
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: पांच जिलों में कैसा रहा पहले चरण का मतदान? जयपुर में 67.60%, उदयपुर में 66.88% और जोधपुर में मतदान बहिष्कार…!
पंचायत चुनाव 2026: प्रमुख 5जिलों में पहले चरण के मतदान में कहीं उत्साह तो कहीं बहिष्कार
जयपुर में 67.60% वोटिंग; उदयपुर के नाई में सर्वाधिक 81.05% मतदान
जोधपुर के मंगलसिंह नगर में आरक्षण के विरोध में बहिष्कार, सिर्फ 12 लोगों ने डाले वोट
कोटा में 64.90% और बीकानेर में जिला परिषद की आठ सीटों पर 71.18% मतदान
अब पंच-सरपंच चुनाव की बारी: पांचों जिलों में ग्रामीण सरकार चुनने की अगली प्रक्रिया पर नजर
विजय श्रीवास्तव/माही राठौड़/नवीन सक्सेना/सोनिया/महावीर
जयपुर,उदयपुर,जोधपुर,कोटा,बीकानेर, dusrikhabar.com। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 के पहले चरण में गांवों की सरकार चुनने के लिए पांच जिलों में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और बीकानेर में जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान के दौरान कहीं मतदाताओं में उत्साह दिखाई दिया, तो कहीं स्थानीय मुद्दों और आरक्षण को लेकर नाराजगी भी सामने आई।
जयपुर में 67.60 प्रतिशत, उदयपुर में 66.88 प्रतिशत और कोटा में 64.90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। जोधपुर के मंगलसिंह नगर में ग्रामीणों के बहिष्कार के बीच केवल 12 लोगों ने मतदान किया। वहीं बीकानेर में जिला परिषद की आठ सीटों पर 71.18 प्रतिशत मतदान हुआ। इन आंकड़ों के बीच अब सबकी नजर चुनाव परिणामों और ग्राम पंचायतों के अगले चरण पर है।
1. जयपुर: 67.60 प्रतिशत मतदान, झोटवाड़ा में सबसे ज्यादा वोटिंग
झोटवाड़ा में 72.02 प्रतिशत और किशनगढ़-रेनवाल में 62.71 प्रतिशत मतदान दर्ज
जयपुर की 8 पंचायत समितियों में वोटिंग
| पंचायत समिति | सुबह 10 बजे तक वोटिंग (प्रतिशत में) | दोपहर 1 बजे तक वोटिंग (प्रतिशत में) | दोपहर 3 बजे तक वोटिंग (प्रतिशत में) | शाम 6 बजे तक वोटिंग (प्रतिशत में) |
| गोविंदगढ़ | 12.91 | 31.74 | 45.85 | 66.13 |
| चौंमू | 15.34 | 35.10 | 48.69 | 67.84 |
| किशनगढ़-रेनवाल | 13.29 | 31.16 | 45.78 | 62.71 |
| जोबनेर | 15.96 | 36.93 | 51.04 | 69.60 |
| झोटवाड़ा | 14.78 | 36.93 | 52.91 | 72.02 |
| सांभरलेक | 13.32 | 32.89 | 46.92 | 65.04 |
| दूदू | 15.33 | 38.42 | 53.39 | 69.87 |
| मौजमाबाद | 16.79 | 39.73 | 53.42 | 70.19 |
जयपुर जिले में पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण का मतदान पूरा हो गया। शाम 6 बजे तक जिले में 67.60 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। पंचायत समिति क्षेत्रों के आंकड़ों में झोटवाड़ा सबसे आगे रहा, जबकि किशनगढ़-रेनवाल में सबसे कम मतदान हुआ। मतदान के इन आंकड़ों से ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव को लेकर अलग-अलग स्तर पर मतदाताओं की भागीदारी सामने आई है।
पंचायत समिति के अनुसार झोटवाड़ा में 72.02 प्रतिशत, मौजमाबाद में 70.19 प्रतिशत, दूदू में 69.87 प्रतिशत, जोबनेर में 69.60 प्रतिशत, चौमूं में 67.84 प्रतिशत, गोविंदगढ़ में 66.13 प्रतिशत, सांभर में 65.04 प्रतिशत और किशनगढ़-रेनवाल में 62.71 प्रतिशत मतदान हुआ।
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22 जिला परिषद और 146 पंचायत समिति वार्डों में मतदान
इस चरण में जयपुर जिले की जिला परिषद के 22 वार्डों तथा आठ पंचायत समितियों के सभी 146 वार्डों के लिए मतदाताओं ने वोट डाले। पहले चरण के लिए जिले में कुल 7,43,640 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें 3,84,195 पुरुष और 3,59,445 महिला मतदाता शामिल थे।
मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटियों को सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन परिसर में बनाए गए स्ट्रांग रूम तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। चुनाव प्रक्रिया के अगले महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में 20 नवंबर को मतगणना और परिणाम घोषित किए जाने का कार्यक्रम बताया गया है।
