
गीतांजली हॉस्पिटल उदयपुर के डॉक्टर सौम्य अग्रवाल को राष्ट्रीय सम्मान
ROSACON 2026 में डॉ. सौम्य अग्रवाल को मिला गोल्ड मेडल
“यंग ऑर्थोपेडिक सर्जन ऑफ द ईयर” अवॉर्ड से हुए सम्मानित
शोल्डर-नी आर्थ्रोस्कोपी और स्पोर्ट्स इंजरी में उत्कृष्ट योगदान
सुश्री सोनिया,
उदयपुर,dusrikhabar.com। उदयपुर के गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (GMCH) ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चिकित्सा उत्कृष्टता का परचम लहराया है। GMCH के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सौम्य अग्रवाल को राजस्थान ऑर्थोपेडिक्स स्टेट कॉन्फ्रेंस ROSACON 2026, पुष्कर में आयोजित भव्य समारोह के दौरान “यंग ऑर्थोपेडिक सर्जन ऑफ द ईयर” गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
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यह सम्मान उन्हें शोल्डर एवं नी आर्थ्रोस्कोपी, स्पोर्ट्स इंजरीज़ के उपचार में उनके उल्लेखनीय कार्य, निरंतर समर्पण और नवाचारपूर्ण चिकित्सा पद्धतियों के लिए प्रदान किया गया।
शोल्डर व नी आर्थ्रोस्कोपी में उल्लेखनीय उपलब्धि
डॉ. सौम्य अग्रवाल ने स्पोर्ट्स इंजरी, कंधे और घुटने से जुड़ी जटिल समस्याओं के इलाज में आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर सैकड़ों मरीजों को लाभ पहुंचाया है।
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उनकी विशेषज्ञता ने ऑर्थोपेडिक सर्जरी के क्षेत्र में गीतांजली हॉस्पिटल को एक नई पहचान दिलाई है। उनका कार्य न केवल चिकित्सकीय दृष्टि से उत्कृष्ट है, बल्कि युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रहा है।
सम्मान को गीतांजली हॉस्पिटल परिवार को किया समर्पित
इस अवसर पर डॉ. सौम्य अग्रवाल ने इस उपलब्धि को पूरे गीतांजली हॉस्पिटल परिवार को समर्पित करते हुए विशेष रूप से गीतांजली ग्रुप के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अंकित अग्रवाल, डीन डॉ. संगीता गुप्ता, मेडिकल सुप्रीनटेंडेंट डॉ. हरप्रीत सिंह, ऑर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. रामावतार सैनी, अपने सहयोगी चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग के बिना यह सम्मान संभव नहीं होता।
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प्रबंधन ने दी बधाई, उज्ज्वल भविष्य की कामना
गीतांजली हॉस्पिटल प्रबंधन ने डॉ. सौम्य अग्रवाल को इस राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रबंधन का कहना है कि ऐसे सम्मान गीतांजली हॉस्पिटल की चिकित्सा गुणवत्ता और शोध-आधारित उपचार पद्धतियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाते हैं।
कंधे और घुटने की आर्थ्रोस्कोपी: कम दर्द में बेहतर इलाज
आज की आधुनिक चिकित्सा पद्धति में शोल्डर (कंधे) और नी (घुटने) की आर्थ्रोस्कोपी एक सुरक्षित और प्रभावी इलाज के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह एक मिनिमल इनवेसिव सर्जरी है, जिसमें बड़े चीरे लगाए बिना ही जोड़ों की समस्या का सटीक इलाज किया जाता है।
कंधे की आर्थ्रोस्कोपी कैसे होती है?
शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी में डॉक्टर एक छोटे कैमरे, जिसे आर्थ्रोस्कोप कहा जाता है, को कंधे के जोड़ में डालते हैं। इससे रोटेटर कफ फटना, फ्रोजन शोल्डर, शोल्डर इम्पिंगमेंट और लैब्रम टियर जैसी समस्याओं की पहचान कर तुरंत इलाज किया जाता है।
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घुटने की आर्थ्रोस्कोपी क्या है?
नी आर्थ्रोस्कोपी का उपयोग ACL लिगामेंट, मेनिस्कस और कार्टिलेज की चोटों के उपचार में किया जाता है। छोटे चीरों के कारण मरीज को कम दर्द होता है और वह जल्दी चलने-फिरने लगता है।
इस सर्जरी के फायदे
इस प्रक्रिया में मांसपेशियों को कम नुकसान पहुंचता है, दर्द कम होता है, निशान छोटे रहते हैं और रिकवरी तेज होती है। सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी और नियमित व्यायाम से जोड़ की ताकत और गतिशीलता जल्दी लौट आती है। अगर जोड़ों में लगातार दर्द या जकड़न है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेकर आर्थ्रोस्कोपी एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
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