
पूर्वोत्तर के 8 राज्यों के अधिकारी ने जयपुर पहुंच राजस्थान के डिजिटल मॉडल को समझा, भामाशाह डेटा सेंटर…
पूर्वोत्तर के 8 राज्यों के 33अफसरों ने राजस्थान की डिजिटल परियोजनाओं का किया अध्ययन
भामाशाह डेटा सेंटर में नेटवर्क संचालन, सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं की ली जानकारी
ई-ऑफिस को ब्लॉक स्तर तक विस्तारित करने पर रहा जोर
आपदा में राजस्थान के डेटा सेंटर को वैकल्पिक केंद्र के रूप में काम लेने की संभावनाएं तलाशी
जन आधार योजना और राजस्थान संपर्क 181 की कार्यप्रणाली का भी किया अध्ययन
विजय श्रीवास्तव
जयपुर, dusrikhabar.com। सरकारी सेवाएं तकनीक के जरिए आम लोगों तक तेजी से और पारदर्शी तरीके से पहुंचें, इसके लिए राज्यों के बीच अनुभव साझा करना महत्वपूर्ण हो गया है। इसी उद्देश्य से पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों के 33 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल राजस्थान की डिजिटल व्यवस्थाओं का अध्ययन करने जयपुर पहुंचा।
प्रतिनिधिमंडल ने भामाशाह डेटा सेंटर में राज्य की तकनीकी परियोजनाओं, नेटवर्क संचालन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। दो दिवसीय दौरे का मकसद राजस्थान के अनुभवों से सीखना और सफल डिजिटल मॉडल को दूसरे राज्यों में अपनाने की संभावनाएं तलाशना है।
भामाशाह डेटा सेंटर में समझीं डिजिटल व्यवस्थाएं
9 अक्टूबर को केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी नंद कुमारम के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कार्यशाला में भाग लिया।
इसमें असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के 25 अधिकारी तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के आठ अधिकारी शामिल हुए।
कार्यशाला में अधिकारियों को भामाशाह डेटा सेंटर, नेटवर्क संचालन केंद्र, सुरक्षा संचालन केंद्र, राजस्थान स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (राजस्वान/RSWAN) और राजनेट की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया। साथ ही इन तकनीकी व्यवस्थाओं को दूसरे राज्यों में उपयोग करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

जयपुर के भामाशाह डेटा सेंटर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी नंद कुमारम के नेतृत्व में पूर्वोत्तर के 8 राज्यों के अफसर राजस्थान के डिजिटल मॉडल को समझते हुए।
डिजिटल शासन के लिए तकनीक के साथ बेहतर समन्वय जरूरी
नंद कुमारम ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता केवल आर्थिक संसाधनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके लिए स्पष्ट कार्ययोजना, मजबूत तकनीकी ढांचा और विभागों के बीच तालमेल भी जरूरी है। दूसरे राज्यों में सफलतापूर्वक लागू की गई परियोजनाओं से सीखकर नई व्यवस्थाओं को कम समय और बेहतर संसाधन प्रबंधन के साथ शुरू किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका सिर्फ तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसी जनकल्याणकारी सेवाओं पर भी पड़ता है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में ई-ऑफिस व्यवस्था को ब्लॉक स्तर तक पहुंचाने की जरूरत बताई, ताकि सरकारी कामकाज में तेजी आए और लोगों की समस्याओं का समाधान आसान हो।
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परिवार आधारित डिजिटल डेटाबेस से योजनाओं में मिलेगी मदद
कार्यशाला में परिवार आधारित डिजिटल डेटाबेस की उपयोगिता पर भी चर्चा हुई। नंद कुमारम के अनुसार, ऐसे डेटाबेस से सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान करने और उन्हें योजनाओं का लाभ पहुंचाने में त्रुटियां कम करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने समाचार पत्रों और सोशल मीडिया से मिलने वाली सूचनाओं के डिजिटल विश्लेषण को भी महत्वपूर्ण बताया। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में सामने आने वाली जनसमस्याओं की पहचान कर संबंधित विभागों तक समय पर जानकारी पहुंचाई जा सकती है।
इसके अलावा, आपदा की स्थिति में राजस्थान के डेटा सेंटर को पूर्वोत्तर राज्यों के लिए वैकल्पिक केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। उन्होंने डिजिटल परियोजनाओं को लागू करने से पहले लागत, समयसीमा, मानव संसाधन और संभावित लाभ का आकलन करने पर जोर दिया। कार्यशाला में सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के तकनीकी निदेशक अखिलेश मित्तल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
जन आधार और राजस्थान संपर्क 181 का भी करेंगे अध्ययन
दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन, 10 अक्टूबर को प्रतिनिधिमंडल योजना भवन स्थित आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय में जन आधार योजना की कार्यप्रणाली समझेगा। इसके बाद सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क 181 का दौरा कर जनशिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और समाधान की डिजिटल प्रक्रिया का अध्ययन करेगा। यह दौरा राज्यों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने और डिजिटल सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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