी 10 से अधिक पथरियां निकाली गईं। इनमें सबसे बड़ी पथरी का आकार डेढ़ सेंटीमीटर से अधिक था। लंबे समय से पेट दर्द, पाचन संबंधी परेशानियों और वजन घटने जैसी समस्याओं का सामना कर रहे मरीज को सर्जरी के बाद राहत मिली। डॉ. हेमंत जैन और उनकी टीम ने आधुनिक सर्जिकल तकनीक से नली की रुकावट दूर की। ऑपरेशन के चौथे दिन मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

पैंक्रियास की जटिल बीमारी ने बढ़ाई थीं मरीज की मुश्किलें

लंबे समय तक बनी रहने वाली बीमारी केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित करती है। लगातार दर्द, भोजन पचाने में परेशानी और वजन कम होने जैसी समस्याएं मरीज की दिनचर्या को मुश्किल बना सकती हैं। ऐसा ही मामला क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस से पीड़ित एक मरीज का सामने आया, जिसका गीतांजलि हॉस्पिटल में जटिल ऑपरेशन किया गया।

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मरीज लंबे समय से पैंक्रियास में सूजन की समस्या से परेशान था। बीमारी बढ़ने के कारण पैंक्रियास की मुख्य नली में पथरियां बन गई थीं। इन पथरियों के कारण नली में रुकावट पैदा हो रही थी, जिससे पैंक्रियाटिक रस के सामान्य प्रवाह पर असर पड़ रहा था। मरीज को बार-बार पेट दर्द, भोजन पचाने में परेशानी और वजन घटने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

पैंक्रियास की कार्यक्षमता प्रभावित होने से मरीज को डायबिटीज भी हो गई थी। ऐसे में उपचार का उद्देश्य केवल पथरियां निकालना ही नहीं, बल्कि नली में रुकावट दूर करना और मरीज की तकलीफों को कम करना भी था।

उन्नत सर्जिकल तकनीक से निकाली गईं 10 से अधिक पथरियां

गीतांजलि हॉस्पिटल में गैस्ट्रो एवं पैंक्रियाटिक सर्जन डॉ. हेमंत जैन और उनकी टीम ने मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद लैप्रोस्कोपिक-असिस्टेड लैटरल पैंक्रियाटिकोजेजुनोस्टॉमी, जिसे Puestow Procedure कहा जाता है, के जरिए सर्जरी की।

इस प्रक्रिया के दौरान पैंक्रियास की मुख्य नली से 10 से अधिक पथरियां निकाली गईं। इनमें सबसे बड़ी पथरी डेढ़ सेंटीमीटर से भी अधिक आकार की थी। सर्जरी के जरिए नली की रुकावट दूर करने और पैंक्रियाटिक रस के प्रवाह को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया।

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पैंक्रियास की सर्जरी जटिल प्रक्रियाओं में शामिल है। इसके लिए बीमारी की सही पहचान, उपयुक्त उपचार योजना और अनुभवी सर्जिकल टीम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे मामलों में मरीज की स्थिति और जांच रिपोर्ट के आधार पर उपचार का विकल्प तय किया जाता है।

ऑपरेशन के बाद तेजी से हुई रिकवरी

जटिल सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी तेजी से हुई। अस्पताल में उपचार और निगरानी के बाद उसे ऑपरेशन के चौथे दिन छुट्टी दे दी गई। अस्पताल के अनुसार, सर्जरी के बाद मरीज के लक्षणों में भी उल्लेखनीय सुधार महसूस हुआ।

लंबे समय से दर्द और पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान मरीज के लिए यह सुधार राहत देने वाला रहा। हालांकि, क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस जैसी बीमारी में सर्जरी के बाद भी नियमित फॉलो-अप, चिकित्सकीय सलाह और पैंक्रियास की कार्यक्षमता की निगरानी महत्वपूर्ण रहती है। डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए रक्त शर्करा का उचित प्रबंधन भी उपचार का अहम हिस्सा है।

चुनिंदा मरीजों में सर्जरी हो सकती है प्रभावी उपचार विकल्प

डॉ. हेमंत जैन ने बताया कि क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस, पैंक्रियास की मुख्य नली में पथरियां और लगातार दर्द से परेशान कुछ मरीजों में उचित जांच के बाद सर्जरी प्रभावी उपचार विकल्प हो सकती है। ऐसे मामलों में नली की रुकावट दूर करने से दर्द में लंबे समय तक राहत पाने में मदद मिल सकती है।

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उन्होंने बताया कि पैंक्रियास से संबंधित सर्जरी में विशेष कौशल और अनुभवी टीम की आवश्यकता होती है। गीतांजलि हॉस्पिटल में इस प्रकार की उन्नत पैंक्रियाटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है।

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि बार-बार होने वाले पेट दर्द, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होने और लगातार पाचन संबंधी समस्याओं को सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर विशेषज्ञ से परामर्श और उचित जांच बीमारी की पहचान तथा सही उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

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