
भूमिगत खनन में हाइड्रोजन फ्यूल उपयोग करने वाली भारत की पहली कंपनी बनने की दिशा में हिंदुस्तान जिंक की बड़ी पहल…
भारत की पहली हाइड्रोजन आधारित भूमिगत खनन परियोजना की तैयारी
खनन क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में हिंदुस्तान जिंक की बड़ी पहल
एडवांटेक और एरो ईगल के साथ हिंदुस्तान जिंक का एमओयू
ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, स्टोरेज और सप्लाई सिस्टम पर होगा अध्ययन
सस्टेनेबल माइनिंग के लिए नई तकनीकों को अपनाने पर फोकस
माही राठौड़,
उदयपुर,dusrikhabar.com। भारत के खनन क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Hindustan Zinc Limited ने एडवांटेक एसोसिएट्स एलएलपी और एरो ईगल ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत कंपनी अपने खनन संचालन में ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन करेगी।
हिंदुस्तान जिंक भूमिगत खनन में हाइड्रोजन फ्यूल के उपयोग की दिशा में काम करने वाली भारत की पहली कंपनी बनने की तैयारी कर रही है, जो उसके 2050 या उससे पहले नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
खनन क्षेत्र में हाइड्रोजन फ्यूल अपनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल
उदयपुर में 22 जून 2026 को हुए इस समझौते के तहत हिंदुस्तान जिंक अपने संचालन में ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य क्लीन एनर्जी तकनीकों की व्यवहार्यता का मूल्यांकन करेगी। कंपनी का उद्देश्य खनन कार्यों को कम-कार्बन, ऊर्जा-कुशल और भविष्य के लिए तैयार बनाना है।
खनन और भारी उद्योग ऐसे क्षेत्र हैं जहां कार्बन उत्सर्जन को कम करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ईंधन उद्योगों को डीकार्बोनाइज करने का एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहे हैं।
क्या है हाइड्रोजन फ्यूल और इसके फायदे?
दुनियाभर में बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए अब हाइड्रोजन फ्यूल को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा माना जा रहा है। हाइड्रोजन एक ऐसा ईंधन है, जिसे जलाने या फ्यूल सेल में उपयोग करने पर कार्बन डाइऑक्साइड की जगह मुख्य रूप से पानी बनता है। इसी कारण कई देश इसे ग्रीन एनर्जी के रूप में बढ़ावा दे रहे हैं।
हाइड्रोजन फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बेहद कम होता है। यदि हाइड्रोजन का उत्पादन सौर या पवन ऊर्जा से किया जाए, तो यह पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल माना जाता है। इसके उपयोग से पेट्रोल और डीजल की खपत घट सकती है, जिससे तेल आयात पर निर्भरता भी कम होगी। भारी वाहन, ट्रेन और उद्योगों में इसका उपयोग भविष्य में बड़ी ऊर्जा क्रांति ला सकता है।
भूमिगत खनन और भारी मशीनरी में होगा हाइड्रोजन उपयोग का अध्ययन
एमओयू के तहत ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण (स्टोरेज), आपूर्ति (सप्लाई) और हाइड्रोजन से संचालित मशीनों की तकनीकी संभावनाओं की जांच की जाएगी।
इसके अलावा निम्न क्षेत्रों में भी अध्ययन किया जाएगा—
- भूमिगत खनन उपकरण
- भारी मशीनरी
- औद्योगिक वाहन
- जेनरेटर
- अन्य परिचालन उपकरण
- एच2 एवं आईसीई (Hydrogen Internal Combustion Engine) तकनीक
- फ्यूल सेल आधारित समाधान
इस पहल का उद्देश्य भविष्य में खनन उद्योग को अधिक पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल बनाना है।
चरणबद्ध तरीके से लागू होगा प्रोजेक्ट
हाइड्रोजन फ्यूल परियोजना को कई चरणों में लागू किया जाएगा।
पहले चरण में:
- तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन
- सुरक्षा मूल्यांकन
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन
- लागत विश्लेषण
किया जाएगा।
अध्ययन के सकारात्मक परिणाम मिलने पर दूसरे चरण में बड़े स्तर पर हाइड्रोजन आधारित तकनीकों को लागू करने की योजना बनाई जाएगी। इसमें भारी मशीनरी, परिवहन वाहन, जेनरेटर और अन्य उपकरणों को शामिल किया जा सकता है।
सस्टेनेबल माइनिंग के लिए नई तकनीकों पर फोकस
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ Arun Misra ने कहा कि कंपनी सस्टेनेबल माइनिंग को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई तकनीकों पर काम कर रही है।
उनके अनुसार, हाइड्रोजन आधारित समाधान भारी मशीनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद करेंगे और क्लीन एनर्जी के उपयोग का नया मार्ग खोलेंगे। यह साझेदारी कंपनी को भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए तैयार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ईएसजी रणनीति और नेट-जीरो लक्ष्य को मिलेगा बल
यह पहल हिंदुस्तान जिंक की ईएसजी (Environmental, Social and Governance) रणनीति के अनुरूप है, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा, जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन और कार्बन उत्सर्जन में कमी पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
कंपनी वर्तमान में अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा कर रही है और लगातार हरित तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
हिंदुस्तान जिंक ने वर्ष 2050 या उससे पहले नेट-जीरो बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हाइड्रोजन आधारित समाधान इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
दुनिया की सबसे सस्टेनेबल मेटल और माइनिंग कंपनी का दर्जा
वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक को लगातार तीसरे वर्ष एसएंडपी ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट 2025 में दुनिया की सबसे सस्टेनेबल मेटल और माइनिंग कंपनी के रूप में मान्यता मिली है। यह उपलब्धि कंपनी की पर्यावरणीय जिम्मेदारी, स्वच्छ ऊर्जा निवेश और टिकाऊ खनन मॉडल के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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