विशाखापत्तनम में IATO का 41वां राष्ट्रीय सम्मेलन: राजस्थान पेश करेगा विरासत और पर्यटन की नई तस्वीर, 18 राज्यों से पहुंचे टूरिज्म सेक्टर के प्रतिनिधि

विशाखापत्तनम में IATO का 41वां राष्ट्रीय सम्मेलन: राजस्थान पेश करेगा विरासत और पर्यटन की नई तस्वीर, 18 राज्यों से पहुंचे टूरिज्म सेक्टर के प्रतिनिधि

IATO का 41वां वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन 10 से 13 सितंबर 2026 तक विशाखापत्तनम में 

‘India – The World’s Next Tourism Opportunity’ है थीम

राजस्थान कर रहा अपनी विरासत, संस्कृति, वाइल्डलाइफ और नई पर्यटन नीतियों को प्रमोट 

राजस्थान इनबाउंड टूरिज्म बढ़ाने के लिए टूर ऑपरेटर्स के सामने रखेगा अपना पर्यटन मॉडल

करीब 1,000 डेलिगेट्स और पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधि हो रहे सम्मेलन में शामिल

18 राज्यों के पर्यटन विभागों की है सक्रिय भागीदारी

11-12 सितंबर को ट्रैवल मार्ट, 13 सितंबर को FAM Tours

FAM Tour के जरिए आंध्र प्रदेश के पर्यटन स्थलों से प्रतिनिधियों से होंगे रूबरू

-विजय श्रीवास्तव-

जयपुर/विशाखापत्तनम, dusrikhabar.com। भारत के पर्यटन उद्योग के लिए आंध्र प्रदेश का समुद्री शहर विशाखापत्तनम इन दिनों देशभर के टूरिज्म प्रोफेशनल्स का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (IATO) का 41वां वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन 10 से 13 सितंबर 2026 तक विशाखापत्तनम के नोवोटेल विशाखापत्तनम वरुण बीच में आयोजित किया जा रहा है।

‘India – The World’s Next Tourism Opportunity’ थीम पर हो रहे इस सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 1,000 पर्यटन विशेषज्ञ, टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल प्रोफेशनल्स, होटल उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि और अन्य हितधारक हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में करीब 17-18 राज्यों के पर्यटन विभागों की भागीदारी भी है।

इस बड़े मंच पर राजस्थान पर्यटन विभाग भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। राजस्थान की कोशिश केवल अपने किलों और महलों को प्रदर्शित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विरासत, संस्कृति, वन्यजीवन, आध्यात्मिक पर्यटन और नई पर्यटन नीतियों के जरिए राज्य को विदेशी पर्यटकों के लिए और आकर्षक डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत करने की है।

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पर्यटन के भविष्य पर देशभर के विशेषज्ञों का मंथन

IATO के राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय पर्यटन उद्योग की संभावनाओं पर चर्चा करना और देश को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में और मजबूती से स्थापित करने की रणनीति तैयार करना है। सम्मेलन का नेतृत्व IATO अध्यक्ष रवि गोसाईं, चेयरमैन सुनील मिश्रा और को-चेयरमैन दीपक भटनागर कर रहे हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरपु राममोहन नायडू तथा आंध्र प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं सिनेमैटोग्राफी मंत्री कंदुला दुर्गेश की मौजूदगी में हुआ। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को भी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना था, लेकिन वे किन्हीं कारणों से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके।

राजस्थान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह राष्ट्रीय मंच?

राजस्थान पर्यटन के लिए IATO का यह सम्मेलन बड़े बिजनेस नेटवर्किंग और इनबाउंड टूरिज्म प्रमोशन का अवसर लेकर आया है। देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को भारत लाने वाले टूर ऑपरेटर्स यहां मौजूद हैं।

राजस्थान पर्यटन विभाग इस मंच पर राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत, लोक संस्कृति, महल-किले, वाइल्डलाइफ, आध्यात्मिक स्थलों और विविध पर्यटन अनुभवों को प्रमोट कर रहा है।

मानवीय दृष्टिकोण से देखें तो पर्यटन केवल घूमने का माध्यम नहीं है। इसके साथ स्थानीय रोजगार, हस्तशिल्प, लोक कलाकारों, होटल व्यवसाय, परिवहन, गाइड, छोटे दुकानदारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आजीविका भी जुड़ी होती है। ऐसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच राजस्थान के इन स्थानीय अनुभवों को बड़े पर्यटन बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राजस्थान की कोशिश—पर्यटक आएं तो ज्यादा समय रुकें

राजस्थान के लिए अब चुनौती केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यटकों के ठहराव की अवधि और पर्यटन से होने वाले स्थानीय आर्थिक लाभ को बढ़ाना भी है। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और जैसलमेर जैसे पारंपरिक पर्यटन स्थलों के साथ ग्रामीण पर्यटन, वाइल्डलाइफ, धार्मिक पर्यटन, हेरिटेज होटल, वेडिंग टूरिज्म और ऑफबीट डेस्टिनेशन को अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स के सामने रखने से राज्य को नए पर्यटक बाजार मिल सकते हैं।

