
दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला हॉस्टल की इमारत गिरी, एक छात्र की मौत: मलबे में कई युवक फंसे, बेसमेंट खुदाई पर उठे सवाल
सत्य निकेतन में पांच मंजिला हॉस्टल/पीजी गिरने से हड़कंप
अभी तक एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की जानकारी
हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ।
मौके पर 17 एंबुलेंस तैनात किए जाने की जानकारी
AIIMS ट्रॉमा सेंटर में घायलों को भर्ती कराया गया
स्थानीय लोगों और बचाव टीमों ने मिलकर कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला
सत्य निकेतन DU साउथ कैंपस के पास प्रमुख छात्र इलाका
नवीन सक्सेना
नई दिल्ली, dusrikhabar.com। दिल्ली के प्रमुख छात्र इलाके सत्य निकेतन में रविवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक पांच मंजिला हॉस्टल अचानक भरभराकर ढह गया। हादसे के वक्त इमारत में छात्र मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में एक छात्र की मौत और कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, राहत एवं बचाव अभियान के दौरान मलबे में फंसे एक युवक के अपने दोस्त को फोन कर “मुझे बचा लो” कहने की बात सामने आई, जिसने हादसे की भयावहता को और बढ़ा दिया।
हादसे के बाद मौके पर फायर ब्रिगेड, आपदा राहत दल, एंबुलेंस और अन्य बचाव टीमें पहुंचीं। मलबे में छात्रों के फंसे होने की आशंका के चलते देर तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा।
दोपहर करीब 1:30 बजे भरभराकर गिरा हॉस्टल
जानकारी के मुताबिक घटना रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुई। सत्य निकेतन में जिस इमारत में हॉस्टल/पीजी संचालित हो रहा था, उसके अचानक गिरने से आसपास मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया। कुछ लोग हथौड़ों और दूसरे साधनों से मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों को तलाशने में जुट गए। हादसे में कुछ वाहन भी मलबे के नीचे दब गए।
मलबे में दबे युवक ने दोस्त को किया फोन
हादसे के बाद मौके पर मौजूद एक युवक ने बताया कि उसका दोस्त मलबे में दबा हुआ है। वह बार-बार फोन कर उसे बचाने की गुहार लगा रहा था। इस जानकारी के बाद बचाव दल ने मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए अभियान तेज किया। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, हालांकि उस समय अंदर फंसे लोगों की सही संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी थी।
रेस्क्यू में जुटीं कई टीमें, एंबुलेंस भी तैनात
CATS के नोडल अधिकारी बलराज सिंह के अनुसार, शुरुआती कार्रवाई में कई लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। मौके पर 17 एंबुलेंस तैनात किए जाने की जानकारी दी गई। उन्होंने आशंका जताई कि हादसे में 25 से 30 लोग प्रभावित हो सकते हैं, हालांकि अंतिम आंकड़ा राहत एवं बचाव अभियान पूरा होने और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा।
AIIMS ट्रॉमा सेंटर से जुड़ी शुरुआती जानकारी में चार मरीजों के पहुंचने की बात सामने आई। इनमें घायलों के अलावा एक बचावकर्मी और एक मृत व्यक्ति के अस्पताल पहुंचने की जानकारी दी गई।
नोट: हादसे के शुरुआती घंटों में अलग-अलग एजेंसियों और प्रत्यक्षदर्शियों की ओर से घायलों व रेस्क्यू किए गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। अंतिम आंकड़े आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट माने जाने चाहिए।
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बेसमेंट में खुदाई को लेकर उठे गंभीर सवाल
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल इमारत के बेसमेंट में चल रही कथित खुदाई को लेकर उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के समय बिल्डिंग के नीचे बेसमेंट बनाने के लिए खुदाई का काम चल रहा था।
विशेषज्ञ जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन प्रारंभिक तौर पर नींव के आसपास खुदाई, कमजोर पिलर या निर्माण के दौरान ढांचे में बदलाव जैसे पहलुओं की जांच जरूरी मानी जा रही है।
हादसे की संभावित वजहों पर नजर
- बेसमेंट के लिए खुदाई: नींव के आसपास खुदाई से इमारत की स्थिरता प्रभावित हुई हो सकती है।
- कमजोर पिलर: यदि पिलर पहले से कमजोर थे तो वे भवन का भार संभालने में असफल हो सकते हैं।
- निर्माण के दौरान बदलाव: बेसमेंट या अन्य निर्माण के दौरान नींव और स्ट्रक्चर में बदलाव किए जाने की भी जांच हो सकती है।
- पहले से कमजोर ढांचा: इमारत की संरचनात्मक मजबूती पहले से कम होने की स्थिति में निर्माण कार्य ने जोखिम बढ़ाया हो सकता है।
हालांकि ये फिलहाल संभावित कारण हैं, हादसे की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगी।
सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में रहते हैं छात्र
सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित प्रमुख छात्र क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी पीजी और हॉस्टल में रहते हैं। आसपास वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज जैसे शिक्षण संस्थान हैं।
यही वजह है कि इलाके में दिनभर छात्रों की आवाजाही रहती है। ऐसे में किसी हॉस्टल के ढहने की घटना ने छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी।
स्थानीय लोगों ने भी संभाला मोर्चा
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग भी बचाव अभियान में शामिल हो गए। एक स्थानीय निवासी के मुताबिक करीब 6 से 8 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद मिली, जबकि कुछ अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई।
DUSU अध्यक्ष आर्यन मान ने भी दावा किया कि 10 से 15 छात्रों को बचाया गया है और कुछ लोग अभी भी अंदर फंसे हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि राहत कार्य के लिए बचाव टीमें मौके पर पहुंच रही हैं।
एक और इमारत को लेकर भी चिंता
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गिरी हुई इमारत के पास स्थित एक अन्य भवन की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई। एहतियात के तौर पर वहां मौजूद लोगों को बाहर निकाला गया।
इससे इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई। प्रशासन और राहत दलों के लिए चुनौती यह भी रही कि मलबा हटाते समय आसपास की संरचनाओं को सुरक्षित रखा जाए।
हादसे की खबर मिलते ही अमित शाह ने कार्यक्रम रोका
हादसे की सूचना मिलने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जो गोवा दौरे पर थे, ने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। उन्होंने दिल्ली में हुई घटना पर दुख जताया।
वहीं, भाजपा नेता कैलाश गहलोत ने कहा कि दमकल और आपदा विभाग की टीमें मौके पर आवश्यक कदम उठा रही हैं तथा इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना प्राथमिकता है।
अब जांच में सामने आएगा हादसे का असली कारण
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि पांच मंजिला इमारत आखिर अचानक क्यों ढही? क्या बेसमेंट की खुदाई से नींव कमजोर हुई, क्या भवन के पिलर पहले से कमजोर थे या निर्माण में नियमों की अनदेखी हुई—इन सवालों के जवाब तकनीकी जांच और प्रशासनिक पड़ताल के बाद ही सामने आएंगे।
इस हादसे ने दिल्ली के छात्र इलाकों में संचालित पीजी और हॉस्टलों की संरचनात्मक सुरक्षा, निर्माण मानकों और बेसमेंट निर्माण के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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