
हिस्ट्रीशीटर की कार पर सभापति की नेम प्लेट…! कलक्टर ने दिए जांच के आदेश
प्रतापगढ़ में वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
बिना पद के ‘सभापति’ की प्लेट लगाकर घूम रहे प्रहलाद गुर्जर पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राजकीय कार्यों का निरीक्षण करते दिखे व्यक्ति
हिस्ट्रीशीटर होने के बावजूद सार्वजनिक रूप से ‘सभापति’ लिखी प्लेट का उपयोग
नगर परिषद अधिकारियों की मौजूदगी में निर्देश देने का आरोप, कारण स्पष्ट करने की मांग
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर/प्रतापगढ़, dusrikhabar.com। राजस्थान के प्रतापगढ़ में इन दिनों सोशल मीडिया वायरल वीडियो को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। दरअसल एक वीडियो में यह मामला सामने आया है कि नगर परिषद प्रतापगढ़ की पूर्व सभापति रामकन्या गुर्जर के पति प्रहलाद गुर्जर, जो थाना प्रतापगढ़ के हिस्ट्रीशीटर बताए जा रहे हैं, बिना किसी निर्वाचित पद पर होते हुए भी स्वयं को ‘सभापति’ दर्शाते हुए सार्वजनिक स्थलों पर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
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हिस्ट्रीशीटर होने के बावजूद ‘सभापति’ की प्लेट लगाकर घूमने का आरोप
वायरल वीडियो में दिख रहा है कि प्रहलाद गुर्जर अपने निजी वाहन (रजिस्ट्रेशन नंबर RJ-35UB-3333) पर “सभापति, नगर परिषद प्रतापगढ़” की प्लेट लगाकर शहर में घूम रहे हैं। आरोप है कि वे स्वयं को सार्वजनिक रूप से हिस्ट्रीशीटर बताते रहे हैं और उनके विरुद्ध पूर्व में कई आपराधिक प्रकरण दर्ज एवं निस्तारित हो चुके हैं।
ऐसे में बिना किसी वैधानिक पद पर रहते हुए इस प्रकार की प्लेट का उपयोग करना प्रशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यह मामला अब नगर परिषद प्रतापगढ़ की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठा रहा है।
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राजकीय कार्यों के निरीक्षण और अधिकारियों को निर्देश देने का दावा
वायरल वीडियो में यह भी देखा गया कि संबंधित व्यक्ति राजकीय कार्यों का निरीक्षण करते हुए नजर आ रहा है। इतना ही नहीं, नगर परिषद के अधिकारी और कर्मचारी भी वीडियो में मौजूद दिख रहे हैं।
आश्चर्यजनक रूप से, आरोप है कि वे अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश देते हुए दिखाई दे रहे हैं। जबकि वे किसी भी निर्वाचित या अधिकृत प्रशासनिक पद पर नहीं हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रतापगढ़ प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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अधिकारियों से मांगा गया स्पष्टीकरण
मामले को गंभीर मानते हुए जिला कलक्टर अंजलि राजोरिया ने एक आदेश जारी कर संबंधित प्राधिकरण से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि आखिर किस आधार पर उक्त व्यक्ति राजकीय कार्यों का निरीक्षण कर रहा था और किस अधिकार से नगर परिषद के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दे रहा था। यह भी पूछा गया है कि नगर परिषद के अधीनस्थ अधिकारियों ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई और उनकी मौजूदगी में यह गतिविधि कैसे संचालित हुई।
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प्रशासनिक पारदर्शिता पर उठे प्रश्न
यह प्रकरण न केवल एक व्यक्ति की भूमिका पर बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है। यदि कोई गैर-निर्वाचित व्यक्ति स्वयं को पदधारी दर्शाकर सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप करता है, तो यह शासन व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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