19 एफआईआर और 39 करोड़ की रिकवरी—कड़ा संदेश
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक RGHS अनियमितता से जुड़े करीब 19 मामलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इतना ही नहीं, अस्पतालों, फार्मेसी और अन्य संबंधित हितधारकों से लगभग 39 करोड़ रुपये की रिकवरी भी की गई है।
सरकार ने दो टूक कहा है कि यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।
पहले 7 डॉक्टर निलंबित, अब 8 और कार्मिकों पर कार्रवाई
गौरतलब है कि इससे पहले आरजीएचएस योजना में गड़बड़ी के आरोप में सात चिकित्सकों को नि
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अब प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आठ कार्मिकों ने RGHS कार्ड, उपलब्ध सुविधाओं और राजकीय धनराशि का दुरुपयोग किया। यह कृत्य सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन होने के साथ-साथ सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। इसे गंभीर मानते हुए संबंधित कार्मिकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबित किए गए कार्मिकों के नाम
निलंबित कार्मिकों में शामिल हैं—
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सौरभ कुमार रावत, नर्सिंग ऑफिसर, आर.बी.एम. चिकित्सालय, भरतपुर
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मीना कुमारी चौधरी, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, उप स्वास्थ्य केन्द्र खुडासा, भरतपुर
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किशन देई, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, उप स्वास्थ्य केन्द्र कुचावटी, जिला डीग
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सत्यप्रकाश छावड़ी, नर्सिंग ऑफिसर, जिला चिकित्सालय बयाना, भरतपुर
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मंजू कुमारी, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर, उप स्वास्थ्य केन्द्र नगला माय, जिला भरतपुर
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तुलसी देवी, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, उप स्वास्थ्य केन्द्र हनुमानपुरा, जिला फलौदी
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अनुपमा, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र उच्चैन, भरतपुर
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सुरेश चंद गुप्ता, नर्सिंग ऑफिसर, आर.बी.एम. चिकित्सालय, भरतपुर
इन सभी के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई नियमानुसार जारी रहेगी।
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सरकार का स्पष्ट रुख—भ्रष्टाचार पर शून्य सहनशीलता
राज्य सरकार ने दोहराया है कि RGHS योजना में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में चिकित्सा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्तर पर अनियमितता, धनराशि का दुरुपयोग या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सरकार का उद्देश्य है कि लाभार्थियों को बिना किसी बाधा के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें और योजना की विश्वसनीयता बनी रहे।
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सरकारी अफसरों की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे दुकानदार और उपभोक्ता
इधर सरकार की कार्यवाही को मेडिकल एसोसिएशन के नेता और मेडिकल दुकानदार केवल फौरी कार्यवाही बता रहे हैं। सोढ़ाला, मानसरोवर, विधाधरनगर, मालवीयनगर, दुर्गापुरा, सुभाषचौक, चांदपोल, झोटवाड़ा और वैशाली नगर के कुछ दवा विक्रेताओं ने तो ये तक कहा कि सरकार में बैठे अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति करके इतिश्री कर लेते हैं।
उनका कहना है कि सरकार के पोर्टल पर ही काफी खामियां हैं उन्हें दूर करना भी सरकार का ही काम है। विभाग के इस सॉफ्टवेयर में काफी सुधार की जरूरत है उसमें सुधार होते ही काफी कुछ फर्जीवाड़ा वैसे ही रुक जाएगा। हमारी विभाग के आलाकमान से कई बार वार्ताएं हो चुकी हैं लेकिन सरकार हमारे लोगों को साथ में लेकर काम नहीं करना चाहती।
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