
प्रोफिट में RTDC, फिर भी होटल कर्मचारियों को सैलेरी का टोटा…!
प्रोफिट में RTDC, फिर भी होटल कर्मचारियों को सैलेरी का टोटा…!
प्रोफिट के बावजूद नहीं मिल रही RTDC होटल कर्मियों को समय पर सैलेरी
राजस्थान ट्यूरिज्म डवलपमेंट कॉर्पोरेशन 15 साल बाद 9 करोड़ से अधिक प्रोफिट में
RTDC कर्मचारियों की शिकायत कि करीब पांच होटलों में तीन से चार महीने देरी से मिल रही सैलेरी
अफसरों कि मानें तो भुगतान तो हो रहा है लेकिन होटल मैनेजर अन्य मदों में खर्च कर रहा फंड
नवीन सक्सेना,
राजस्थान ट्यूरिज्म डवलपमेंट कॉर्पोरेशन (RTDC) को 15 साल की कड़ी मेहतन और प्रयासों के बाद 9 करोड़ के फायदे से संजीवनी मिली है। इस संजीवनी के बाद विभाग में कर्मचारियों को उम्मीद थी कि अब सब कुछ ठीक होने वाला है। अब यहां पर समय पर कर्मचारियों को सैलेरी मिलेगी, कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित हौटल-मोटल को रिनोवेशन और स्थितियों को सुधारने के लिए फंड की जरूरत के लिए सरकार का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा और अब सब ठीक हो जाएगा। लेकिन RTDC के प्रोफिट में आने के करीब एक महीने बाद भी कॉर्पोरेशन के हालात सुधर नहीं पाए हैं।
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कर्मचारियों को तीन-चार महीने में सैलेरी?
अब सवाल ये उठता है कि जब कॉर्पोरेशन को प्रोफिट हो रहा है तो कुछ यूनिट्स के कर्मचारियों को समय पर सैलेरी क्यों नहीं मिल रही है।
जानकार सूत्रों ने खुलासा करते हुए बताया कि बड़े घाटे में चल रही यूनिट्स में अलवर की मीनल, भरतपुर की सारस, पाली की पणिहारिन और माउंटआबू की शिखर होटल शामिल हैं और इन यूनिट्स के कर्मचारियों को समय पर सैलेरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
ऐसे में इन यूनिट्स के कर्मचारियों के परिवारों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उनके परिवारों के आर्थिक हालात अच्छे नहीं हैं।
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अधिकारियों का कहना लगातार हो रहा भुगतान
इधर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विभाग की तरफ से तो उन्हें समय पर सैलेरी का भुगतान किया जा रहा है। लेकिन जो फंड उन्हें सैलेरी के नाम पर दिया जा रहा है। वो फंड वो बिलिंग और अन्य खर्चों की मदों में खर्च कर रहे हैं और कर्मचारियों को सैलेरी नहीं दे रहे हैं। जबकि विभाग करीब करीब सभी की सैलेरी का भुगतान समय पर कर रहा है।
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विशेषज्ञों की सलाह – मैनेजमेंट बदलना जरूरी
RTDC से जुड़े कुछ वरिष्ठ विशेषज्ञों का कहना है कि जिन यूनिट्स में बड़ा घाटा है वहां के मैनेजर होटल को प्रोफिट न देने के बावजूद होटल चालू रखना चाहते हैं, साथ ही वो अपने शहर को छोड़ना भी नहीं चाहते। कुछ विभाग के विशेषज्ञों का सुझाव ये है कि जो होटल घाटे में हैं पुराने मैनेजर बदले जाएं और वहां दूसरे मैनेजर्स को मौका दिया जाए, ताकि प्रोफिट के लिए होटल के संचालन में नवाचार हो सकें और प्रोफिट के लिए प्रयास किए जा सकें।
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32 में से 12 यूनिट्स दे रहीं अच्छा प्रोफिट
दरअसल राजस्थान में RTDC द्वारा संचालित करीब 32 यूनिट काम कर रही हैं और विभाग को करीब 9 करोड़ से अधिक का लाभ हुआ है। आंकड़ों के अनुसार करीब 12 यूनिट्स प्रोफिट में भी काम कर रही हैं। आपको बता दें कि विभाग का इस वित्त वर्ष का दिसम्बर 2026 तक प्रोफिट 8 करोड़ था जिसमें शुद्ध लाभ करीब 23लाख 69हजार रुपए रहा जो कि फरवरी के लास्ट में बढ़कर एक करोड़ से अधिक हो चुका है।
इसमें भी प्रमुखता से लाभ देने वाली यूनिट्स में सबसे आगे जयपुर की गणगौर होटल, नाहरगढ़ स्थित कैफेटेरिया, उदयपुर की होटल कजरी, अलवर की होटल सिलीसेढ़ और जोधपुर की होटल घूमर सहित इन सभी होटलों ने कुल मिलाकार 10 करोड़ 39 लाख 18हजार रुपए का प्रोफिट दिया है। यानि अगर इसमें शुद्ध लाभ की बात करें तो यह भी करीब 1 करोड़ के पार पहुंच चुका है।
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स्थायी MD नहीं, बढ़ रही अव्यवस्थाएं
आरटीडीसी के ही कुछ अफसरों ने कहा कि कॉर्पोरेशन को जब तक कोई स्थायी एमडी नहीं मिल जाता तब तक विभाग की स्थिति में सुधार की गुंजाइश कम है। ऐसे में सरकार को RTDC में स्थायी एमडी के पद पर नियुक्ति जल्द करनी चाहिए।
इससे पूर्व भी कई मीडिया संस्थानों ने RTDC में स्थायी एमडी के पद पर नियुक्ति की खबरें प्रकाशित की जा चुकी हैं। कॉर्पोरेशन में कर्मचारी खुद चाहते हैं कि स्थायी एमडी का पद भरे ताकि कॉर्पोरेशन का विकास की राह में तेजी से प्रशासनिक निर्णय लिए जा सकें।
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