पंच-सरपंच चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू होगी
आठ पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली 212 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए अलग चुनाव प्रक्रिया निर्धारित की गई है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार 23 अक्टूबर को नामांकन की प्रक्रिया होनी है। इसके बाद 24 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान और मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना कर परिणाम घोषित करने की योजना है।
इस तरह जयपुर में जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के मतदान के बाद अब ग्रामीण मतदाताओं की नजर ग्राम पंचायतों के चुनाव पर रहेगी।

जोधपुर में पंचायत चुनाव में वोटिंग करने जाती महिलाएं
2. जोधपुर: 53.79 प्रतिशत मतदान, मंगलसिंह नगर में बहिष्कार के बीच केवल 12 वोट
ओबीसी आरक्षण को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी, प्रशासन की समझाइश भी नहीं आई काम
जोधपुर जिले में पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण के दौरान मतदान के साथ-साथ एक गांव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूरी बनाने का मामला भी सामने आया। जिले के शेरगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मंगलसिंह नगर में ग्रामीणों ने सरपंच पद के लिए ओबीसी सीट आरक्षित किए जाने के विरोध में मतदान का बहिष्कार किया। गांव में लगभग 1,052 मतदाता बताए गए हैं, लेकिन शाम तक केवल 12 सरकारी कर्मचारियों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
ग्रामीणों की नाराजगी दूर करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी और क्षेत्रीय विधायक बाबू सिंह राठौड़ भी गांव पहुंचे। उन्होंने लोगों से बातचीत कर मतदान में भाग लेने की अपील की, लेकिन ग्रामीणों का रुख नहीं बदला। अंततः मतदान केंद्र पर सरकारी कर्मचारियों ने ही वोट डाले।
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यह घटना बताती है कि स्थानीय चुनावों में आरक्षण और प्रतिनिधित्व से जुड़े फैसले गांव के लोगों के लिए कितने महत्वपूर्ण हो सकते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान का अधिकार जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी लोगों की शिकायतों और आपत्तियों को सुनना भी है।
जिले की 6 पंचायत समितियों में सुबह 10 बजे तक वोटिंग प्रतिशत…
| पंचायत समिति | सुबह 10 बजे मतदान प्रतिशत | दोपहर 1 बजे तक मतदान प्रतिशत | दोपहर 3 बजे तक मतदान प्रतिशत | शाम 6 बजे तक मतदान प्रतिशत |
| आगोलाई | 16.59% | 47.29% | 62.58% | 74.94 |
| बालेसर | 12.91% | 36.14% | 48.79% | 60.59 |
| चाबा | 11.84% | 35.97% | 51.83% | 66.04 |
| चामू | 9.79% | 29.45% | 45.64% | 60.41 |
| सेखाला | 12.07% | 35.24% | 48.93% | 60.66 |
| शेरगढ़ | 11.04% | 33.98% | 48.08% | 59.54 |
जिले में मतदान के आंकड़ों को लेकर अंतर
जोधपुर जिले की शेरगढ़, चाबा, आगोलाई, चामू, सेखाला और बालेसर पंचायत समिति क्षेत्रों में पहले चरण के मतदान की जानकारी दी गई। उपलब्ध विवरण में जिले का कुल मतदान 53.79 प्रतिशत बताया गया है। वहीं, शाम 6 बजे तक के एक अन्य आंकड़े में 62.91 प्रतिशत मतदान का उल्लेख है। दोनों आंकड़ों में अंतर होने के कारण अंतिम आधिकारिक आंकड़े से इसकी पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
पंचायत समिति क्षेत्रों में आगोलाई में 74.94 प्रतिशत मतदान दर्ज होने की जानकारी दी गई, जबकि शेरगढ़ में 59.54 प्रतिशत मतदान बताया गया। मतदान के शुरुआती घंटों में मतदाताओं की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही। सुबह 10 बजे तक 12.09 प्रतिशत, दोपहर 1 बजे तक 35.50 प्रतिशत और दोपहर 3 बजे तक 50.09 प्रतिशत मतदान दर्ज होने की सूचना थी।
अब पंच-सरपंच चुनाव पर नजर
जोधपुर जिले में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए 24 अक्टूबर को मतदान तथा उसी दिन परिणाम घोषित किए जाने का कार्यक्रम बताया गया है। मंगलसिंह नगर का मामला अगले चरण में भी स्थानीय मुद्दों, आरक्षण और मतदाताओं की भागीदारी पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

