80 की उम्र में भी मिली नई जिंदगी की राह, गीतांजलि हॉस्पिटल में जटिल सर्जरी के बाद घर लौटीं बुजुर्ग महिला

80 की उम्र में भी मिली नई जिंदगी की राह, गीतांजलि हॉस्पिटल में जटिल सर्जरी के बाद घर लौटीं बुजुर्ग महिला

80 वर्षीय महिला की पित्त नली की जटिल बीमारी का सफल ऑपरेशन

पित्त नली में कई पथरियां, संक्रमण और 3.5–4 सेंटीमीटर तक असामान्य फैलाव

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से पित्त नली की गांठ हटाकर छोटी आंत से जोड़ा

ऑपरेशन के चार दिन बाद मरीज को अस्पताल से मिली छुट्टी 

सोनिया

उदयपुर,dusrikhabar.com। तीन दशक तक बीमारी की पीड़ा झेलने और कई जगह उपचार कराने के बावजूद राहत नहीं मिल पाने वाली 80 वर्षीय महिला को आखिरकार गीतांजलि हॉस्पिटल, उदयपुर में नई उम्मीद मिली।

वरिष्ठ गैस्ट्रो एवं लिवर सर्जन डॉ. हेमंत जैन और उनकी टीम ने आधुनिक दूरबीन विधि से पित्त नली की जटिल बीमारी का सफल ऑपरेशन किया। उम्र और बीमारी की गंभीरता के बावजूद मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही और सर्जरी के महज चार दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

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वर्षों की तकलीफ के बाद बीमारी का सही निदान

मरीज पिछले 25 से 30 वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही थीं। लंबे समय तक अलग-अलग स्थानों पर उपचार कराने के बाद भी उनकी बीमारी की वास्तविक वजह सामने नहीं आ सकी थी।

गीतांजलि हॉस्पिटल में जांच के दौरान पता चला कि मरीज कोलेडोकल सिस्ट (पित्त नली की जन्मजात विकृति) से पीड़ित थीं। इस बीमारी में पित्त नली असामान्य रूप से फैल जाती है। इसके कारण पित्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और पथरी बनने, बार-बार संक्रमण होने तथा लंबे समय में पित्त नली के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।

मरीज की पित्त नली में कई पथरियां थीं और संक्रमण के साथ उसका आकार असामान्य रूप से बढ़कर लगभग 3.5 से 4 सेंटीमीटर तक पहुंच गया था। इन परिस्थितियों में सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी।

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दूरबीन विधि से की जटिल सर्जरी

मरीज की अधिक उम्र और बीमारी की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए डॉ. हेमंत जैन ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।

लैप्रोस्कोपिक कोलेडोकल सिस्ट एक्सीजन विद हेपेटिकोजेजुनोस्टॉमी नामक इस प्रक्रिया में असामान्य रूप से फैली पित्त नली की गांठ को पूरी तरह हटाया गया। इसके बाद पित्त का प्रवाह सामान्य रूप से बनाए रखने के लिए पित्त नली को छोटी आंत से जोड़ा गया।

आधुनिक दूरबीन तकनीक से की गई इस सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर रही और उनकी रिकवरी लगातार बेहतर होती गई। चार दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

पित्त नली की बीमारी के लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डॉ. हेमंत जैन ने बताया कि कोलेडोकल सिस्ट एक जन्मजात बीमारी है, जिसका पता कई बार बचपन में नहीं चल पाता और वयस्क अवस्था या अधिक उम्र में इसका निदान होता है।

पेट में बार-बार दर्द, पीलिया, बुखार, उल्टी और पित्त नली में बार-बार संक्रमण इसके संभावित लक्षण हैं। कुछ मरीजों में लंबे समय तक स्पष्ट लक्षण भी नहीं दिखाई देते।

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उन्होंने बताया कि समय पर जांच और विशेषज्ञ से उपचार जरूरी है, क्योंकि इस बीमारी से पथरी, संक्रमण और भविष्य में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। यदि पेट दर्द के साथ बुखार या पीलिया हो, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

सर्जरी में विशेषज्ञ टीम का रहा योगदान

इस जटिल ऑपरेशन में एनेस्थीसिया टीम से डॉ. अनुष जैन एवं डॉ. नील, सर्जरी टीम से डॉ. भुवना, डॉ. सुसैन, डॉ. हरिकांत एवं डॉ. नीरज तथा ऑपरेशन थिएटर स्टाफ से जितेंद्र, अरविंद, तरुणा एवं राहुल का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

मरीज की सफल सर्जरी और शीघ्र स्वस्थ होने से यह सामने आया कि उन्नत चिकित्सा तकनीक, विशेषज्ञों की टीम और समय पर सही निदान गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्ग मरीजों के लिए भी राहत और बेहतर जीवन की उम्मीद बन सकते हैं।

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