
RTI में खुलासा: 20 साल में 200 बाघों का शिकार, “टाइगर स्टेट” मध्यप्रदेश…
MP में 20 साल में 200 बाघों का अवैध शिकार
टाइगर शिकार के मामले में ‘टाइगर स्टेट’ मध्य प्रदेश सबसे आगे
2005 से 2025 के बीच देशभर में बाघों की हत्या, मध्य भारत बना हॉटस्पॉट
मध्य प्रदेश में 36 टाइगर का अवैध शिकार, उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर
तेंदुओं पर भी संकट: 92 शिकार, हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर/दिल्ली/भाेपाल,dusrikhabar.com। भारत, जहां दुनिया की लगभग 75% बाघ आबादी पाई जाती है, वहीं से एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। RTI से खुलासा हुआ है कि पिछले 20 वर्षों में देश के भीतर करीब 200 बाघों का अवैध शिकार किया गया।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) ने यह जानकारी साझा की। हैरानी की बात यह है कि सबसे अधिक बाघों वाले राज्य मध्य प्रदेश में ही सर्वाधिक अवैध शिकार के मामले दर्ज हुए हैं।
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मध्य भारत में बाघों पर सबसे बड़ा खतरा
RTI से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2005 से 2025 के बीच देशभर में लगभग 200 बाघों का अवैध शिकार हुआ। इनमें से 59 बाघों का शिकार मध्य भारत के आवास क्षेत्रों में किया गया।
राज्यवार आंकड़ों में मध्य प्रदेश में बाघों का अवैध शिकार सबसे ज्यादा सामने आया है। बीते 20 वर्षों में यहां 36 टाइगर को अवैध रूप से मारा गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य भारत में फैले घने वन और टाइगर रिजर्व शिकारियों के निशाने पर रहे हैं। ऐसे में Tiger Poaching Cases India को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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क्या कहते हैं वन्यजीव विशेषज्ञ?
वन्यजीव विशेषज्ञ इन घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बाघों के अंगों की मांग से जोड़ रहे हैं। IUCN के टाइगर विशेषज्ञ और भारतीय वन्यजीव संस्थान के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वाई. वी. झाला ने इन आंकड़ों को बेहद चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि शिकार किए गए बाघों और तेंदुओं में से केवल एक छोटा हिस्सा ही अधिकारियों द्वारा बरामद या जब्त किया जा पाता है। इससे स्पष्ट है कि वास्तविक संख्या और भी अधिक हो सकती है।
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भारत में 3600 बाघ, फिर भी सुरक्षा पर सवाल
सरकारी अनुमान के मुताबिक भारत में करीब 3,600 बाघ मौजूद हैं, जो वैश्विक बाघ आबादी का लगभग 75 प्रतिशत है। यह आंकड़ा पर्यावरण मंत्रालय, भारतीय वन्यजीव संस्थान और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के नवीनतम सर्वे पर आधारित है। हालांकि, भारत में बाघों का अवैध शिकार जैसी घटनाएं संरक्षण प्रयासों पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

तेंदुओं की स्थिति भी चिंताजनक
RTI डेटा से यह भी सामने आया है कि इसी अवधि में 92 तेंदुओं का शिकार किया गया। WCCB रिकॉर्ड के अनुसार तेंदुओं के सबसे ज्यादा मामले हिमाचल प्रदेश में दर्ज हुए, जहां 21 तेंदुए मारे गए।
इसके बाद आंध्र प्रदेश (8), जम्मू-कश्मीर (6), पंजाब (5), उत्तर प्रदेश (5), उत्तराखंड (5), मध्य प्रदेश (5) और तमिलनाडु (5) में मामले सामने आए।
करीब 35 प्रतिशत तेंदुआ शिकार के मामले हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों से जुड़े हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वन क्षेत्रों के विखंडन, वन्यजीव गलियारों पर अतिक्रमण और बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
‘टाइगर स्टेट’ में मातम, लेकिन जवाबदेही पर सवाल
मध्य प्रदेश, जिसे ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है, वहां सबसे ज्यादा बाघों की मौजूदगी के बावजूद अवैध शिकार के सर्वाधिक मामले सामने आना चिंता का विषय है।
20 साल में 200 बाघों का अवैध शिकार केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण तंत्र की गंभीर चुनौती है। सवाल यह है कि क्या मौजूदा निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है, या फिर शिकारियों के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है?
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