दीपावली पर बुधादित्य राजयोग का विशेष संयोग, 8 नवंबर को मनेगा दीपोत्सव; लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6:16 से 6:28 बजे तक

दीपावली पर बुधादित्य राजयोग का विशेष संयोग, 8 नवंबर को मनेगा दीपोत्सव; लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6:16 से 6:28 बजे तक

कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर सुबह 11:28 बजे से 9 नवंबर दोपहर 12:32 बजे तक

सूर्य और बुध की युति से बनेगा बुधादित्य राजयोग

मालव्य योग, विष्कुंभ योग और त्रिग्रही योग का भी संयोग

शाम 5:36 से रात 8:14 बजे तक रहेगा प्रदोषकाल

लक्ष्मी, गणेश और कुबेर देव की संयुक्त पूजा का विधान

वृष लग्न का समय शाम 6:04 से रात 8:01 बजे तक

लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6:16 से 6:28 और 6:52 से 7:05 बजे तक

व्यापारिक प्रतिष्ठानों में सुबह 9:31 से दोपहर 12:11 बजे तक लाभ-अमृत चौघड़िया

सोनिया

जयपुर, dustrikhabar.com। दीपावली केवल दीप जलाने और घरों को रोशनी से सजाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और नई उम्मीदों का पर्व भी है। सालभर की मेहनत के बाद जब परिवार एक साथ बैठकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना करता है, तो इस त्योहार का आध्यात्मिक और पारिवारिक महत्व और बढ़ जाता है। इस बार दीपावली पर ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग बन रहा है। सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा। इसके साथ मालव्य योग, विष्कुंभ योग और त्रिग्रही योग भी रहेंगे।

ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित पुरुषोत्तम गौड़, निदेशक ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के अनुसार, इस वर्ष 8 नवंबर, रविवार को दीपावली मनाई जाएगी। लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोषकाल और स्थिर वृष लग्न का संयोग विशेष शुभ रहेगा। उन्होंने लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय शाम 6:16 से 6:28 बजे और 6:52 से 7:05 बजे तक बताया है। इन समयों में प्रदोषकाल, स्थिर वृष लग्न और कुंभ का स्थिर नवांश भी रहेगा।

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बुधादित्य राजयोग के साथ मालव्य और त्रिग्रही योग का संयोग

ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित पुरुषोत्तम गौड़ के अनुसार, इस बार दीपावली पर ग्रहों की स्थिति विशेष संयोग बना रही है। सूर्य और बुध एक साथ होने से बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस योग को बुद्धि, विवेक, मान-सम्मान, करियर और आर्थिक उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।

इसके अलावा दीपावली पर मालव्य योग, विष्कुंभ योग और त्रिग्रही योग का भी संयोग रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इन योगों को विशेष महत्व दिया गया है।

गौड़ के अनुसार, लक्ष्मी पूजन के लिए केवल शुभ चौघड़िया देखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रदोषकाल के साथ स्थिर लग्न और स्थिर नवांश का विचार भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी आधार पर इस बार शाम के दो छोटे समयखंडों को सर्वश्रेष्ठ पूजन मुहूर्त बताया गया है।

8 नवंबर को मनाई जाएगी दीपावली, जानिए अमावस्या तिथि का समय

हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की पूजा-अर्चना का विधान है।

ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित पुरुषोत्तम गौड़ के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:32 बजे तक रहेगी। प्रदोषकाल में अमावस्या तिथि होने के कारण 8 नवंबर, रविवार को दीपावली मनाई जाएगी।

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धार्मिक मान्यता है कि दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है। भगवान गणेश की आराधना से विघ्न दूर होने और कार्यों में सफलता मिलने की कामना की जाती है। वहीं कुबेर देव की पूजा धन-संपदा और आर्थिक स्थिरता के लिए की जाती है।

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित पुरुषोत्तम गौड़ के अनुसार, इस वर्ष लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोषकाल, वृष लग्न और अन्य शुभ चौघड़िया के समय इस प्रकार रहेंगे।

पूजन का समय शुभ मुहूर्त
प्रदोषकाल शाम 5:36 से रात 8:14 बजे तक
वृष लग्न शाम 6:04 से रात 8:01 बजे तक
सिंह लग्न मध्यरात्रि 12:34 से 2:50 बजे तक
शुभ, अमृत और चर चौघड़िया शाम 5:36 से रात 10:32 बजे तक
लाभ चौघड़िया रात 1:49 से 3:28 बजे तक
शुभ चौघड़िया सुबह 5:07 से 6:45 बजे तक
सर्वश्रेष्ठ लक्ष्मी पूजन मुहूर्त

