
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के 4,184 स्टूडेंट्स के सपनों को मिली नई उड़ान, दीक्षांत समारोह में प्रदान किए गए 62 स्वर्ण पदक
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के 13वें दीक्षांत समारोह का समापन
दो दिनों में 4,184 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं
62 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया
केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने निरंतर सीखने और कौशल विकास की कही बात
डॉ. नारायण सभाहित ने AI के साथ मानवीय संवेदना और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश
संदीप बहल
जयपुर,dusrikhabar.com। वर्षों की मेहनत, परिवार के त्याग और शिक्षकों के मार्गदर्शन के बाद जब विद्यार्थियों के हाथों में डिग्रियां आईं, तो उनके लिए यह केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जीवन के नए अध्याय की शुरुआत थी। मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के दो दिवसीय 13वें दीक्षांत समारोह का समापन इसी उत्साह और भावनात्मक माहौल के बीच हुआ।
समारोह में कुल 4,184 विद्यार्थियों को उपाधियां और 62 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने वीडियो संदेश के माध्यम से युवाओं को निरंतर सीखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

मेहनत और सपनों का उत्सव बना दीक्षांत समारोह
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (एमयूजे) में 1 नवंबर को दो दिवसीय 13वें दीक्षांत समारोह का समापन हुआ। दूसरे दिन भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने विशेष वीडियो संदेश के जरिए स्नातकों को संबोधित किया। मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (एमएएचई) के सलाहकार और पूर्व प्रो-वाइस चांसलर डॉ. नारायण सभाहित गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में उपस्थित रहे।
अकादमिक शोभायात्रा और मणिपाल कुलगीत के बाद चेयरपर्सन लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) एम.डी. वेंकटेश ने समारोह का शुभारंभ किया।
शिक्षा के साथ कौशल और उद्यमिता भी जरूरी

कुलपति डॉ. नीति निपुण शर्मा
विश्वविद्यालय के प्रो-प्रेसिडेंट कमांडर (डॉ.) अनिल राणा ने स्वागत संबोधन में मणिपाल एजुकेशन एवं मेडिकल ग्रुप के संस्थापक पद्मश्री डॉ. टी.एम.ए. पाई के दूरदर्शी योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, कौशल और उद्यमिता का संगम युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कुलपति डॉ. नीति निपुण शर्मा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए स्नातकों को उनकी डिग्री के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि उपाधि जीवनभर की अनमोल धरोहर है। विद्यार्थियों को अपने माता-पिता और शिक्षकों के त्याग, सहयोग और मार्गदर्शन के प्रति हमेशा आभार बनाए रखना चाहिए।
डिग्री के बाद भी सीखने का सिलसिला जारी रखें: जयंत चौधरी
अपने वीडियो संदेश में केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने विश्वविद्यालय को एनआईआरएफ रैंकिंग में 58वां स्थान और क्यूएस की फाइव-स्टार रेटिंग प्राप्त करने पर बधाई दी।
उन्होंने कहा कि आज के तेजी से बदलते तकनीकी दौर में डिग्री हासिल करना सीखने की प्रक्रिया का अंत नहीं है। युवाओं को री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग को जीवनभर की आदत बनाना होगा, ताकि वे नए अवसरों के लिए तैयार रहें और विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सकें।
उन्होंने विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि खेलों से अनुशासन, बेहतर स्वास्थ्य और उद्यमिता के नए अवसर विकसित होते हैं।
एआई के दौर में मानवीय मूल्यों की अहमियत
गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. नारायण सभाहित ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में सफल करियर के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने एआई को प्रतिद्वंद्वी के बजाय सहयोगी के रूप में अपनाने, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखने तथा पर्यावरण संरक्षण और हरित नवाचार में नेतृत्व करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि एआई डेटा उत्पन्न कर सकता है, लेकिन जीवन का उद्देश्य और भाग्य निर्धारित नहीं कर सकता। वास्तविक महानता तकनीकी साधनों की बुद्धिमत्ता से नहीं, बल्कि व्यक्ति की सत्यनिष्ठा और मूल्यों से तय होती है।

डिग्री लेने के बाद शपथ लेते हुए मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के स्टूडेंट्स
4,184 उपाधियां और 62 स्वर्ण पदक प्रदान
दो दिवसीय समारोह में चारों संकायों के अंतर्गत कुल 4,184 उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 3,681 स्नातक (यूजी), 400 स्नातकोत्तर (पीजी) और 103 पीएच.डी. उपाधियां शामिल हैं।
स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में 45 स्नातक, 16 स्नातकोत्तर और एक पीएच.डी. शोधार्थी शामिल रहे। कुल 62 विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
चेयरपर्सन लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) एम.डी. वेंकटेश ने उपाधियां प्रदान कीं। इसके बाद परीक्षा नियंत्रक डॉ. दासरी नागराजू ने विद्यार्थियों को शपथ दिलाई। कुलसचिव डॉ. अमित सोनी के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ समारोह संपन्न हुआ।
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