सीएम भजनलाल ने लॉन्च की 3 आवासीय योजनाएं, जयपुर के पत्रकारों के सस्ते आवास का सपना अभी भी दूर की कौड़ी…!

सीएम भजनलाल ने लॉन्च की 3 आवासीय योजनाएं, जयपुर के पत्रकारों के सस्ते आवास का सपना अभी भी दूर की कौड़ी…!

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने  लॉन्च की हाउसिंग बोर्ड की तीन आवासीय योजनाएं 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया पत्रकारों के लिए  विशेष आवास योजना का शुभारंभ

लेकिन पत्रकारों को सस्ते आवास के नाम पर केवल 15 लाख रूपए की छूट 

पहले चरण में तैयार हो रहे इन बहुमंजिला फ्लेट्स में होंगी सुरक्षा के साथ सुविधाएं 

सीएम खुद निभा चुके हैं पत्रकार की भूमिका तो उन्हे सब पता है… 50% छूट पत्रकारों के आवास में मिलनी चाहिए

सीएम के गृह क्षेत्र पूंछरी का लौठा के पास विकसित हो रही सैटेलाइट सिटी में आवासीय योजना का प्लान

विजय श्रीवास्तव
जयपुर, dusrikhabar.com। मुख्यमंत्री ने शनिवार को कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब ऑफ राजस्थान में राजस्थान आवासन मंडल की विशिष्ट पंजीकरण योजना-2026 के तहत पत्रकारों के लिए विशेष आवास योजना का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बजट में अधिस्वीकृत पत्रकारों को आवास उपलब्ध करवाने की घोषणा की गई थी, जिसकी अनुपालना में जयपुर के इंदिरा गांधी नगर आवासीय योजना, सेक्टर-9, जगतपुरा में पत्रकारों के लिए फ्लैट्स का पंजीकरण शुरू किया गया है। इस बहुमंजिला आवासीय योजना के तहत फ्लैट्स में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि पत्रकार साथियों को सुरक्षित और सुविधायुक्त आवासीय वातावरण मिल सके।

मुख्यमंत्री ने की आवासीय योजना में विशेष छूट की घोषणा

राजस्थान में पत्रकारिता करने वाले अनेक लोगों के लिए अपना घर होना केवल एक संपत्ति खरीदने का मामला नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत के बाद सुरक्षित भविष्य पाने का सपना है। खासकर उन पत्रकारों के लिए, जिनकी आय सीमित है और जिन्हें नियमित वेतन, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य सुविधाएं भी हमेशा उपलब्ध नहीं होतीं।

2 बीएचके पर 12 लाख और 3 बीएचके पर 15 लाख रुपये की छूट

इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने आवासीय योजना के फेज-1 में 3 बीएचके फ्लैट पर कुल लागत में 15 लाख रुपये और 2 बीएचके फ्लैट पर कुल लागत में 12 लाख रुपये की विशेष छूट देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से अन्य संभागों में भी आवासीय योजनाएं लाई जाएंगी। उन्होंने भरतपुर में पूंछरी का लौठा के पास विकसित हो रही सैटेलाइट सिटी में भी नई आवासीय योजना लाने की घोषणा की। 

उन्होंने कहा कि सकारात्मकता से जुड़ी पत्रकारिता ही अपनी सार्थकता सिद्ध करती है। राजस्थान की पत्रकारिता का इतिहास स्वाभिमान और गौरव का साक्षी रहा है। विजय सिंह पथिक और पंडित झाबरमल्ल शर्मा जैसे मनीषियों की परंपरा ने सामाजिक सुधार, जनजागरण और प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री का पत्रकारिता अनुभव और पत्रकारों की आर्थिक हकीकत

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व, जनजागरण और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण साधना है। उन्होंने अपने पत्रकारिता के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वे पत्रकारों को होने वाली समस्याओं और कठिनाइयों को अच्छे से समझते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार पत्रकारों के सम्मान, संवेदनशीलता और कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। 

जाके पैर न फटे बिवाई… 

एक तरफ खुद मुख्यमंत्री ये कह रहे हैं कि वो खुद एक पत्रकार की भूमिका निभा चुके हैं। ऐसे में पत्रकारों की आर्थिक स्थिति उनसे छिपी नहीं है।  ऐसे में एक पत्रकार के लिए 74लाख रुपए का आवास खरीदने की सार्थकता किस हद तक सही है यह तथ्य भी ध्यान रखने योग्य है। एक तरफ मुख्यमंत्री कहते हैं कि मासिक वेतन काफी कम है, बमुश्किल नौकरियां मिल रही हैं। एक तथ्य इसमें ये भी है कि जो लोग मीडिया में काम कर रहे हैं उन्हें गाहे-बगाहे मीडिया हाउसों की जी हुजूरी करके अपना घर चलाना पड़ रहा है। ऐसे में साधारण वेतन पाने वाले और स्वतंत्र पत्रकारों के लिए यह योजना कैसे सार्थक साबित होगी, कैसे पत्रकारों का अपने और सस्ते आवास का सपना साकार होगा, ये विचार करने योग्य बात है। 

