राज्य बजट 2026-27: उद्योगों को रफ्तार देने वाला: उद्योग,वाणिज्य मंत्री केके विश्नोई

राज्य बजट 2026-27: उद्योगों को रफ्तार देने वाला: उद्योग,वाणिज्य मंत्री केके विश्नोई

राज्य बजट 2026-27: उद्योगों को रफ्तार, युवाओं को रोजगार का बड़ा रोडमैप: केके विश्नोई

एनर्जी ट्रांजिशन स्किलिंग क्लस्टर से युवाओं को आधुनिक कौशल

लॉजिस्टिक ईको-सिस्टम मजबूत करने को इनलैण्ड कंटेनर डिपो और मल्टी मॉडल हब

लघु उद्योगों के लिए संभाग मुख्यालयों पर प्लग एंड प्ले फैसिलिटी

विजय श्रीवास्तव, 

जयपुर,dusrikhabar.com। उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के. के विश्वनोई ने राज्य बजट 2026-27 को प्रदेश में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने वाला दूरदर्शी बजट बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट रोजगार के अवसरों में वृद्धि और स्वरोजगार को बढ़ावा देने का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है। प्रदेश को विजनरी बजट देने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी का आभार जताया। 

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उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के. के विश्वनोई

उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के. के विश्वनोई

मंत्री ने कहा कि नए लॉजिस्टिक हब, जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र के लिए 3,600 हेक्टेयर भूमि विकास और रीको की डायरेक्ट अलॉटमेंट पॉलिसी को जारी रखने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों से प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। साथ ही, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देकर स्थानीय उद्यमिता को मजबूती दी जाएगी। वर्ष 2047 तक राज्य की जीडीपी को 4.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने तथा उद्योग एवं सेवाओं का योगदान 80 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

राइजिंग राजस्थान से धरातल पर उतरे 8 लाख करोड़ के निवेश

उद्योग राज्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में औद्योगिक विकास के लिए कई महत्वपूर्ण नीतियां लागू की गई हैं। राइजिंग राजस्थान के तहत हुए 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू में से 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते धरातल पर उतर चुके हैं।

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उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष प्रतिदिन औसतन 8 उद्योगों को जमीन आवंटित की गई। औद्योगिक आधारभूत उन्नयन एवं विकास पर एक वर्ष में खर्च की गई राशि पिछले 50 वर्षों में सर्वाधिक रही है। निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सिंगल विंडो 2.0 प्लेटफॉर्म के तहत ‘एक आवेदन और एक डिजिटल ट्रैक’ प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे सभी विभागीय स्वीकृतियां एक ही मंच से मिल सकेंगी।

युवाओं को रिन्यूएबल एनर्जी, ई-व्हीकल, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में आधुनिक कौशल प्रदान करने के लिए एनर्जी ट्रांजिशन स्किलिंग क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे उन्हें सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके।

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लॉजिस्टिक हब और औद्योगिक कॉरिडोर से मिलेगा नया आयाम

राज्य में मजबूत लॉजिस्टिक ईको-सिस्टम के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र के सहयोग से इनलैण्ड कंटेनर डिपो और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब स्थापित किए जाएंगे। निवेश को सुगम बनाने के लिए रीको की डायरेक्ट अलॉटमेंट पॉलिसी को दिसंबर 2026 तक जारी रखने की घोषणा की गई है।

दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC) के तहत जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 3,600 हेक्टेयर भूमि विकसित की जाएगी। साथ ही धरमपुरा—बाड़मेर, मसूदा—ब्यावर, कन्याखेड़ी—भीलवाड़ा सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों और लॉजिस्टिक पार्कों के पहुंच मार्गों के विकास के लिए 400 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे।

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लघु उद्योगों को संबल, युवाओं को ब्याजमुक्त ऋण

लघु एवं छोटे उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए सभी संभाग मुख्यालयों पर प्लग एंड प्ले फैसिलिटी विकसित की जाएगी, जिस पर लगभग 350 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत आगामी वर्ष में 30 हजार युवाओं को ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। राजस्थान एक जिला एक उत्पाद पॉलिसी-2024 के तहत चयनित उत्पादों को प्रोत्साहन देने के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। विस्तार के लिए ऋण लेने वाली इकाइयों को 10 प्रतिशत मार्जिन मनी असिस्टेंस भी दिया जाएगा। साथ ही राजस्थान फाउंडेशन के 14 नए चैप्टर शुरू करने की घोषणा की गई है।

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रीप्स-2024 में नए प्रावधान, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग को थ्रस्ट सेक्टर

राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति-2024 (रीप्स-2024) में कई नए प्रावधान जोड़े गए हैं। कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग को थ्रस्ट सेक्टर में शामिल किया जाएगा ताकि एक्सपोर्ट ओरिएंटेड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिले।

आईएफएमएस और रीप्स पोर्टल इंटीग्रेशन से वित्तीय प्रोत्साहनों की प्रक्रिया का पूर्ण डिजिटलीकरण होगा। टेक्सटाइल उद्योग को पेरोल सब्सिडी के रूप में एसेट क्रिएशन इंसेंटिव का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। इंटरेस्ट सबवेंशन का लाभ मैन्युफैक्चरिंग के साथ सर्विस सेक्टर को भी दिया जाएगा।

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इसके अतिरिक्त जीसीसी, वेयरहाउस एंड लॉजिस्टिक्स सेक्टर तथा इंटीग्रेटेड सोलर सेल एंड मॉड्यूल निर्माण इकाइयों को भी रीप्स-2024 के तहत लाभ प्रदान किए जाएंगे, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों का मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित हो सके।

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