
उदयपुर में पानी का संकट: RTDC की होटल कजरी टैंकरों के भरोसे, पर्यटन कारोबार पर बढ़ी चिंता…
झीलों की नगरी में पानी का संकट, फीकी पड़ रही पर्यटन की चमक; होटल इंडस्ट्री टैंकरों के भरोसे…!
भारत का पसंदीदा Holiday tourist destination पर पानी का संकट
पानी की कमी के चलते उदयपुर में घटी पर्यटकों की संख्या
RTDC के होटल और अन्य निजी होटलों में पर्यटकों की संख्या लगातार घट रही…!
पानी की किल्लत के चलते रोजाना 6 से 7 टैंकरों से हो रही पानी की जरूरत पूरी
सीजन में होटल के कमरों की मांग और बुकिंग में भी आई गिरावट
उदयपुर को 2025 में चुना गया था भारत का पसंदीदा होलिडे डेस्टिनेशन
Condé Nast Traveller Readers’ Travel Awards ने की थी इसकी घोषणा
अब पानी की कमी होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन से जुड़े रोजगारों के लिए बनी चुनौती
विजय श्रीवास्तव
उदयपुर, dusrikhabar.com। जिस उदयपुर की पहचान उसकी झीलों, महलों और खूबसूरत नजारों से है, जिस शहर को देश के पसंदीदा पर्यटन स्थलों में जगह मिलती रही है, उसी शहर में अब पानी की कमी पर्यटन की चमक फीकी करने लगी है। हालात ऐसे हैं कि शहर के कई हिस्सों में तीन दिन में एक बार पेयजल आपूर्ति हो रही है और जरूरत पूरी करने के लिए पानी के टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। इसका असर केवल आम लोगों के घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल, रेस्टोरेंट, रिजॉर्ट और पूरे पर्यटन उद्योग की चिंता भी बढ़ने लगी है।
झीलों की नगरी में झीलें ही पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहीं
उदयपुर की पहचान उसकी झीलों से है, लेकिन झीलों वाला शहर होने का अर्थ यह नहीं कि हर मौसम में पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस बार मानसून से जलाशयों को अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसके चलते झीलों के साथ कुओं, बावड़ियों और तालाबों के जलस्तर पर भी दबाव बढ़ा है।
शहर के कुछ हिस्सों में तीन दिन में एक बार पेयजल आपूर्ति होने और पानी के टैंकरों के सहारे जरूरत पूरी करने की स्थिति ने संकट की गंभीरता को सामने ला दिया है। ऐसे हालात में होटल और रेस्टोरेंट जैसे अधिक पानी की जरूरत वाले व्यवसायों के सामने चुनौती और बढ़ जाती है।
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पर्यटन उद्योग में पानी की मांग केवल मेहमानों के पीने तक सीमित नहीं होती। कमरों की सफाई, लिनेन धुलाई, रसोई, स्वच्छता और अन्य सेवाओं के लिए भी नियमित पानी चाहिए। यदि आपूर्ति अनिश्चित रहे, तो होटल संचालकों को वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर होना पड़ता है, जिससे खर्च और प्रबंधन दोनों प्रभावित होते हैं।
RTDC की होटल कजरी में भी पानी की किल्लत…!