50 प्रतिशत छूट की मांग: पत्रकारों को भी मिलनी चाहिए विशेष राहत

कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने यह बात साझा करते हुए कहा कि ये विचारणीय प्रश्न है कि क्या सीएम को प्रदेश के पत्रकारों के हालात की जानकारी नहीं है और अगर है तो इस आवासीय योजना का लाभ किसे होगा? क्या ये पत्रकारों के हित की योजना है। क्योंकि जिस तेजी से महंगाई बढ़ रही है सरकारी कर्मचारी, मंत्री और विधायकों के वेतन भत्ते और सुविधाएं तो बढ़ जाती है लेकिन पत्रकारों का वेतन ऊंठ के मुंह में जीरा जितना ही बढ़ रहा है।
ऐसे में सामान्य पत्रकार के लिए सरकार को चाहिए कि जैसे विधायकों और मंत्रियों को निशुल्क आवास की सुविधा मिली है वैसे ही पत्रकारों को निशुल्क की जगह सब्सिडी के तौर पर कम से कम 50 फीसदी की छूट के साथ आवास उपलब्ध करवाए। इसमें सरकार को नुकसान नहीं मंत्री और विधाायक पांच साल के लिए होता है लेकिन अमूमन पत्रकार जीवन पर्यन्त पत्रकार की भूमिका ही निभाता है।
पत्रकारों की cm से एक मांग काफी समय से लंबित चल रही है जिसमें पत्रकार को मिलने वाली सम्मान राशि उन्हें जीवन पर्यंत पेंशन के रूप में मिलनी चाहिए उसके लिए संवेधानिक व्यवस्था की जाए ताकि पत्रकार के भविष्य और बुढ़ापे का संघर्ष खत्म हो सके। 

पत्रकार कल्याण की दिशा में उठाए महत्वपूर्ण कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले पौने तीन वर्षों में पत्रकारों के कल्याण के लिए अनेक पहल की हैं। स्वतंत्र पत्रकारों के अधिस्वीकरण के लिए आयु सीमा और अनुभव में छूट देकर न्यूनतम पात्रता आयु 45 वर्ष तथा अनुभव 15 वर्ष निर्धारित किया गया, जिससे 31 प्रेस प्रतिनिधि लाभान्वित हुए हैं। अधिस्वीकृत पत्रकारों के बच्चों को प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 43 छात्रवृत्तियां दी गई हैं। 
उन्होंने कहा कि राजस्थान पत्रकार स्वास्थ्य योजना (आरजेएचएस) में 1 हजार 423 बीमित पत्रकारों के प्रीमियम के रू, प में 2 करोड़ 15 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। वरिष्ठ अधिस्वीकृत पत्रकार सम्मान योजना के तहत 462 लाभार्थियों को सम्मानित किया गया, जबकि पत्रकार एवं साहित्यकार कल्याण कोष से 24 अधिस्वीकृत पत्रकारों और उनके आश्रितों को सहायता प्रदान की गई है।
नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर बजट में अधिस्वीकृत पत्रकारों को जयपुर में आवासीय फ्लैट्स देने की घोषणा की गई थी, आज उस कार्ययोजना के अंतर्गत इन फ्लैट्स के पंजीयन की प्रक्रिया का शुभारंभ हो गया है। उन्होंने इस योजना की शीघ्र क्रियान्विति के लिए राज्य सरकार का आभार जताया। इस अवसर पर सांसद मंजू शर्मा, जयपुर महापौर सुनील कोठारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता सहित अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।
बहरहाल इस मौके पर यह कहना और पत्रकारों की सरकार से मांग गलत नहीं होगी कि सरकार अगर वाकई पत्रकारों का हित चाहती है तो पत्रकारों के लिए ऐसी योजना लाए जिसमें उन्हें कम से कम 50 फीसदी की रियायती दरों पर आवास उपलब्ध कराए जाएं। चाहे वो आवास अलग अलग स्थान पर हों लेकिन उसके लिए प्रक्रिया एक साथ पूरी होनी चाहिए। क्योंकि आम आदमी का आशीयाना केवल एक बार ही बनता है। 
अपडेट जारी है… 
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