
पर्यटन आलाकमान ने पूछा “आउटकम” क्या है? बगलें झांकते नजर आए अफसर…!
एक्शन मोड में आलाकमान…!
अधिकारियों की मीटिंग में अफसरों को दो-टूक…
विदेशों में 5 इंटरनेशनल ट्रेवल मार्ट में करोड़ों के खर्च का क्या है “OUTCOME”
स्टॉल साइज घटा, बजट बढ़ा—खर्च के गणित पर उठे सवाल
अफसरों ने साधी चुप्पी, अब आलाकमान ने मांगी रिपोर्ट
ट्रेवल मार्ट में स्टॉल पर करोड़ों खर्च और अफसरों की यात्रा पर रिपोर्ट
नवीन सक्सेना,
जयपुर,dusrikhabar.com। राज्य के पर्यटन विभाग में विदेशी दौरों और ट्रेवल मार्ट्स पर हो रहे खर्च को लेकर अब जवाबदेही का सवाल खड़ा हो गया है। जानकार सूत्रों की मानें तो सचिवालय में बैठे आलाकमान ने पर्यटन विभाग की मीटिंग में सीधे पूछा “इन यात्राओं का आउटकम क्या है?” सवाल इतना सीधा था कि मीटिंग में सन्नाटा पसर गया। अफसरों के चेहरे पर असहजता साफ दिखी और जवाबों की जगह बगलें झांकते नजर आए।
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अनियमितताओं पर पूछा सवाल, कसी लगाम
लगातार पर्यटन विभाग में अफसरों के विदेश दौरे और अन्य खर्चों पर सवाल उठ रहे थे। इसी बीच आलाकमान ने कुछ स्वीकृतियों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए अधिकारियों की मीटिंग बुलाई। मीटिंग में आलाकमान ने स्पष्ट कहा—किसी भी मंजूरी से पहले यह बताया जाए कि इससे विभाग को वास्तविक फायदा क्या होगा। दरअसल, पर्यटन विभाग सालभर में करीब पांच विदेश यात्राएं शेड्यूल करता है। इन दौरों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
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ITB Berlin – बर्लिन, जर्मनी
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JATA Tourism Expo – टोक्यो, जापान
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IFTM Top Resa – पेरिस, फ्रांस
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World Travel Market (WTM) – लंदन, यूनाइटेड किंगडम
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FITUR – मैड्रिड, स्पेन
इन आयोजनों में योग्यतानुसार विभाग के अधिकारी बारी-बारी से विदेश जाते हैं। गौरतलब है कि इन यात्राओं का उद्देश्य मार्ट में राजस्थान पर्यटन की स्टॉल्स पर आने वाले दुनियाभर के ट्रैवल एजेंटों को आकर्षित करना और राजस्थान में पर्यटकों की संख्या बढ़ाना माना जाता है। आपको बता दें कि हर वर्ष ये मार्ट होते हैं जहां राजस्थान पर्यटन की स्टॉल लगाई जाती है।
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स्टॉल का साइज घटा, खर्च बढ़ा—कैसा गणित?
सचिवालय सूत्रों के अनुसार, आलाकमान के पास पहुंची फाइलों में कुछ विसंगतियां दिखीं। उन्होंने पूछा कि पिछली बार ट्रेवल मार्ट में स्टॉल का साइज और बुकिंग राशि क्या थी और इस बार क्या है? अधिकारियों ने जब आंकड़े रखे तो पाया गया कि पिछली बार के मुकाबले इस बार स्टॉल का साइज छोटा है, लेकिन बुकिंग राशि अधिक है। इस पर आलाकमान ने सवाल दागा—जब पिछली बार बड़ी स्टॉल लगाई थी तो इस बार साइज छोटा कैसे? और राशि इतनी अधिक क्यों हुई? कुछ अफसरों ने हिम्मत जुटाकर जवाब दिया कि इस बार स्वीकृति में देरी के कारण छोटे साइज की स्टॉल महंगी दर पर लेनी पड़ी। अब सवाल यह है कि क्या प्लानिंग में देरी की कीमत सरकारी खजाने ने चुकाई?
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आलाकमान बोले करोड़ों के खर्च का ‘आउटकम’ क्या?
विदेशों में आयोजित ट्रेवल मार्ट्स और फेयर्स में राजस्थान पर्यटन विभाग अपने स्टॉल्स बुक कराता है। इन आयोजनों में तीन से पांच दिन के लिए आयोजन पर करोड़ों रुपये तक खर्च किया जाता है। ऐसे में आलाकमान का अगला सवाल और भी तीखा था—पिछले एक वर्ष में जिन भी मार्ट और फेयर में अधिकारी गए, उनकी रिपोर्ट क्या रही वो प्रस्तुत की जाए।
उन्होंने साफ कहा कि पहले यह बताया जाए कि इन विदेश यात्राओं और स्टॉल्स का वास्तविक आउटकम क्या निकला? सवाल उठता है—क्या विदेशी दौरों से लौटने के बाद किसी अधिकारी ने सूचना जारी कर यह नहीं बताया कि उनकी यात्रा के दौरान कितने टूर पैकेज बुक हुए? कितने विदेशी पर्यटक बढ़ने की संभावना है? या मार्ट में किसी ट्रैवल एजेंट के साथ कितने एमओयू साइन हुए?
मीटिंग में सन्नाटा, जवाब का इंतजार
आलाकमान के इस सीधे सवाल पर मीटिंग में सन्नाटा छा गया। विभागीय अधिकारी स्पष्ट जवाब देने में असहज दिखे। जानकार सूत्रों का दावा है कि अब तक किसी अधिकारी ने विदेश यात्रा की विस्तृत रिपोर्ट सब्मिट नहीं की है। अब जब जवाब तलब किया है, तो विभाग के अफसरों को स्पष्टीकरण देना ही होगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह स्पष्टीकरण सार्वजनिक किया जाएगा?
बहरहाल पर्यटन में आलाकमान की सख्ती को देखकर एक बात तो तय मानी जा रही है कि आलाकमान पूरे एक्शन मोड में हैं और वे चाहते हैं कि विभाग में जो भी खर्च हो रहा है उसका पर्यटन विभाग को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले। साथ ही राजस्थान में पर्यटकों की संख्या में कई गुना तक बढ़ोतरी हो। वहीं आलाकमान का फोकस इस बात पर भी है कि विभाग में पारदर्शिता में भी और बढ़ोतरी हो।
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