इस संकट की तस्वीर राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) की उदयपुर स्थित होटल कजरी में भी दिखाई दे रही है। शहर के बीचोंबीच स्थित इस सरकारी होटल में दो बड़े बोरिंग होने के बावजूद पानी की जरूरत पूरी करने के लिए रोजाना 6 से 7 टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। होटल से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बोरिंग कुछ ही मिनट चलने के बाद जवाब दे देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पर्यटन सीजन में पानी की जरूरत का अनुमान होने के बावजूद समय रहते स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
होटल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी के अनुसार, मुख्यालय को समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन फिलहाल बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण समाधान की दिशा में काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। दूसरी ओर, होटल में पर्यटकों की आवक और कमरों की मांग में गिरावट की बात भी सामने आ रही है। यह स्थिति बताती है कि पानी का संकट अब केवल नागरिक सुविधा का मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यटन कारोबार, सरकारी होटल के संचालन और शहर की अर्थव्यवस्था से जुड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

दो बोरिंग, फिर भी हर दिन 6–7 टैंकरों की जरूरत
उदयपुर में पानी की किल्लत का एक अहम उदाहरण होटल कजरी में सामने आ रहा है। होटल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यहां दो-दो बोरिंग पहले से मौजूद हैं, लेकिन दोनों से जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पा रहा। स्थिति यह है कि बोरिंग चलाने पर 10 से 15 मिनट में ही पानी खत्म हो जाता है। इसके बाद होटल की दैनिक जरूरतें पूरी करने के लिए टैंकरों का सहारा लेना पड़ता है।
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होटल के लिए यह व्यवस्था केवल अतिरिक्त खर्च का मामला नहीं है। पानी की नियमित उपलब्धता मेहमानों की सुविधा, हाउसकीपिंग, बाथरूम, रसोई और होटल के रोजमर्रा के संचालन से सीधे जुड़ी है। ऐसे में टैंकरों पर लगातार निर्भरता संचालन को अधिक चुनौतीपूर्ण बना देती है।
होटल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि समस्या की जानकारी मुख्यालय तक पहुंचाई जा चुकी है। जरूरत बोरिंग की क्षमता और जलस्तर की तकनीकी जांच कराकर स्थायी समाधान निकालने की है। हालांकि, संबंधित अधिकारी के अनुसार, फिलहाल बजट की कमी के कारण जरूरी काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
यहां सवाल केवल इतना नहीं है कि बोरिंग में पानी क्यों नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि जब उपलब्ध स्रोत होटल की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे थे, तो समय रहते वैकल्पिक जल व्यवस्था और दीर्घकालिक समाधान पर काम क्यों नहीं हुआ? सूत्रों का कहना है कि यहां पर लोगों के निजी हितों के चलते इस तरह की भविष्य में होनी वाली परेशानियों को नजरअंदाज किया गया। हालांकि, इस मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी तय करने के लिए विभागीय रिकॉर्ड तथा प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष भी जरूरी होगा।
होटल में पर्यटकों की मांग घटी, कारोबार पर दबाव
होटल कजरी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस सीजन में पिछले साल के मुकाबले कमरों की मांग में गिरावट दर्ज की गई है। उपलब्ध जानकारी में होटल कजरी में करीब 450 कमरों की कमी का रिकॉर्ड दर्ज है। आपको बता दें कि विभागीय उदासीनता के चलते होटल कजरी के मुनाफे में रहने के पिछले आंकड़ों के बावजूद, उसकी देखरेख और जरूरी सुविधाओं पर खर्च नहीं हो पाना एक महत्वपूर्ण प्रबंधन संबंधी सवाल खड़ा करता है?
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यदि कमाई करने वाली सरकारी पर्यटन इकाई को बुनियादी जरूरत के लिए भी पर्याप्त बजट नहीं मिलता, तो उसकी परिचालन क्षमता और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
