
ब्लास्टिंग से घरों में दरारें, टपकने लगा पानी: आदित्य अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ..
चित्तौड़गढ़ में आदित्य अल्ट्राटेक सीमेंट के खिलाफ लामबंद हुए ग्रामीण
सीमेंट फैक्ट्री से फायदा नहीं, सिर्फ नुकसान; रोजगार, मुआवजा और ब्लास्टिंग रोकने की मांग
महिलाएं-बुजुर्ग भी उतरे सड़क पर, सात दिन में समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
संदीप,
चित्तोड़गढ़, dusrikhabar.com। चित्तौड़गढ़ जिले के शंभूपुरा क्षेत्र में स्थित आदित्य अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। फैक्ट्री की माइंस में लगातार हो रही ब्लास्टिंग से मकानों में दरारें, बारिश में पानी टपकने और पर्यावरण प्रदूषण से परेशान ग्रामीणों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में युवाओं के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल रहे।
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ब्लास्टिंग से घरों में दरारें, हादसे का डर
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आदित्य अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री की माइंस में हो रही लगातार ब्लास्टिंग से आसपास के गांवों के घरों की दीवारों और छतों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। कई मकान कमजोर हो चुके हैं और बारिश के मौसम में छतों से पानी टपकने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि हर ब्लास्टिंग के दौरान उन्हें किसी बड़े हादसे का डर सताता रहता है। कई बार धमाके सुबह 5 बजे या देर रात होते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में भय का माहौल बना रहता है।

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ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि ब्लास्टिंग से हुए नुकसान का सर्वे कराया जाए और जिन मकानों को नुकसान हुआ है, उनकी मरम्मत या उचित मुआवजा दिया जाए।
स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं, बाहर के लोग कर रहे काम
प्रदर्शन के दौरान रेल का अमराना ग्राम पंचायत के सामरी गांव निवासी शैतान सिंह रावत ने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दे रहा है। उनका आरोप है कि फैक्ट्री में बाहर से कर्मचारियों को बुलाया जा रहा है, जबकि आसपास के गांवों के युवा बेरोजगार हैं। उन्होंने मांग की कि स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी दी जाए, ताकि उन्हें पलायन न करना पड़े और क्षेत्र का आर्थिक विकास हो सके। साथ ही उन्होंने घरों में आई दरारों की रिपेयरिंग की मांग भी दोहराई।
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महिलाओं और बुजुर्गों की बढ़ती परेशानी
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने बताया कि लगातार ब्लास्टिंग से बच्चों और बुजुर्गों में दहशत का माहौल है। रेल का अमराना निवासी रामी बाई, प्रेम बाई, पार्वती रावत, काजू कुमारी, देऊ बाई, मनीषा रावत, वहीं यशवंत सिंह रावत, संजय सिंह रावत और रतन सिंह रावत सहित कई लोगों के मकानों में गंभीर दरारें आ चुकी हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहता है और घरों में रहना मुश्किल हो गया है।
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पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा असर
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर बताया कि सीमेंट फैक्ट्री के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। धूल-मिट्टी और प्रदूषण से सांस से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं। पशुओं की मौत के मामले भी सामने आए हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और फैक्ट्री प्रबंधन को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए जाएं।
सात दिन का अल्टीमेटम, नहीं मानी बात तो आंदोलन होगा तेज
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। शैतान सिंह रावत ने बताया कि जिला प्रशासन ने सात दिन का समय मांगा है, इस दौरान ग्रामीणों और फैक्ट्री मैनेजमेंट के बीच बातचीत करवाई जाएगी। ग्रामीणों ने साफ कहा कि यदि समाधान नहीं निकला तो फैक्ट्री के बाहर आंदोलन, और जरूरत पड़ी तो माइंस बंद कराने को लेकर भी बड़ा संघर्ष किया जाएगा।
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