
दिल्ली,मुजफ्फरपुर के बाद अब लखनऊ में अग्निकांड, कोचिंग सेंटर में आग से 15 मासूम बच्चों की मौत…ताजा अपडेट, बड़ा खुलासा
लखनऊ कोचिंग अग्निकांड पर बड़ा खुलासा…
कोचिंग के 15 छात्रों की दम घुटने से दर्दनाक मौत
बायोमेट्रिक दरवाजे के ऑटो लॉक होने से बच्चे नहीं निकल पाए बिल्डिंग से बाहर
बाथरूम में छिपकर बचने की कोशिश भी नहीं आई काम
AC ब्लास्ट से भड़की आग ने मासूमों को लिया चपेट में
रामेश्ववरम इंजीनियरिंग कॉलेज के मालिक की है बिल्डिंग
बिल्डिंग में पार्टिशियन में प्लास्टिक के अधिक उपयोग से फैली आग
बेसमेंट में कैमिकल में आग ने निकले जहरीले धुंए से बड़ा हादसा
इमारत में नहीं था इमरजेंसी एग्जिट, छत के गेट पर लगा था ताला
राज्य सरकार का मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान
राजस्थान की राजधानी जयपुर के एसएमएस अस्पताल में आग से गई थी 8 जाने
आशीष,विजय श्रीवास्तव
लखनऊ/जयपुर, dusrikhabar.com। दिल्ली के होटल और बिहार के मुजफ्फपुर में हॉस्पिटल में आग के बाद अब उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में भीषण अग्निकांड में 15 मासूम कोचिंग स्टूडेंट्स की मौत हो गई। इस हादसे ने कोचिंग सेंटर में पढ़ने गए बच्चों के 15 परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों में अधिकांश छात्र थे, जो गेमिंग और एनिमेशन की पढ़ाई करने के लिए कोचिंग सेंटर आते थे।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग स्प्लिट एसी के कंप्रेसर में हुए धमाके के बाद भड़की। इमारत में केवल एक ही एंट्री और एग्जिट पॉइंट होने, बायोमेट्रिक गेट के लॉक हो जाने और इमरजेंसी एग्जिट नहीं होने के कारण कई छात्र अंदर फंस गए। जान बचाने के लिए कुछ छात्र बाथरूम और स्टोर रूम में छिप गए, लेकिन धुएं और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। इस हादसे ने एक बार फिर व्यावसायिक भवनों में फायर सेफ्टी व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
योगी सरकार ने गठित की जांच के लिए SIT, मृतक परिजनों को मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए एसआईटी से जांच के निर्दैश दिए और तुरंत प्रभाव से मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। साथ ही राज्य सरकार ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। साथ ही घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश भी दिए गए हैं।
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लंच के बाद क्लास में बैठे थे छात्र, अचानक मची चीख-पुकार
हादसे के समय कोचिंग सेंटर में करीब 30 छात्र और स्टाफ मौजूद थे। सभी छात्र लंच ब्रेक के बाद अपनी-अपनी कक्षाओं में लौट चुके थे। तभी अचानक इमारत में धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और कुछ ही पलों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि छात्रों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते पूरी इमारत धुएं से भर गई। अंदर मौजूद छात्र बाहर निकलने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन उन्हें सुरक्षित रास्ता नहीं मिला।
कुछ छात्र इंटरनेट और डीटीएच के तारों तथा पाइपों के सहारे बाहर निकलने में सफल रहे। वहीं कुछ छात्रों ने जान बचाने के लिए दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी। इसके बावजूद 15 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
एक ही रास्ता बना मौत का कारण, बायोमेट्रिक गेट ने बढ़ाई मुश्किल
जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा था, वहां प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता था। यही रास्ता ऊपर जाने और नीचे आने के लिए भी इस्तेमाल होता था। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि मुख्य गेट ऑटोमैटिक बायोमेट्रिक सिस्टम से संचालित होता था। यह गेट थंब इम्प्रेशन के आधार पर खुलता और बंद होता था। घायल छात्रों के दोस्तों ने बताया कि आग लगने के दौरान बायोमेट्रिक सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। इससे गेट लॉक हो गया और कई छात्र समय रहते बाहर नहीं निकल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इमारत में वैकल्पिक इमरजेंसी एग्जिट होता तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
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छत का रास्ता भी था बंद, इमरजेंसी एग्जिट का कोई इंतजाम नहीं
जांच अधिकारियों के अनुसार इमारत में न केवल एंट्री और एग्जिट का एक ही रास्ता था, बल्कि छत पर जाने वाली सीढ़ी का दरवाजा भी बंद था। आग और धुएं के बीच फंसे छात्र यदि छत तक पहुंच जाते तो उन्हें सुरक्षित स्थान मिल सकता था, लेकिन बंद दरवाजे ने यह विकल्प भी समाप्त कर दिया। फायर सेफ्टी टीम के मुताबिक, इमारत में आपातकालीन निकासी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में जैसे-जैसे धुआं फैलता गया, छात्रों की स्थिति गंभीर होती चली गई।
AC के कंप्रेसर में धमाका बना हादसे की शुरुआती वजह
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार आग की शुरुआत इमारत में लगे स्प्लिट एसी के कंप्रेसर में हुए विस्फोट से हुई। बताया जा रहा है कि धमाके के बाद निकली चिंगारियां आसपास रखे फर्नीचर, वायरिंग और अन्य ज्वलनशील सामग्री तक पहुंच गईं। इसके बाद आग तेजी से फैल गई और कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत उसकी चपेट में आ गई। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि शॉर्ट सर्किट की संभावना को भी खारिज नहीं किया जा सकता। आग लगने के वास्तविक कारणों का पता फोरेंसिक और तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल जांच एजेंसियां हर संभावित पहलू की गहन जांच कर रही हैं।