पंचायत चुनाव में कोटा में मतदान का बहिष्कार करते हुए वोटर
3. कोटा: 64.90 प्रतिशत मतदान, दो मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों पर भी नजर
सुल्तानपुर में मतदान बढ़ने की सूचना, सांगोद में पिछले चुनाव से लगभग एक प्रतिशत की वृद्धि
कोटा जिले में पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण में चार पंचायत समितियों के क्षेत्रों में मतदान संपन्न हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में 64.90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस चरण में जिला परिषद के 25 वार्डों में से 19 वार्डों और पंचायत समितियों के 84 वार्डों के लिए मतदान हुआ।
जिला परिषद के 19 वार्डों में 51 प्रत्याशी मैदान में थे, जबकि पंचायत समिति के 84 वार्डों में 219 प्रत्याशियों की किस्मत मतदान के साथ मतपेटियों में बंद हो गई। शेष छह जिला परिषद वार्डों तथा चेचट और खैराबाद पंचायत समितियों के 34 वार्डों में दूसरे चरण के दौरान मतदान होना है।
मदन दिलावर और हीरालाल नागर के क्षेत्रों पर राजनीतिक नजर
कोटा जिले के चुनाव में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के विधानसभा क्षेत्रों में मतदान को लेकर विशेष राजनीतिक दिलचस्पी रही। हालांकि पंचायत चुनाव स्थानीय प्रतिनिधियों को चुनने की प्रक्रिया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक दलों की सक्रियता और जनप्रतिनिधियों के प्रभाव के आकलन के लिहाज से भी ऐसे चुनाव महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुल्तानपुर में पिछले चुनाव की तुलना में मतदान में लगभग चार प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के विधानसभा क्षेत्र सांगोद में पिछले चुनाव के मुकाबले मतदान लगभग एक प्रतिशत बढ़ा। इसके विपरीत भाजपा विधायक के क्षेत्र में मतदान प्रतिशत में गिरावट की जानकारी सामने आई है।
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इन आंकड़ों से अलग-अलग क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी का अंतर तो सामने आता है, लेकिन केवल मतदान प्रतिशत के आधार पर किसी उम्मीदवार या दल के प्रदर्शन का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए परिणाम और क्षेत्रवार आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे।
कोटा जिले में वोटिंग प्रतिशत
| 10 बजे तक | 1 बजे तक | 3 बजे तक | 6 बजे तक | फाइनल |
| 13.91% | 32.69% | 47.26% | 64.15% | 64.90% |
| पंचायत समिति | 10 बजे तक | 1 बजे तक | 3 बजे तक | 6 बजे तक | फाइनल |
| सांगोद | 13.97% | 33.38% | 48.91% | 66.34% | 67.45% |
| सुल्तानपुर | 13.04% | 30.56% | 44.56% | 62.50% | 63.43% |
| इटावा | 12.16% | 30.26% | 44.70% | 59.95% | 59.97% |
| लाडपुरा | 17.79% | 38.47% | 52.49% | 69.42% | 70.46% |
जिला प्रमुख के चुनाव के लिहाज से सांगोद महत्वपूर्ण
सांगोद क्षेत्र में जिला परिषद के पांच वार्ड हैं। इनमें वार्ड 11, 13 और 14 अनारक्षित तथा वार्ड 12 और 15 अनारक्षित महिला श्रेणी में बताए गए हैं। अन्य क्षेत्रों में भी अलग-अलग वार्डों के आरक्षण के अनुसार उम्मीदवार मैदान में हैं।
सांगोद, सुल्तानपुर, इटावा और लाड़पुरा पंचायत समितियों के अंतर्गत जिला परिषद के 19 वार्डों तथा पंचायत समिति के 84 वार्डों में कुल 4,48,947 मतदाता पंजीकृत बताए गए। इनमें से 2,87,995 मतदाताओं ने मतदान किया। इन क्षेत्रों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए कुल 270 उम्मीदवारों के चुनाव मैदान में होने की जानकारी दी गई है। अब परिणामों से स्पष्ट होगा कि मतदाताओं ने किन स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और विकास संबंधी अपेक्षाओं को प्राथमिकता दी।

उदयपुर में पंचायत चुनाव में अपनी बारी का इंतजार करते वोटर
4. उदयपुर: 66.88 प्रतिशत मतदान, नाई पंचायत समिति में 81.05 प्रतिशत वोटिंग
आदिवासी क्षेत्रों में मतदान को लेकर उत्साह, महिला मतदाता समूहों में बूथों तक पहुंचीं
