
गीतांजली हॉस्पिटल उदयपुर में जटिल ब्रेन और स्कल बेस रोगों के इलाज में मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच…
स्कल बेस की जटिल बीमारियों से जूझते मरीजों के लिए टीमवर्क बना भरोसे की ताकत
न्यूरोसर्जरी और ENT विशेषज्ञों का संयुक्त प्रयास
जरूरत के अनुसार एंडोस्कोपिक एंडोनासल सर्जरी जैसी तकनीकों का उपयोग
न्यूरोएनेस्थीसिया टीम की लगातार निगरानी और पेरीऑपरेटिव केयर में भूमिका
न्यूरोलॉजी, न्यूरोरैडियोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ भी उपचार योजना में शामिल
-संदीप बहल-
उदयपुर, dusrikhabar.com। जब बीमारी मस्तिष्क के उन हिस्सों के करीब हो, जहां छोटी-सी चूक भी नसों, रक्त वाहिकाओं या हार्मोन नियंत्रित करने वाली संरचनाओं को प्रभावित कर सकती है, तब इलाज सिर्फ एक विशेषज्ञ की जिम्मेदारी नहीं रह जाता। ऐसे मरीजों के लिए सटीक जांच, विशेषज्ञों का अनुभव, आधुनिक तकनीक और ऑपरेशन के बाद लगातार निगरानी एक साथ काम करती है। गीतांजली हॉस्पिटल, उदयपुर में जटिल स्कल बेस और ब्रेन से जुड़ी बीमारियों के प्रबंधन में इसी टीम आधारित चिकित्सा व्यवस्था को अपनाया जा रहा है।
हॉस्पिटल में न्यूरोसर्जरी, न्यूरोलॉजी, ENT, न्यूरोएनेस्थीसिया, न्यूरोरैडियोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी के विशेषज्ञ मिलकर मरीज की स्थिति का मूल्यांकन करते हैं और बीमारी की प्रकृति के अनुसार उपचार की रणनीति तैयार करते हैं।

गीतांजली हॉस्पिटल उदयपुर में जटिल ब्रेन और स्कल बेस रोगों के इलाज
जहां सर्जरी में विशेषज्ञता के साथ तालमेल भी जरूरी
स्कल बेस मस्तिष्क के आधार का वह क्षेत्र है, जिसके आसपास कई महत्वपूर्ण नसें और रक्त वाहिकाएं मौजूद होती हैं। इसलिए यहां होने वाली सर्जरी में सटीक प्लानिंग और विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
गीतांजली हॉस्पिटल में न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. गोविंद मंगल और डॉ. गौरव गुप्ता, ENT विभाग की डॉ. अनामिका सहित न्यूरोएनेस्थीसिया विशेषज्ञों और नर्सिंग टीम ने जटिल मामलों के प्रबंधन में भूमिका निभाई है।
चयनित मरीजों में एंडोस्कोपिक एंडोनासल सर्जरी जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इसमें नाक के प्राकृतिक मार्ग से स्कल बेस के कुछ हिस्सों तक पहुंच बनाई जाती है। इस तरह की प्रक्रिया में मरीज की स्थिति के अनुरूप सावधानीपूर्वक योजना और अनुभवी टीम की आवश्यकता होती है।
न्यूरोएनेस्थीसिया से लेकर नर्सिंग तक हर कड़ी महत्वपूर्ण
जटिल न्यूरोसर्जरी में सर्जन के साथ न्यूरोएनेस्थीसिया टीम भी अहम भूमिका निभाती है। ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया का प्रबंधन, महत्वपूर्ण शारीरिक मानकों की निगरानी और पेरीऑपरेटिव केयर इसी टीम की जिम्मेदारी का हिस्सा होते हैं।
वहीं, नर्सिंग स्टाफ मरीज की देखभाल की लगातार कड़ी बना रहता है। ऑपरेशन से पहले तैयारी, सर्जरी के दौरान समन्वय और ऑपरेशन के बाद रिकवरी की निगरानी तक नर्सिंग टीम चिकित्सकीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
सर्जरी के बाद मरीज के वाइटल पैरामीटर्स, न्यूरोलॉजिकल स्थिति, दवाओं और रिकवरी पर लगातार नजर रखी जाती है। किसी बदलाव की स्थिति में चिकित्सकों के साथ तत्काल समन्वय किया जाता है।

हर मरीज के लिए अलग उपचार रणनीति
स्कल बेस और ब्रेन ट्यूमर के मामलों में सिर्फ बीमारी का पता लगाना पर्याप्त नहीं होता। डॉक्टर बीमारी के आकार, स्थान और आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं से उसके संबंध का भी आकलन करते हैं। आवश्यकता के अनुसार न्यूरोलॉजिकल और हार्मोनल स्थिति की भी जांच की जाती है।
इस पूरी प्रक्रिया में न्यूरोरैडियोलॉजी विशेषज्ञ इमेजिंग में सहयोग करते हैं, जबकि न्यूरोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ संबंधित चिकित्सकीय पहलुओं का मूल्यांकन करते हैं।
इस प्रकार निदान से लेकर इमेजिंग, उपचार योजना, सर्जरी, पेरीऑपरेटिव मैनेजमेंट और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर तक कई विशेषज्ञ एक टीम के रूप में काम करते हैं। यही समन्वित प्रयास जटिल मरीजों को अधिक व्यवस्थित और व्यापक चिकित्सा देखभाल देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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