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बाथरूम और स्टोर रूम में छिपे छात्र, लेकिन नहीं बच सकी जान
हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि कई छात्रों ने जान बचाने के लिए खुद को बाथरूम और स्टोर रूम में बंद कर लिया। फायरकर्मियों के अनुसार आग से ज्यादा नुकसान धुएं ने पहुंचाया। कुछ ही मिनटों में पूरा भवन जहरीले धुएं से भर गया। धुएं से बचने के लिए कई छात्र बाथरूमों में छिप गए, जबकि कुछ स्टोर रूम में चले गए। उन्हें उम्मीद थी कि बंद कमरों में वे सुरक्षित रहेंगे, लेकिन घने धुएं और ऑक्सीजन की कमी ने उनकी हालत बिगाड़ दी।
जब रेस्क्यू टीम अंदर पहुंची तो कई छात्र बेहोशी की हालत में मिले। कई लोगों की मौत दम घुटने के कारण हुई।
धुएं ने छीना सांस लेने का मौका
फायर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के तुरंत बाद इमारत के निचले हिस्से में धुआं भरना शुरू हो गया था। कुछ ही समय में धुआं ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया। इसके कारण छात्रों को बाहर निकलने का रास्ता दिखाई देना बंद हो गया। अफरा-तफरी के माहौल में छात्र सुरक्षित स्थान खोजने लगे, लेकिन जहरीले धुएं ने उन्हें अधिक समय तक जीवित रहने का मौका नहीं दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश अग्निकांडों में मौतें आग से नहीं बल्कि धुएं और दम घुटने से होती हैं। इस हादसे में भी यही स्थिति सामने आई।
8 मिनट में पहुंची फायर ब्रिगेड, फिर भी नहीं बच सकीं जानें
फायर विभाग के अनुसार दोपहर 2:27 बजे कंट्रोल रूम को आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के महज 8 मिनट बाद पहली फायर ब्रिगेड की गाड़ी घटनास्थल पर पहुंच गई। इसके बाद लगातार अतिरिक्त फायर टेंडर, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को भी मौके पर भेजा गया। राहत एवं बचाव कार्य कई घंटों तक जारी रहा। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने के साथ-साथ इमारत में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। इसके बावजूद कई छात्र धुएं और आग के बीच फंस गए, जिन्हें समय रहते बचाया नहीं जा सका।
रामेश्वरम इंजीनियरिंग कॉलेज के मालिक की जमीन पर बनी थी इमारत
जिस भवन में यह कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा था, वह जमीन वीरेंद्र शुक्ला की बताई जा रही है। वीरेंद्र शुक्ला रामेश्वरम इंजीनियरिंग कॉलेज के मालिक हैं। यह कॉलेज रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (RITM) के नाम से जाना जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी। संस्थान डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (AKTU) से संबद्ध है और उसे AICTE की मान्यता प्राप्त है। जांच में यह भी सामने आया है कि इमारत का नक्शा धीरेंद्र और सुरेंद्र शुक्ला के नाम पर पास हुआ था। शुरुआत में इसे आवासीय भवन के रूप में मंजूरी मिली थी, लेकिन वर्ष 2014 में इसे व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दे दी गई। बाद में यहां ऑनलाइन एनिमेशन और गेमिंग कोचिंग सेंटर संचालित किया जाने लगा।
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गर्मी की छुट्टियों में बढ़ी थी छात्रों की संख्या
गर्मी की छुट्टियों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों ने कोचिंग सेंटर में दाखिला लिया हुआ था। गेमिंग, एनीमेशन और डिजिटल स्किल्स सीखने के लिए दूर-दूर से छात्र यहां आते थे। हादसे के समय भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी कक्षाओं में मौजूद थे। इसी वजह से हादसे का प्रभाव और अधिक गंभीर रहा।
प्रशासनिक अधिकारियों और इंजीनियरों पर भी गिरेगी गाज
हादसे के बाद प्रशासन ने भवन निर्माण, मानचित्र स्वीकृति और फायर सेफ्टी मानकों की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार 16 लोगों की सूची तैयार की गई है, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। इनमें तत्कालीन अधिकारी, इंजीनियर और संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति शामिल बताए जा रहे हैं। यदि जांच में लापरवाही या नियमों की अनदेखी साबित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
फायर सेफ्टी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
लखनऊ कोचिंग अग्निकांड ने एक बार फिर देशभर में चल रहे कोचिंग सेंटरों, व्यावसायिक इमारतों और शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही एंट्री-एग्जिट, बंद छत का रास्ता, बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम और इमरजेंसी निकासी के अभाव जैसी कमियां बताती हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी घातक साबित हो सकती है। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि उन खामियों का परिणाम माना जा रहा है, जिनकी समय रहते पहचान और सुधार किया जाना चाहिए था।
राजस्थान के सबसे बड़े SMS अस्पताल में आग से गई थी 8 लोगों की जान
आपको बता दें कि करीब आठ महीने पहले राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के ट्रोमा सेंटर से लगी आग में भी 8 मरीजों ने अपनी जान गवाई थी। जांच हुई ट्रोमा सेंटर के इंचार्ज और अस्पताल अधीक्षक को पद से हटाकर सरकार ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रूपए देने का ऐलान किया था।
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