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11-12 सितंबर को Tourism Mart बनेगा बड़ा आकर्षण

सम्मेलन के दौरान 11 और 12 सितंबर को इंडियन टूरिज्म फेयर/ट्रैवल मार्ट आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर के पर्यटन विभाग, टूर ऑपरेटर्स, होटल उद्योग और अन्य हितधारक अपने-अपने पर्यटन उत्पादों और डेस्टिनेशन को प्रदर्शित कर रहे हैं।

यह मार्ट पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को सीधे संपर्क, बिजनेस मीटिंग और नए पर्यटन पैकेज तैयार करने का अवसर दे रहा है।राजस्थान के लिए यह मंच खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां मौजूद टूर ऑपरेटर्स अपने विदेशी और घरेलू ग्राहकों के लिए राजस्थान के नए अनुभवों को अपने पैकेज में शामिल कर सकते हैं।

दौड़ से लेकर टैलेंट शो तक, सम्मेलन में पर्यटन के साथ मनोरंजन भी

IATO सम्मेलन में केवल गंभीर बिजनेस सेशन और बैठकों तक कार्यक्रम सीमित नहीं है। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों को आपस में जोड़ने और सामाजिक संवाद बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। इनमें ‘IATO Run for Responsible Tourism’, ‘IATO’s Got Talent’ कराओके सिंगिंग प्रतियोगिता और विभिन्न सांस्कृतिक संध्याएं प्रमुख हैं।

इन कार्यक्रमों के जरिए पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच नेटवर्किंग के साथ जिम्मेदार और टिकाऊ पर्यटन का संदेश भी दिया जा रहा है।

13 सितंबर को प्रतिनिधि देखेंगे आंध्र प्रदेश के अनछुए पर्यटन स्थल

सम्मेलन के बाद प्रतिनिधियों के लिए 13 सितंबर को विशेष FAM (Familiarization) Tours आयोजित किए जाएंगे। इनमें विशाखापत्तनम सिटी टूर, बोज्जनकोंडा और शक्तिपीठों के गाइडेड टूर शामिल हैं। इसका उद्देश्य पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों को आंध्र प्रदेश के ऐसे स्थलों से परिचित कराना है, जिन्हें अभी देश और दुनिया के बड़े पर्यटन बाजार में अपेक्षाकृत कम पहचान मिली है। यही रणनीति राजस्थान के लिए भी महत्वपूर्ण है—पर्यटन की मुख्य धारा में नए और कम चर्चित डेस्टिनेशन को शामिल करना।

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आंध्र प्रदेश में पर्यटन निवेश को मिल रही नई रफ्तार

IATO के राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी आंध्र प्रदेश के लिए भी पर्यटन क्षेत्र में अपनी संभावनाओं को प्रदर्शित करने का बड़ा अवसर है। सरकार की ओर से विशाखापत्तनम में ₹5,529 करोड़ के 16 पर्यटन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है। इससे पर्यटन के साथ होटल, परिवहन, मनोरंजन और स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। स्थानीय टूर ऑपरेटर्स को IATO से जोड़ने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने 31 दिसंबर 2026 तक ₹10,000 की IATO मेंबरशिप फीस माफ करने का निर्णय भी लिया है।

2027 के गोदावरी पुष्करालु पर भी नजर

आंध्र प्रदेश सरकार वर्ष 2027 में होने वाले गोदावरी पुष्करालु को बड़े पैमाने पर आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसे कुंभ मेले की तर्ज पर व्यापक धार्मिक और पर्यटन आयोजन के रूप में विकसित करने की योजना है। ऐसे आयोजनों के जरिए धार्मिक पर्यटन के साथ होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार को भी आर्थिक फायदा पहुंच सकता है।

भारत को ‘नेक्स्ट टूरिज्म ऑपर्च्युनिटी’ बनाने की दिशा में बड़ा मंच

IATO का यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अपने पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत के अलग-अलग राज्यों की अपनी विशिष्ट पर्यटन पहचान है। राजस्थान के पास किले और महल, रेगिस्तान और लोक संस्कृति, आंध्र प्रदेश के पास समुद्र तट और धार्मिक पर्यटन, तो दूसरे राज्यों के पास अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता है।

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ऐसे में IATO सम्मेलन का मूल संदेश यही है कि भारत की पर्यटन विविधता को एक मजबूत वैश्विक पर्यटन उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया जाए। राजस्थान के लिए यह मंच इस मायने में महत्वपूर्ण है कि विदेशी पर्यटक जब भारत की यात्रा की योजना बनाते हैं, तो राजस्थान को केवल एक ऐतिहासिक डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि अनुभवों से भरे संपूर्ण पर्यटन प्रदेश के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

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