उदयपुर जिले में पहले चरण के दौरान जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में कुल 66.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। जिले में मतदान के दौरान कई क्षेत्रों में मतदाताओं की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। नाई पंचायत समिति में सबसे अधिक 81.05 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि कुराबड़ में सबसे कम 58.97 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई।
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पहले चरण में झाड़ोल, फलासिया, ओगणा, गिर्वा, नाई, मावली, घासा, वल्लभनगर, भींडर और कुराबड़ पंचायत समितियों में मतदान हुआ। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। महिला मतदाताओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही और कई जगह महिलाएं समूहों में मतदान केंद्रों तक पहुंचीं।
10 पंचायत समितियों में 2026 के मतदान
| पंचायत समिति का नाम | 2026 में मतदान (%) |
| गिर्वा | 69.41% |
| भींडर | 60.18% |
| कुराबड़ | 58.97% |
| वल्लभनगर | 61.29% |
| झाड़ोल | 75.36% |
| फलासिया | 73.57% |
| मावली | 62.15% |
| नाई | 81.05% |
| ओगणा | 74.77% |
| घासा | 65.51% |
पंचायत समिति के अनुसार मतदान प्रतिशत
उदयपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मतदान के आंकड़ों में खासा अंतर दिखाई दिया। नाई में 81.05 प्रतिशत, झाड़ोल में 75.36 प्रतिशत, ओगणा में 74.77 प्रतिशत और फलासिया में 73.57 प्रतिशत मतदान हुआ। गिर्वा में 69.41 प्रतिशत तथा घासा में 65.51 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
वहीं मावली में 62.15 प्रतिशत, वल्लभनगर में 61.29 प्रतिशत, भींडर में 60.18 प्रतिशत और कुराबड़ में 58.97 प्रतिशत मतदान हुआ।
नाई पंचायत समिति में कुल 47,329 मतदाताओं में से 38,358 ने वोट डाले। ओगणा में 41,911 में से 31,336 मतदाताओं ने मतदान किया, जबकि झाड़ोल में 71,378 में से 53,792 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
फलासिया में 72,936 मतदाताओं में से 53,661 ने मतदान किया। गिर्वा में 65,745 में से 45,636 और घासा में 85,136 में से 55,770 मतदाताओं ने वोट डाले।
मावली में 94,585 में से 58,780, वल्लभनगर में 86,470 में से 52,996, भींडर में 97,820 में से 58,871 तथा कुराबड़ में 70,474 में से 41,557 मतदाताओं ने मतदान किया।
जिला परिषद के 25 और पंचायत समिति के 160 वार्ड
पहले चरण में उदयपुर जिले की जिला परिषद के 25 वार्डों और 10 पंचायत समितियों के 160 वार्डों के लिए मतदान हुआ। पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए 435 प्रत्याशी चुनाव मैदान में बताए गए हैं।
अब जिले की 284 ग्राम पंचायतों में पंच और सरपंच पदों के लिए नामांकन की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 23 अक्टूबर को नामांकन तथा 24 अक्टूबर को मतदान होना है।
उदयपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान के इन आंकड़ों से मतदाताओं की भागीदारी का एक व्यापक चित्र सामने आता है। विशेष रूप से नाई, झाड़ोल और ओगणा जैसे क्षेत्रों में अधिक मतदान दर्ज हुआ, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही। चुनाव परिणाम इन क्षेत्रों में स्थानीय प्रतिनिधित्व की तस्वीर स्पष्ट करेंगे।
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बीकानेर में वोटिंग के लिए कतार में वोटर और एक बुजुर्ग वोटिंग के लिए जाते हुए
5. बीकानेर: रुणिया में लगभग 75% मतदान, जिला परिषद की 8 सीटों पर 71.18% वोटिंग
पूगल, छत्तरगढ़, खाजूवाला और रुणिया क्षेत्रों में जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान
बीकानेर जिले में पंचायतीराज आम चुनाव 2026 के पहले चरण का मतदान गुरुवार शाम 6 बजे संपन्न हुआ। इस चरण में पूगल, छत्तरगढ़, खाजूवाला और रुणिया पंचायत समिति क्षेत्रों में जिला परिषद की आठ सीटों और पंचायत समिति के 60 सदस्य पदों के लिए वोट डाले गए।
मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ था। जिले में नई पंचायत समिति रुणिया में लगभग 75 प्रतिशत मतदान दर्ज होने की जानकारी दी गई। खाजूवाला में भी 70 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने वोट डाले। दूसरी ओर, छत्तरगढ़ में अपेक्षाकृत कम मतदान होने की सूचना सामने आई, हालांकि उपलब्ध विवरण में वहां का सटीक प्रतिशत नहीं दिया गया है।
