दिल्ली में होटल के बाद, मुजफ्फरपुर के अस्पताल में अग्निकांड, 3 लोगों की मौत, दोनों प्रकरणों में प्रशासन की लापरवाही उजागर…!

दिल्ली में होटल के बाद, मुजफ्फरपुर के अस्पताल में अग्निकांड, 3 लोगों की मौत, दोनों प्रकरणों में प्रशासन की लापरवाही उजागर…!

मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड, तीन जिंदगियां हुई स्वाह…

अस्पताल में ICU में लगी भीषण आग, कई जिंदगी मौत से लड़ रहीं जंग

दिल्ली के बाद अस्पताल में भी प्रशासन की लापरवाही उजागर

फायर एनओसी बिना मानक पूरा किए नहीं मिलती तो हादसों में नहीं जाती जान 

महावीर सिंह,

पटना/जयपुर, dusrikhabar.com। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद अस्पताल में गुरुवार तड़के हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया। अस्पताल के आईसीयू में अचानक आग लगने से धुएं का गुबार फैल गया, जिससे गंभीर हालत में भर्ती मरीजों की जान पर बन आई। अब तक तीन मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य मरीजों को दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है।

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ICU में धुएं ने छीनी सांसें, कई मरीजों की हालत गंभीर

घटना गुरुवार सुबह करीब 3 बजे की बताई जा रही है। मुजफ्फरपुर के सबसे बड़े निजी अस्पतालों में गिने जाने वाले प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में अचानक आग लग गई। आईसीयू में मौजूद मरीज पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। आग के बाद पूरे वार्ड में तेजी से धुआं भर गया, जिससे मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी।

अग्निशमन विभाग के अनुसार आईसीयू में कुल 15 बेड थे। रेस्क्यू अभियान के दौरान 15 मरीजों को बाहर निकाला गया, जिनमें से तीन की मौत हो गई जबकि अन्य का इलाज जारी है।

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शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच शुरू

प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि आईसीयू में लगी किसी मशीन या विद्युत उपकरण में शॉर्ट सर्किट होने से आग भड़की। आईसीयू में ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम, हार्ट मॉनिटर और अन्य संवेदनशील मशीनें लगी हुई थीं।

जिला प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम अब आग लगने के सटीक कारणों की जांच कर रही है। हादसे के बाद अस्पताल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम और सुरक्षा इंतजामों की भी समीक्षा की जा रही है।

छह दमकल गाड़ियों ने पाया आग पर काबू

फायर ऑफिसर के मुताबिक सुबह करीब 3:55 बजे सूचना मिलते ही छह दमकल वाहन मौके पर भेजे गए। दमकल कर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से मरीजों को बाहर निकाला गया तथा आग को फैलने से रोका गया।

प्रशासन का कहना है कि समय पर राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं होता तो जनहानि का आंकड़ा और अधिक हो सकता था।

अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल

हादसे के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं मिला।

सूत्रों के अनुसार जब लोग जवाब मांगने अस्पताल पहुंचे तो प्रबंधन की ओर से कोई सामने नहीं आया। इससे अस्पताल की आपदा प्रबंधन व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

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एक हादसा, कई सबक: अस्पतालों में फायर सेफ्टी की फिर खुली पोल

दिल्ली के होटल अग्निकांड के एक दिन बाद हुए इस हादसे ने स्वास्थ्य संस्थानों में फायर सेफ्टी मानकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों के आईसीयू, ऑक्सीजन यूनिट और विद्युत प्रणालियों की नियमित सुरक्षा जांच अनिवार्य होनी चाहिए।

मुजफ्फरपुर का यह हादसा केवल एक अस्पताल की त्रासदी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति पर गंभीर चेतावनी भी है। कई परिवार अपने प्रियजनों की जिंदगी बचाने अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन यह हादसा उनके लिए जीवनभर का दर्द बन गया।

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