मध्यप्रदेश के 28 हजार गांवों को मिलेगा नल से जल, पंचायतें करेंगी योजनाओं का संचालन

मध्यप्रदेश के 28 हजार गांवों को मिलेगा नल से जल, पंचायतें करेंगी योजनाओं का संचालन

जल जीवन मिशन के तहत पंचायतों को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी

तकनीकी सहयोग के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग तैनात करेगा एजेंसियां

पूरी व्यवस्था पर लगभग 900 करोड़ रुपये सालाना खर्च होने का अनुमान

78 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा पेयजल, 2027 तक 1.11 करोड़ का लक्ष्य

शीतल कुमार, (अक्षय)

उज्जैन,(dusrikhabar.com)। मध्यप्रदेश सरकार की यह नीति सिर्फ हर घर नल से जल पहुँचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि यह पेयजल सुविधा स्थायी, स्वच्छ और गुणवत्ता युक्त बनी रहे। अब राज्य के 28 हजार गांवों की एकल ग्राम नलजल योजनाओं का संचालन सीधे ग्राम पंचायतों के जिम्मे होगा, जिससे स्थानीय भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

स्थानीय स्तर पर जल आपूर्ति का नियंत्रण पंचायतों के हाथों में

प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता केवल हर घर तक नल से जल पहुंचाने की ही नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि पेयजल सुविधा आने वाले वर्षों तक सतत और गुणवत्तापूर्ण रूप में उपलब्ध हो। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत 28,000 गांवों में पेयजल आपूर्ति हेतु निर्मित एकल ग्राम योजनाओं का संचालन ग्राम पंचायतों को सौंपने का निर्णय लिया है।

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नल से जल मध्यप्रदेश

तकनीकी सहायता के लिए तीन साल तक एजेंसी तैनात करेगी सरकार

इन योजनाओं के सुचारु संचालन के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) की ओर से तीन वर्षों के लिए तकनीकी सहयोग हेतु एजेंसी तैनात की जाएगी। इस व्यवस्था पर लगभग ₹900 करोड़ का वार्षिक व्यय भार आएगा, जिसे राज्य सरकार वहन करेगी।

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यूपी मॉडल का अध्ययन कर लिया गया निर्णय

दरअसल, उत्तर प्रदेश में एकल ग्राम योजनाओं का संचालन पंचायतों द्वारा किया जा रहा है। इसी प्रणाली को मध्यप्रदेश में लागू करने का सैद्धांतिक निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में ग्रामीण नलजल योजना के संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नीति पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।

प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत जो योजनाएं तैयार हुई हैं, उनके संचालन और संधारण को लेकर लंबे समय से विचार विमर्श चल रहा था। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश थे कि इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ दीर्घावधि तक प्रदेशवासियों को मिले, इसके लिए जवाबदेही और भूमिका स्पष्ट की जाए।

अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन कर तैयार की गई संचालन नीति

इसी को ध्यान में रखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने अन्य राज्यों के प्रविधान (प्रैक्टिसेज़) का अध्ययन कराकर ग्रामीण नलजल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नीति का मसौदा तैयार किया। इसमें उल्लेख किया गया कि एकल ग्राम नलजल योजनाओं का संचालन संबंधित ग्राम पंचायतें करेंगी।

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छोटे-मोटे रखरखाव कार्यों की जिम्मेदारी भी पंचायतों को दी जाएगी, जबकि तकनीकी सहयोग विभाग द्वारा चयनित एजेंसी प्रदान करेगी। यह व्यवस्था प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों तक लागू रहेगी और परिणाम आधारित आगे बढ़ाने पर निर्णय लिया जाएगा।

मध्यप्रदेश के 28 हजार गांवों को नल से जल, पंचायतें चलाएंगे योजना

78.64 लाख परिवारों को मिल रहा नल से जल

विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने बताया कि अगस्त 2019 तक जहां प्रदेश के केवल 12.11 प्रतिशत, यानी 13.53 लाख ग्रामीण परिवारों को ही नल से जल मिल रहा था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 78.64 लाख से अधिक हो चुकी है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक 1.11 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से जल की सुविधा दी जाए। वर्तमान में समूह नलजल की 147 योजनाएं क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं, जिनमें से 52 योजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं और 95 प्रगति पर हैं।

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