319 मतदान केंद्रों पर हुई वोटिंग
चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए जिले में 319 मतदान केंद्रों पर 319 मतदान दल तैनात किए गए थे। मतदान के दौरान मतदाताओं ने जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चयन के लिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
बीकानेर जिले में जिला परिषद की आठ सीटों के लिए 71.18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह आंकड़ा जिला परिषद की इन आठ सीटों के लिए है, इसलिए इसे पूरे जिले की सभी पंचायत समिति सीटों का औसत मतदान नहीं माना जाना चाहिए।
रुणिया में लगभग 75 प्रतिशत मतदान और खाजूवाला में 70 प्रतिशत से अधिक भागीदारी ने इन क्षेत्रों में मतदाताओं की सक्रियता को रेखांकित किया। वहीं छत्तरगढ़ में कम मतदान के कारणों को समझने के लिए क्षेत्रवार विस्तृत आंकड़ों और स्थानीय परिस्थितियों को देखना जरूरी होगा।
| पंचायत समिति | सुबह 10 बजे (%) | दोपहर 1 बजे (%) | दोपहर 3 बजे (%) | शाम 6 बजे (%) | फाइनल (%) |
| छत्तरगढ़ | 11.36 | 34.83 | 49.29 | 67.86 | 66.83 |
| खाजूवाला | 13.80 | 37.09 | 54.12 | 70.94 | 70.94 |
| पूगल | 14.36 | 42.30 | 57.54 | 72.05 | 72.05 |
| रूणिया मुख्यालय बीकानेर | 18.82 | 43.40 | 60.63 | 74.50 | 74.58 |
112 ग्राम पंचायतों में पंच-सरपंच चुनाव की तैयारी
बीकानेर जिले की 112 ग्राम पंचायतों में पंच और सरपंच पदों के लिए अगली चुनाव प्रक्रिया निर्धारित की गई है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार 23 अक्टूबर को नामांकन, 24 अक्टूबर को मतदान और मतगणना तथा 25 अक्टूबर को उपसरपंच का चुनाव कराया जाना है।
इस चरण के बाद ग्रामीण मतदाताओं के सामने गांव के नेतृत्व का चुनाव करने का अगला अवसर होगा। सरपंच और वार्ड पंच गांव की बुनियादी सुविधाओं, स्थानीय विकास, सफाई, पेयजल और जनसमस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इन पदों के चुनाव का महत्व केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के ग्रामीण जीवन से भी जुड़ा हुआ है।
पांच जिलों के मतदान से क्या तस्वीर सामने आई?
जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और बीकानेर के पहले चरण के मतदान में क्षेत्रवार भागीदारी के अलग-अलग रुझान देखने को मिले। जयपुर में झोटवाड़ा ने 72.02 प्रतिशत मतदान के साथ जिले की पंचायत समितियों में सबसे अधिक भागीदारी दर्ज की। उदयपुर में नाई पंचायत समिति 81.05 प्रतिशत मतदान के साथ आगे रही। बीकानेर में जिला परिषद की आठ सीटों पर 71.18 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि कोटा जिले में कुल 64.90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
जोधपुर का मंगलसिंह नगर इस चरण में अलग कारण से चर्चा में रहा, जहां आरक्षण के मुद्दे पर ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया और शाम तक केवल 12 सरकारी कर्मचारियों ने वोट डाले। यह घटना स्थानीय असहमति और चुनावी भागीदारी के बीच संबंध को सामने लाती है।
मानवीय दृष्टिकोण से पंचायत चुनावों का महत्व केवल मतदान प्रतिशत या राजनीतिक समीकरणों में नहीं है। गांव के मतदाता अपने प्रतिनिधियों से सड़क, पानी, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर काम करने की अपेक्षा रखते हैं। ग्रामीण लोकतंत्र की सफलता इस बात से भी तय होती है कि चुने गए प्रतिनिधि लोगों की जरूरतों को कितनी गंभीरता से सुनते हैं और उनका समाधान करने का प्रयास करते हैं।
अब चुनावी प्रक्रिया के अगले चरण और मतगणना के परिणाम यह स्पष्ट करेंगे कि जिला परिषदों, पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों में प्रतिनिधित्व की तस्वीर किस तरह उभरती है। मतदान में शामिल हर मतदाता की भागीदारी गांवों के भविष्य से जुड़ी है और यही पंचायतीराज व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण ताकत है।
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