
राजस्थान ट्यूरिज्म डवलपमेंट कॉर्पोरेशन को जल्द मिलेगा स्थायी प्रबंध निदेशक…
राजस्थान ट्यूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में स्थायी प्रबंध निदेशक को लेकर कवायद तेज
6 महीने बाद हरकत में सरकार, विभाग में पहले कार्य कर चुके अफसरों की तैयारी हो रही सूची
वहीं आरएएस कैडर से प्रमोट होकर आईएएस बने कुछ अफसरों के नाम की भी चर्चा
जयपुर, dusrikhabar.com। राजस्थान ट्यूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (RTDC) में लंबे समय से स्थायी प्रबंध निदेशक की कमी महसूस की जा रही है। वर्तमान में RTDC के MD का अतिरिक्त कार्यभार पिछले करीब छह महीनों से पर्यटन आयुक्त रुक्मणि रियाड़ के पास है। इस दौरान विभाग की प्रगति रिपोर्ट को लेकर केवल एक ही बैठक हो सकी, जिससे कई महत्वपूर्ण विभागीय निर्णय लंबित पड़े हुए हैं।
पर्यटन विभाग और बूंदी जिले की प्रभारी सचिव का कार्यभार होने के कारण रुकमणि रियाड़ के पास समय की कमी के चलते विभाग के काफी कार्यों पर निर्णय और आदेश लंबित चल रहे हैं।
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दूसरी खबर की रिपोर्ट के बाद सरकार सक्रिय
गौरतलब है कि हाल ही में दूसरी खबर डॉट कॉम पर प्रकाशित खबर “आरटीडीसी को स्थायी नेतृत्व की दरकार…!” पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने आरटीडीसी में स्थायी रूप से एमडी की तलाश शुरु कर दी।
जानकार सूत्रों की मानें तो शासन सचिवालय में सोमवार को RTDC के एमडी पद को स्थायी अधिकारी देने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। इसके लिए विभाग में पहले कार्यरत अफसरों की सूची तैयार की जा रही है और जल्द ही RTDC में एमडी पद पर स्थायी नियुक्ति हो सकती है।
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आपको बता दें कि एक मंत्री के पास काम चुके एक सहज और सरल अफसर को विभाग में लगाए जाने की चर्चा है, वहीं हाल ही में RAS से IAS में प्रमोट हुए अफसरों को भी आरटीडीसी में नियुक्ति मिल सकती है।
अधिकारी बनाम कर्मचारी की जरूरत पर बहस
हालांकि RTDC में एक अधिकारी वर्ग का कहना है कि RTDC को अफसर की जगह कर्मचारियों की जरूरत है ताकि विभाग का रेवेन्यू बढ़ सके। स्थायी एमडी व अन्य अफसरों के पद आने से विभाग का काम सुगम तो हो जाएगा लेकिन इन पदों के भर जाने से विभाग पर अतिरिक्त वेतन और अन्य भत्तों का भार बढ़ जाएगा, विभाग को फिलहाल इन खर्चों को रोकना चाहिए। वहीं दूसरी और RTDC में कर्मचारियों का एक गुट मानता है कि विभाग में अफसर के होने से काम निरंतर चलते रहते हैं नवाचार की संभावना लगी रहती है और सबसे बड़ी बात ऑफिस ऑफिस की तरह लगता है। नहीं तो ऐसा लगता है जैसे बिना पिता के बालक जिससे काम तो हर कोई चाहता है लेकिन उसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेना चाहता।
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अधिकारियों का यह भी तर्क है कि यदि फील्ड लेवल पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए, तो RTDC का रेवेन्यू बढ़ाने में ज्यादा मदद मिल सकती है। ऐसे में सरकार के सामने प्रशासनिक संतुलन और वित्तीय प्रबंधन दोनों को साधने की चुनौती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार RTDC को स्थायी नेतृत्व कब तक देती है और नया MD निगम को राजस्थान पर्यटन के विकास की दिशा में कितनी तेजी से आगे ले जाता है।
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