आज के युग में प्रभाव का महत्व: रिश्तों और सफलता का पैमाना बन रहा ‘प्रभाव’

आज के युग में प्रभाव का महत्व: रिश्तों और सफलता का पैमाना बन रहा ‘प्रभाव’

समय नहीं, प्रभाव तय कर रहा है मानव संबंधों की दिशा और दशा

पद और प्रभावशाली संस्थान से बना प्रभाव लोगों के दिमाग पर चढ़कर बोल रहा

समाज में भी ऐसे ही प्रभाव की चकाचौंध में जल्द आ जाते हैं लोग 

व्यवहार, सोच और संवाद से भी बनता है प्रभाव लेकिन उसका असर कम

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर,dusrikhabar.com। आज के बदलते सामाजिक और व्यावसायिक दौर में मानव संबंधों में प्रभाव का महत्व समय से कहीं अधिक बढ़ गया है। अब यह मायने नहीं रखता कि आप किसी व्यक्ति को कितने वर्षों से जानते हैं, बल्कि यह अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि आज के समय में आपका उस पर कितना प्रभाव है। आधुनिक समाज में प्रभाव ही वह शक्ति बन चुका है, जो रिश्तों, निर्णयों और सफलता की दिशा तय करता है।

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समय से आगे निकला प्रभाव का युग

एक समय था जब रिश्तों की मजबूती वर्षों की जान-पहचान, पारिवारिक जुड़ाव और सामाजिक परंपराओं पर आधारित होती थी। लेकिन आज का युग तेज़ रफ्तार, प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ से भरा हुआ है। इस कलयुगी दौर में लोग उसी की बात सुनते हैं, उसी को मानते हैं और उसी के साथ आगे बढ़ते हैं, जिसका प्रभाव उनके विचारों, निर्णयों और भावनाओं पर पड़ता है। चाहे कार्यस्थल, समाज या निजी जीवन हो—हर जगह प्रभावशाली व्यक्ति की बात को अधिक महत्व दिया जाता है, भले ही उससे जान-पहचान हाल ही में हुई हो।

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प्रभाव केवल पद और धन से नहीं बनता

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभाव केवल पद, धन या शक्ति से नहीं आता। यह व्यवहार, सोच, संवाद शैली और व्यक्तित्व से भी निर्मित होता है। एक सकारात्मक सोच रखने वाला, स्पष्ट और प्रभावी संवाद करने वाला तथा दूसरों को समझने वाला व्यक्ति कम समय में भी गहरा प्रभाव छोड़ सकता है। इसके विपरीत, वर्षों पुरानी पहचान भी तब फीकी पड़ जाती है, जब उसमें विश्वास, प्रेरणा और भावनात्मक जुड़ाव की कमी हो।

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प्रभाव ही रिश्तों और सफलता की कुंजी

यह कहना गलत नहीं होगा कि आज के युग में रिश्तों और सफलता की सबसे बड़ी कुंजी प्रभाव है। यदि हम चाहते हैं कि हमारी बात सुनी जाए, हमारे विचारों को महत्व मिले और लोग हमसे जुड़ें, तो हमें अपने व्यक्तित्व, सोच और व्यवहार को ऐसा बनाना होगा कि हम दूसरों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकें। यही आज के समय की सबसे बड़ी और सच्ची आवश्यकता है।

आज क्या कहा कमलेश जी महाराज देखिए वीडियो में:-

खोने का दुख क्या होता है

गायत्री भवन में रविवार को कमलेशजी महाराज ने भक्तों को मार्गदर्शित करते हुए कहा कि जिन्होंने हमेशा पाया ही पाया हो उसे खोने का दुख क्या होता है उसका अहसास नहीं हो सकता। जीवन में एक बात हमेशा याद रखो कि अगर आप किसी के जीवन में उसकी खुशी का जरिया नहीं बन सकते तो कोई बात नहीं लेकिन उसके दुख में उसका सहारा जरूर बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आपके छोटे प्रयास से किसी को खुशी मिले तो आपको ऐसे प्रयास करते रहने चाहिए। 

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