शाम 6:16 – 6:28 बजे

शाम 6:52 – 7:05 बजे

इन दोनों समयों में प्रदोषकाल, स्थिर वृष लग्न और कुंभ का स्थिर नवांश रहेगा। ज्योतिषाचार्य गौड़ ने इन्हें लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ समय बताया है।

व्यापारियों और प्रतिष्ठानों के लिए भी शुभ रहेगा पूजन का समय

दीपावली पर केवल घरों में ही नहीं, बल्कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों, कार्यालयों, फैक्ट्रियों, शोरूम और होटलों में भी लक्ष्मी पूजन की परंपरा है। कारोबारी इस दिन नए बहीखाते शुरू करते हैं और अपने प्रतिष्ठानों में सुख-समृद्धि तथा व्यापार में उन्नति की कामना करते हैं।

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पंडित गौड़ के अनुसार, व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दिन के समय लक्ष्मी पूजन के लिए चौघड़िया मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे।

  • प्रातः लाभ और अमृत चौघड़िया: सुबह 9:31 से दोपहर 12:11 बजे तक।

  • दोपहर का शुभ समय: दोपहर 1:32 से 2:53 बजे तक।

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 से दोपहर 12:35 बजे तक।

इन समयों में व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों में पूजा-अर्चना, बहीखाता पूजन और नए कार्यों का शुभारंभ कर सकते हैं।

लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए पहले से तैयार रखें ये सामग्री

दीपावली की पूजा को विधि-विधान से संपन्न करने के लिए पूजन सामग्री पहले से एकत्रित कर लेना बेहतर रहता है। इससे पूजा के दौरान किसी जरूरी वस्तु की कमी नहीं रहती और परिवार के सभी सदस्य एक साथ आराधना में शामिल हो सकते हैं।

पूजा की प्रमुख सामग्री:

  • मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां या तस्वीर।

  • पूजा की चौकी और लाल कपड़ा।

  • रोली, कुमकुम, चंदन और अक्षत।

  • पान, सुपारी, नारियल और गंगाजल।

  • पंचामृत, कलश, आम के पत्ते, मौली और जनेऊ।

  • फूल, फल और दूर्वा।

  • धूप, कपूर, दीपक और रुई की बत्तियां।

  • घी या तेल, खील, बताशे और मिठाई।

इनके साथ पूजा स्थल को स्वच्छ रखने और दीप सजाने की व्यवस्था भी पहले से कर लेनी चाहिए।

जानिए दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन की सरल विधि

दीपावली की पूजा में परिवार के सभी सदस्यों की भागीदारी इस पर्व की खुशी को और बढ़ा देती है। पूजा शुरू करने से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद दीपक और रंग-बिरंगी रोशनी से घर को सजाएं।

पूजन की विधि इस प्रकार है:

  1. सबसे पहले पूजा के लिए एक चौकी तैयार करें और उस पर साफ लाल कपड़ा बिछाएं।

  2. चौकी पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की मूर्तियां या तस्वीर स्थापित करें।

  3. सभी देवी-देवताओं के सामने घी या तेल का दीपक जलाएं और भगवान गणेश का ध्यान करते हुए पूजा प्रारंभ करें।

  4. रोली, अक्षत, फूल, फल, धूप, दीप और मिठाई अर्पित करें।

  5. इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करें। इस दौरान लक्ष्मी मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं।

  6. पूजा के अंत में सभी देवी-देवताओं की आरती करें।

  7. परिवार के सभी सदस्य मिलकर घर की सुख-शांति, खुशहाली, आर्थिक उन्नति और समृद्धि की कामना करें।

रोशनी के साथ रिश्तों और खुशियों का भी पर्व है दीपावली

दीपावली का महत्व केवल धन और वैभव की कामना तक सीमित नहीं है। यह पर्व परिवार को एक साथ लाने, आपसी प्रेम बढ़ाने और जीवन में सकारात्मकता का संकल्प लेने का अवसर भी देता है। घर के आंगन में जलते दीपक और पूजा में शामिल होते परिवार के सदस्य इस त्योहार को खास बनाते हैं।

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मां लक्ष्मी की आराधना के साथ स्वच्छता, सद्भाव, परिश्रम और जरूरतमंदों की मदद का संकल्प भी दीपावली की खुशियों को सार्थक बना सकता है। यही इस पर्व का वास्तविक मानवीय संदेश है।

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