पर्यटक किसी होटल का चयन केवल किराये या लोकेशन के आधार पर नहीं करते। साफ-सफाई, भरोसेमंद पानी, सुविधाजनक ठहराव और बेहतर सेवा भी निर्णय में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए पानी की कमी की जानकारी सामने आने पर संभावित मेहमान दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, होटल कजरी में बुकिंग घटने का कितना हिस्सा पानी की समस्या से जुड़ा है, इसका आकलन वास्तविक बुकिंग आंकड़ों और पर्यटकों की प्रतिक्रिया से ही हो सकेगा।
पुरस्कारों से पहचान, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की चुनौती
उदयपुर की पहचान केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। झीलों, ऐतिहासिक महलों, विरासत वास्तुकला और शाही आतिथ्य के कारण यह देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। इस पहचान को कई प्रतिष्ठित पर्यटन पुरस्कारों में भी जगह मिली है।
- 2019: Condé Nast Traveller Readers’ Travel Awards में उदयपुर को भारत का पसंदीदा शहर और पसंदीदा अवकाश पर्यटन स्थल चुना गया था।
- 2024: इसी पुरस्कार के तहत उदयपुर भारत के पसंदीदा अवकाश पर्यटन स्थलों में दूसरे स्थान पर रहा।
- 2025: उदयपुर ने Condé Nast Traveller Readers’ Travel Awards में भारत के पसंदीदा अवकाश पर्यटन स्थल का शीर्ष स्थान हासिल किया। राजस्थान सरकार के पर्यटन संबंधी पोर्टल पर भी इस उपलब्धि का उल्लेख है।
ये उपलब्धियां उदयपुर की पर्यटन क्षमता और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी लोकप्रियता को दर्शाती हैं। लेकिन पर्यटन की यह प्रतिष्ठा तभी लंबे समय तक कायम रह सकती है, जब पर्यटकों को बुनियादी सुविधाएं भी लगातार मिलती रहें।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उदयपुर की पर्यटन पुरस्कारों में सफलता और उसके जल संकट को अलग-अलग तथ्यों के रूप में देखना चाहिए। पुरस्कार शहर की लोकप्रियता दर्शाते हैं, जबकि पानी की कमी वर्तमान बुनियादी ढांचे और संसाधन प्रबंधन की चुनौती है।
पर्यटन, होटल और स्थानीय रोजगार पर पड़ सकता है असर
उदयपुर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन के साथ सीमेंट और मार्बल उद्योग की भी अहम भूमिका है। पर्यटन में आने वाली सुस्ती का असर केवल होटल मालिकों तक सीमित नहीं रहता। टैक्सी चालकों, गाइडों, दुकानदारों, हस्तशिल्प कारोबारियों, रेस्टोरेंट कर्मचारियों और छोटे सेवा प्रदाताओं की कमाई भी पर्यटकों की आवाजाही से जुड़ी होती है।
यदि गर्मी, पानी की अनिश्चितता और सुविधाओं को लेकर आशंकाएं पर्यटकों के निर्णय को प्रभावित करती हैं, तो इसका असर पूरे स्थानीय कारोबार पर पड़ सकता है। हालांकि, पर्यटकों की आवक में कमी के पीछे पानी के संकट को एकमात्र कारण मानने के लिए अलग से पर्यटन और होटल ऑक्यूपेंसी के आंकड़ों की जरूरत होगी।
होटल कजरी का मामला इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि यह निजी क्षेत्र का नहीं, बल्कि राजस्थान पर्यटन विकास निगम का होटल है। ऐसे में इसकी समस्या पर्यटन विभाग और निगम के लिए भी एक कसौटी है कि वे अपनी इकाइयों में बुनियादी सुविधाओं की निरंतरता कैसे सुनिश्चित करते हैं।
अब टैंकरों से आगे का तलाशना होगा रास्ता…
उदयपुर के स्थानीय प्रशासन को अब टैंकरों से आगे निकलकर पानी की समस्या का स्थायी समाधान तलाशना चाहिए। शहर के ही एक वयोवृद्ध विश्लेषक ने कहा कि जयसमंद झील मीठे पानी का एक अच्छा विकल्प उदयपुर के लिए साबित हो सकता है प्रशासन और सरकार इस पर गौर करे तो उदयपुर में पेयजल संकट की समस्या का समाधान बन सकता है। पानी की कमी के समय वहां से पेयजल सप्लाई शहर के लिए जीवनधारा बन सकता है।
शहर के स्तर पर भी पर्यटन इकाइयों के लिए जल प्रबंधन की ऐसी योजना जरूरी है, जो संकट के समय केवल टैंकरों पर निर्भर न रहे। अन्य बड़ी झीलों से पेयजल लाइन, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण और पानी की खपत घटाने वाले उपायों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जा सकता है।
बहरहाल उदयपुर की असली चुनौती उसकी पर्यटन छवि को बनाए रखने के साथ उस छवि के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराना है। झीलों, महलों और पुरस्कारों से पर्यटक आकर्षित हो सकते हैं, लेकिन उनके अनुभव को बेहतर बनाने के लिए पानी जैसी बुनियादी जरूरतों का पूरा होना भी उतना ही जरूरी है। होटल कजरी की परेशानी इस बात का संकेत है कि पर्यटन के विकास की योजनाओं में जल सुरक्षा को अब टाला नहीं जा सकता।
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